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Full text of "Sagarika Pt.2"

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छ ७९ 
~पर न्वियञ 
च्व 
टन्य 


व (छल (र ष] 


भिक) 

मोगभेव्रिकांत्र षिडग्र छाने थकांभिंड क्ठेन। छाणारषि 
कद. (फथिवाव्र एकग टे थक ष्टानांत्‌ ङ्न भोकि 
गौद्व; खग क्वि मर्पय भोरेक्भे (मदे करी माखन 
कद्विष्वन । गशहरकवब्र ग्र यदोद््रड अकागेक मोम शरूखक 
ख छेडम काशखं ७ दल्‌ न्तत वि मिग शूखाःकव्र (मोष्टैव 
नन्णात्न कद्ििषटष्टन। यथम लोशव्र य ठेठ] जोड 
"ढेन नैत्िखिभ मखल भन कंठिव। ७२८ श्वन्‌, 
"न १७७१ मान 


जेयेकृकशजग्रो्ेमो | 
(माना-रोछेम्‌ | यदकृत 


८ स ५ 9 = >® 2: (म 


५-४ 
ॐ  .- ^ 4, क, 








च्वि च्छा 


[8 1" “ \, 


अश भब्द 


छत मङश्जाभत्र 


छेः, रे कानेन निदृमा (लोक्षठि धय किकषिनि गक्ा्ण 
त्तौ उ\. दजिड नावि न।। मजा कगट्डत्र माङ्कदषत मक्र 
मख मसुकषे ठेनि शत्र कदिम्रोदष्टन ; अमन कि मद्िल भीत्‌ 
ऊशात कवार खानक अणि उ्टेष्ड मभूटणव्र उकम 
ञ्च कद्वद बराथिग्रोन । 

कङक्श्लि कथ। खांभाव कोष्ट व्रत मर रिषि (शन्न, 
--८मडे ब॒यिव कथ), (एो्-कृठदौट्ड आटकत कृण्‌।, थावाब् 


२ मे नतिक। 


यमात्‌ नैव घुम नाशम, लाफाटङत्र क्पफ़ंतौटक्त॒ पृत्‌ 
मभूणवदक्र घन धन वाण्रन (तथान), मृतवन्‌ (छाद्य लाभाद्रदड 
नो लोश्रारे् काशव डर) श्िनाठेम्‌ लश्य, ८म 
रुख नोदिट्कव मारवाखिकि शादाङ--टठे ममदृ्त॒ के} न्‌ 
किष्टूठे वुङ््डि शत्रिनामन्‌)।. 

यन यामन्‌) छातटठ अठ्ःमानीःत्त॒ तुटकत्‌ द्शत॒ रिदा 
लिगि । कि विनाल, खमौम, नौनांड खष्छ मभूणं ! धशिनोद्‌ 
ममरण मनरिव्‌ चगक्छ। 4ठे नडे ब्रऱाम'भटवुत खनत] 
मव्दाद्नेक्र] ख € शल्क्त्‌। कंषएव्‌ ण्ड सन्त गष 
कन ; कऊट्लव्र टठेनेव ८क (यन खटश्रत्‌ शलश मःयाषेम्‌। ्सादष्ठ। 
थक्छठेना एषि एार्मि मथा पुतिय। 2८९, एड (षएाट्य 
सन ताटका दुत नामिव खाद्म; मद्रोव -°न्म्‌लम, अनम्‌, 
गिगिन्न कठ छे, कन्म यन्‌ (कान्‌ निक्रटकटमत्र कंन टेम 
९ ककम रकग ठेठ । रिदनव॒ शत्र णिनि कष्ि्डःषट, 4 
खभ खमौम मभुणं आतर ुनतराग ना (कोथाँग॒८ (कान 
छक्र न] ग (फयिलाम ना। मभु खनद (मोन्तकी 
(फयिग्र), मभु्णव्र विख >)8य। येय], टेमनिक्‌ (त्राऊ- 
नाप! लि्िम्र निनि काषिदड लान । 

मभूटव्र छेनेतव्र कड व्रक्म (तनै विद्णमत्र शायी (फरिलाम। 
मि-मिषे, नान्‌, वानूवाहव्रम्‌ व॑ड्डि नन नादौ मभूत्‌ 
छेगव्र ठेश्डश्िनि। कडकश्नि काष्ट नडः मभुजकटल्‌ 
ठशतर ददम मड छामिष्रष्िलि। अड़े मव गोयौ यकन 


(* 


म1‰ विक 


१ ठुोलोत॒ राला मरन रष्वा एन: कि अभमौप्र कऋमड। 
छनवान ठेछामतर र्सिष्टन। ठेका्त्‌ भलःब्‌ खद किल 
खडि विदि, नाशो कर्कश उदक्त रध" भनिड न'०। 


कड्कश्लि ख्ष्ुड उट माठ (णयिलाप्र, ढक {फत्‌ 





[नदमरन मष 


मकटलव्‌ नम क्ानिन।। मानुर्मान, माक)टटन्‌, ठ'त' मर] 





२। त्‌ गान्‌ र्ट 


\ स्टवागान माष, नोन) शकान्‌ क्षन्‌, कतर्म, कंडाल 


1 


मशु द्‌द्‌) 


मष्ट, ठाङ्टौ ङाक्रद गोष्ठ, माङाक्त भाट ठेराकद मर्व्द प 





मदद नक्र] नख) गक कंठामम, कयन) कथन शुव कुलि) 
ठे, विक 
गोष्ठ, एक 
माष, चेष.कूमाछ, 
शुकत्‌ म], कुटछ। 
मोष्ट--गिदठ मख 
वर्‌ कङ्‌, ठे7नक्‌- 
णिक रेल्‌ माष 
--गाध ठे 
नक्‌, जिभ्‌-माष 
--कं]7लाव्र ेनैव्‌ 

खष्ग माए ` माप1. मापे] ण]; 
अदछषि बात नड दरोद्क्‌व्र (नकन नडे; (भुनीामि मष्ट 
नाकठे। शग नशा; (वऽ मोट माथाश्चन। वृ वृषु, 





म्‌]¶दक। 


¶ मोद्कवाहन शर्ख, भो जाकक्रत् मर क ; वण नण भोगता 
„ मोष््-थाषठेट्ड अङि सख कंडकश्लि मोषे (फथिल्लम 
याक] त।ऽनोयौत मर मगुद्यत्‌ मटशा दामा निष दाम कट्वर 





(नालम्‌ चकग २५ माठेल (वाश एनि्डङ्िनि। >५८१ 
छोगोत्रौ खोलिदय ४> पशि अक्रत), >५ जशिमोवर॒ क] 


५ भोति 


न त = थ = ~ ~ न ० 


किलि ष्रौभै (तथिल्ड नाङेलनाम। यरे निष्लन पौव 
ङत्‌ धिम्‌] काकः एनि लोिन्न। किन्निः प्रौग निष्टान 
(कुल्य) ऊर ठेनात टेडव्‌-भज्छिम भर्विम्‌। छाव्नदमत्‌ 
न्द्िकि एलिदढ नागिन । सदठरेथान उक्‌ ठीक ममः 
धौ शौ एलिःङ लान € मोना मदक खनं ऊल्नत्‌ 
उननाग दिष्‌) एलिलन। धनोषिलम्‌ कमठे नाबि्ड नाभिल, 
किन्न खाद नाध) सायन | 4 {मे ट)व्रड मररामोर्नद 
--यशथादन ५,८.०० कुक अर्थः भाद मठे तमि (रूलिष् € 
मगुण्टन शःश्ष) साय नादं! 

>द्८मा कऊकृगादौ। मभूट्णत षएटङ्किट्क (कशा किष 
(यिद नीलम न।| मग्र पिन्द नादिनम्‌ कटनद 
ठेशद्‌ छा्िम्‌) एलिलन । ग कणि क्रु ज्व यिष्टटनद्‌ छन्‌ 
(उलन € द्र चे<क्िश् कठ्‌ कत्रि ऊग़ाऊ एनिः 
लःर्गिल्नि। नुत्‌ छृकरेट्डं (य (एिट्द्‌ (मष्ट वन्निदटव कृषः 

ठकाग्‌ ग्गो एलिडगषट 

ल्ल] < पट्‌ ममम वक्फद्त्‌ धकटे। छिमात्‌ नु्छिभुटय 
गष (ल्यिललाम; दवाय ठ्य जिदटनि ष्ठे नक्रा 
श्नि | 
दातत ्नि ञ्छ्न कृशानौ => फाथिपा अर्म 
दिवुनातृथः नति ठृठेलाम। क्िनव (यननार्‌ कत छथुक्रत्‌ 
ठ[त्‌ सप्राण माकर माकर एशल्निःड ननाशिन। जहेयाटन 
ङ ध्{वत अडाष्ज्ग्रः केकर (यमनि एद्वर (मनि स्म) 


म्‌ ्कं। १" 


टत शिप धमत वरह, (ग़ वकद] मोक]; ठव 
मर्ववशक् जगाद नाग्नि क्रीड। यामव कत्‌ कऊनानाद्‌ 
गणम रमिभ्िलाभ; राट (फयिष नक धकप क" ४त्‌ 
शमन (कदत कव ठेनव न।ख्ोष्रेदा गण्ड लःभिन ८य 
नषट्कि ओागा्कद्‌ 
खग ठन ध्य रकष 
ङ्म्‌ (रनिन। 
(कयि (ल्य7ड 
८नाषिनम्‌ शूव ८छ)वु 
एलिल्ड लानिन्न, 
ठा 0दत्रत्‌ पल € शिष्टेन 
णेस वशिन्न | 
०१८ छकरशरतौ | 
गार नृक्राशमानोदत्‌ 
क्र गैषिनि। 
शके वषु विश्च € 
ोख्किनकं छिनिम 
वागत (षाय धाय शष नातिन । कलत सः 
खाःनके गृद्ापठु छोमिग्‌ याष । करात्‌ ठ्)कात्‌ गुट्द्तठ 





शक्रानपौ एश मभू खामिभ्र) गख्विाष्ट। रातत फन . 


मषानद्न्ते छक] छक्र कति! । 
गक्घा। १ वर॒ ममम (फयिलोम्‌ खात एष मानद किष 


मर्क; 


पनिष््ि। घ्रा भूक नप्‌, ५ ८्य चक्दाट् ए । 
एङ्क्लिःक टव मत्र! बरे्लव भेत्‌ मरषेल एलिलोम 
ड्व्‌ 4 एश्-माशेत्‌ श्य न) | 

कनध्मन्‌ दिष्ट ठ्ठ अोमाट्क ठेठ काट्१ छिष्छाम 
कंटिनि। अमि दल्लिलम, '"वथानकात्‌ नाम एक-माभव्र, किल 
डाट़े नटल बर्न कद्‌] न धय < मडि मडि ए। क 
दकम मण] मः) (नाक), एनत म्र मक्त € लकम्‌ < केशि 
क्म्‌ छात्‌ तक छश.--मगुष्णत्‌ ठिक रेयान उन द्ग 
(ख्ट्म (टय! (महे कद्ग योनकोत्‌ छल «ड मा] 
याम्‌ । एद्निण प्रोदरेल शकम मराल दान गोभिर यत्‌| 
यःटन चद्व दर्ग । शशिनीव खाव्र (क्ःशा€ यमन भोतु) 


पथ्‌ नौव न) | 


षिडिस न॑वि्त 


लक्घोत्र गूकाट्कड' 


गदिन रेण््म ऊाष्रग्राव्री। एएश्रुत (ननाश (नाहिनिमं 
> छथ चेव जक्रावब्रगातव काठ खामिल। वकृज्नि भेटत 
याल क्न] (पयिष्ड नषेननोमर। खा मेल नष्टम 
ठे श़ाकाव्र शुचे धक विगोन नद्दड्दथनी। मुत्‌ एषे 
थे गारा एुराशतन्नि बडा बषटुड (पवशन । गान 
(एरय दृविलांमर ठे} लह एठौने। काशन नियः जामिम 
विदलन. ५अदकमात्र, मामन. लक्ह। प्रौग, भूकर ज्र ठेर] 
ङ्वनविशा। गर्त) (कमन कात (डाल (शङ यानन | 

के]:शृष्नव्र कंथ] निम्‌) अमि दिगि ठ्ढेलाम। 
छस्दामौत्‌ काष्ट कागेन ङि चरनत्रायु निदकतर शद 
श्ट्वन ? 

काशेरफेन अमाव विश््राश्व कोवण वुद्धि्ड श!ह्ट्लिन, 
वलिलन, “जड विग श्न (कन, शक्मा? वमत] 
गूकातर (कड (पयव); यन बरकत (डाल्‌वात्र मभ्य नष, 
काट्तरत्र मक्र (एय) कवोव (कोनष्यनाष़े। लयन प्रानोतर 
एेशगोगटतव्र' गिक सोशाङं एना वाल यामि, मथो 
शष्ट किक त्राड श्व)" 

काणेन वक्कन कर्मातोक सद्ग कि मत्‌ 


~ === ------~--- ~~ ~ काक = -- ~ न~ 


~ मौन[किकंः 


0 १ 7 र रि त ता 0 1 
५ 


वल्लिटलन। उत्तर ऊर शरूनदोम ऊट्लत उनम व्‌ 
माट्न्नि। कानेन खामाटरकं ङिष्ठामो कट्द्नन, ^वाष्छ, 
साग्नि षृाष्टत॒ क्य (न ठंग नोट्वनन) डः 

सागि विनाम, शना, किक 4 नरक कयन कृटव्रतु 
मटन भेख्िनिद) ककव मष लड कडि नि!" 

--“खामोटण्ठ्‌ किंडर भुव खङा[म खाष् साढ़े (ङ्क 
क{व्न मकल खण्ग निश गःगोण्तु (ट्क्माड कृटव, कृतुण 
रुष्ट माछ नडे (सथनि मान शावा (परनि 
रि शुङ्छनकं ।* 

श्रे दल्िश; सालकटकत्‌ म कान फन विय नषेट्लन। 
ठःषट्द्द्‌ मामन भुहवनणुधि क्ःएकेग्‌। लट कति रषेटन 


ग्निर्‌! अमाव मवद कषे न्शि देति; सफ़र कं 
यामिमू। टलिट्‌ सुदेकःन॒लाः8 नाक्ादफम चेनत ङान्नुकं 


८ 


कष्ट कलग यष्ट डृढरेव. न्‌) खाख्िकत कण्ट मिः 
कान्‌ कव्िटड उट्ेद, वमन ति युन््वुदट्न वाच भर!तिध 
याटेटन ठ्न, उठा ठडेटल € च्ड छ्य रषे न)। उाविमु] 
छवि कन (ल न्फ विन्ण्‌ च्म (कथ) ज््ि। सामि 
निरमा (य यान्कामान पौटशव काखीत्‌। उड अकष 
षत्‌, नटे ए षद्वरत माक भुटथाभु य काके नण कात्र: 
किक कगकनद्रे व करा] खिविग्‌] जराम) 

नफ. £ कनूदमन्‌ सामल नेत कहत कष कान 
न निदमाव निभ्रब्ानेद्‌ कथ! तल्िन्नम्र। कान नकृ] 


मुर बिक' ५ 


¦ खागरव। गुकाकरटं (एचिषड याठेद न्ष ङाठ़ा4 शुवे 


खानन्किछ रुषेल। 

(म. वनिन, “गुकाटकट ण्यद्‌ याद्ष्ट्‌ खादनं भक 
मम्नकर किष (छदम साश्म्‌ छाल)" 

खमि वन्निल्नाम, “ड (तम ठ; (डामत्‌] वम, कं कनः 
1 €, दन्न | 

कनटमन्‌ वलिल्ल,^साष्छ). शयथाय वनून गुतः एिरिकषः कि} 

खोमिर्तालिन्नामि, “करविदर नदलन, भकः रुरष्छ मःश्रातत्‌ 
अछ्िन्करू ; उात्रडदामौद् वालन खाकम कटठ्‌ विक्र(कं निभित्‌ 
नाः छमा वरवेष्वं मुक्ता ठग: मादा वदन 4 ठृ यक्‌ 
खडि सनतत वरङ्ग, खः ५7, गतता, दुक्‌, के17०, न्क डद) 
खडि यष्डत्‌ मज्ड्िकेृ| वारष्त्‌ कलव; टदव्डानिक् दलन, 
ठेठ। फमुदकफे 8 कानुवनष़ अर्‌ नष्केम्‌ शके ठे छिनिधयत 
गिगिडढ भके; ङौरट्वुविष्ण्त्‌। दल्नन, केक <क्श्क्‌|त्‌ 
कगे्ठेत (कमिःरुड तल शर्थद ममष्टि भाद । नौन्न, 
नोनाङ, (वदन, मा] नोन शकतृत्र भूकका इद्र थक । 
मभूणडटन सशष्टात्‌ नाम वकशकात॒ दिककं ज], ठे 
दिक्रटकृव छिड्त्रकाद्‌ (नीपा शा करे भुक्ता ऊ्न्रिय्‌ 
शाकं । दिक्कत डङ्ड्दि शथाःम कृष] (ष्टा गैं न"थाःतुतु 
कनात अड 4क्ऱ। जिनिस छग्राय, उोतटठे भाटय दिक्कत नी 
रटे क्‌ तक्म त॒म वृन्द ट्यु ऊेबृड भाटक ; रष्टटवत् 
नेत्‌ दष्ट्त्‌ अके त॒केम्रष्ग्‌ र्ग्‌ (गषकौोःन नुक] ठ्य काय ।” 


५२ म] व्िक] 


मि द) 9 च न- [च ^ +) र [^ १ = य 1/1 १ न ज [श + १ # 9) ज. ८ क क 


कन!{मन्‌ किष्छाम) किन, “आाष्छ), 4केषठे। सिङ्रःकत्‌ छि 
कि खनक बूक) ठ्य 

खमि वलिलाम, “डान ठिक (नडे (कनद व] <कष) 
ठ्य, ख!द्ौत॒ (कानत गहा (कर्न बूक]€ ठम 1 

कंनटमल्‌ वल्निन्न, “दिङ्रकं र ८कंमन क्त भक तव्‌ 
क7त्‌ 

खुौत्नि वलिनः, डावर खानकं तृक्म्र देशाय खाए । 
८कष्े (कटे मगुण (थक दिक्रकङ्कन ड) काक कात षम) 
ग्य भूक छेदन नात्र कट्त। किक मषटद्ःषत मभरूणं (थक्‌ 
दिङ्रूक डले मभुखशाटततर दालिव्र देनव माष्त व) षएाोषटाटे4व 
ठेनेत डा) सका (एल्म) छ्य प्तुदमत्‌ बट 
ल्िकिकशछलि म्ब्व साग्र, छःवभेव (मष्टटना नड शद्रक | 
न्त (महेष्धाह्) न वण (एोवाषछव खडिति सान 
(खतना ठर, मच्याटन छन), (वायः, मां कद्‌] 
जृ काठश्लि कृत्‌ ठ्स) दट्शव नतुम्र कल (मट़ेरलि 
कृष्ना उष्‌ 

क्नट्मन्‌ दल्निन, “चणच्छे।, त (ष्ट मान अक्मादत्‌ भक्तात्‌ 
तनौ क्मपएमर्गदट 

खमि ननिनाम, “धू व ८ मानि उक्रमाटव्‌ नद, 
षम छ्िमिदत€ (नमो क्ममामण्ड्; या्नाव्र (व भु यट 
च्व्चन (मठे भक्ताद्‌ म ड (वभो। भक) (भोल ब्रश. 
वाफामिषम्‌, तावात्रर्वकषवरा8 ठय ।" 


१९. 
१ 


मजि वक; 


म्‌टमन्‌ वल्लि, “बोष्छ) भूक ऊन्‌ड भिय कि खनक 
दिनद्फवर मदथा शड्‌ ङश? 
(न. वल्िन, “विनं खोवाद्‌ किं? सा सनकः छन्न 
-श्ह्ड छश, ठ] छटनद छड्व नाभ खरम कटुके 
८मद्ण्तु दनिवाद टकर -एयियु। दामि टलनः, "न, 
धरम ठ बूव वन, रो त्तधक्‌ (डाोगराद् ट्यु कट्‌ न] 2" 
वृक फूलाेम। (नय विल, “मात! छोदन $द्शुन एःलिद्‌ 
= ॐव नाबूनून, घरोत॒ बराह ट्र कवु सत्‌ 
खामि दनिनाम, “कि 4 (नोक देनव कर एदृर ठाद्श्रून्‌ 
छा नम ।" 
(न. वनिन्न, "य्न कि छन मटवाकरष्िशि र उ!टउ्डे 
कि काडत्4 खडोाव शठ सथन किक खाक 
केट्द उयन छेके याग, (न) मद्‌ मामन एण्य ग्ध 
मठ सूदय. वुद्(नन र? 
मरिन खा (कान कथादार्बा र्ट नः. 


ङो भत्प 


ङ] दृट्त्रतर ज। ट -ॐसम ल 1 


9 


शवक्नि (ठत एव्व ममम कानः योनमामा 


खमिग्र) गप्राकं चुम पठे 


\ 


[९ । 


ठ भिर्‌! टलिन, डो. 
काश काया शदिः खनु (ननाम! कुलेन जोपरात्‌ 
ङक अग्र कट्‌ , वन्निटलम, भबरश्रनावर] मन्‌ 
श्ट! 

स्मरि वलिलाथ, ठ कानेन !" 

काष्ठेन वल्ि८लन, “द्व खासन खामात्‌ मक्र |" 

भःम वलिलामर, “मगूटमं नोगूवात छकरा त्रामफव (गावाकं 
गतु षव ना ?" 

केश न गृल्लिदनन, "न, दयन नय॒ । मानान्‌ एतु भुय 
काष्ट वन छक क्तात्‌ किना [छषट्ड पिठ नि। 
यन वामता (नके ए८४ किनावाद्‌ केष या; (नोकग 
मव दत -द्शोवाके पिकं कवर बा८; परिक कऊगृभग्र जिग 
खामत्‌ा ड] शव मनगूणड्दन्न नाभू ।" 
(धग, क्नटमनं € बामि कान्‌ ठेव माकर जोरोकत्‌ 
छामत॒ देनव जिगू। (नोकाग एरख्लिाम। ऊञ[ऊंव न) शेढे 
(नोकाषठ। वौश] शलि। नीौषएकन नोक प्री शतिर याभा 


, मन्रुबिक। : १ 


न 2.4 „> ~ ~ स ~= 2 9 = = ०. ~ न & 
~ 


(मत्‌ ऊक खनक] कंव्िहष्िलि। उय्‌(ना (वम्‌ वुद्धि द्रण 
डाव देनैत॒ खाक (अध कब्रिश) अकृकत (यन चि 
फयाषढेःउष्लिः (कवन एङ अक्षे सत्रा सथान श्य"टन 
८ठ्य। याषेट्डष्टिलि। नुव एकरात्र नटन टाकाषरेदष्द ष्ट 
कविनाम, किष किष (पयिट्ड नडेनामन्‌।। 

(नालम्‌ वयन नषाण्योदनेत्र च्छ्म कुन; अनरिक्रदद 
मानात्‌ फौगु। ठेडात्रटे निकटे (मे उृवनविथाड भुकरक्रड 
“म्वा >ं5। कु बोषे्नत्र€ वनौ उक्त | 

खामव्र एाद्विक्लन (नोक भिश् टेठिनाम। -मोके। 
छ] डिग्‌। (१ €म्‌] सेन : पच्िनिण््िकि (नोक एलिद्रड नाजिल। 
मगरूखकन खन्न खन्न ८कटे, किदे छाकाट्ज्ठे नोक] (वम्‌ :मन्‌ 
दोरे7डष्िनि। यामव मकटलद्रे एगेएाश; ककत मुय 
कान कश नाठे। कानेन यन कि खाविष्डाष्टन? साक्र 
ड याब (वनै परत्र नगर| 

८खाव मोघ्ड शीौषएटोव्र ममम यावा] आटलःय रोवद्मि 
गडि अग्णेष्टेडाव्‌ (पया (नन । ययन ग नए मठे; 
ातिणिष्क्ढे कुगाम्‌ा। ध्वल)] सोत ममग्र रशा देरिःटडे 
ममर कृशम्‌ (यन भञ्चवघ्न काटि (भल। वहेवोत्र ८नमं 
गणे (जयिट्ड नाोठकेनाम डोवष्गिट्ड म्रःद्व मोड तीष 
तश्गराटष्ट : जम (वनं नशेतिषाव्‌ (फव्‌] (भन । (नोक कम्मे 
मनोत ष्रौद्शेत्र निकटे खयम्‌ दडेटड नात्रिल। कानेन 
मिहमा दमिपोिःलन, देर्‌ कोठम्‌ भानोदय9 किं 


५७ मोशविकं) 


१ 4 4 ५ ५ ५६ च ८ ७ ७ ^ 9 ८ [१ [नी च ८७ + ८-७ “४ [1 ~ , 9 ५५८५ + ८७९ = + ~ ~+ ^ च ~ + 0 ^ ^ ४ क ८/५ ~ 


मभू कि (यन (खिट नाशनम । ऊत र्कूम भए 
(८नोकाग्र (नारव (खला श्श्न:; € इति, डव मभू ख) 
(नाव्‌ (कलि न) (रूनिष्रड ्टेक्‌' कब्िष्रा मागिड (किन । 
रवर मभूणङटरेट्न ङि र्म वथानकोत ऊनत शेडव्रड। खिन- 
शे भोव्। अवश्ा आाननाट्मव्‌ 9डोतब्रड। जएत्‌] (वनै | 

कानेन निद्म। वलिद्रलन, “मत्रा भ कराटकराङव क (टे 
म शषक्ि। खात अक्‌ भमत मका जकेयटन चमरय 
८ऊन-८नोकातव्र डोर (लटभ योद्व। ल्रेयोनकोत ऊालत महश 
नोनाव्रक्म विशम, वु वृतौत्र। खषटुड माङ्म वर कलव 
ङ्त (नम यणि। लठेवात्र सखामोदफ्द द्नीांसाकं नाव 
नाम्र। याक्‌ |” । 

मभुद्यत ठेनव्र (वश वर्‌ व (एषे वशटिद्डश्नि। नाविक 
(पव माहा खामव्रा (गावाकदछलि गद्विलामर। मथाग कयन 
एकनिष्ठ शव्रिह्ड यहद्डकि सथन कानेन वनिद्नन, 
^वयाटन खामाहणव्र खादना निम यावत्र (कान फव्रकावर्‌ (नष । 
रूट्यीत्र बालाय मगरद्यवर छव मव (८फय्ड नाश्मना बोट्व्‌। 
खावाव्र खाल] निलय साश्म्राव्र विशं आनक्‌, लथाटन 
उग्रकत रवत खाप्ठ।, यन। (पय्‌ नटे षू बोम्‌व ।" 

कान ष्ेःनव कथ निषु खामोत्र मूच ॐकाकेष्र (9ैन। 
(नउ € कनमद्लव्र व्रा छान, छात्रा उक्तम माधाग 
कनि श्िस्‌। (कलि, कनै ेदनव्र अमन जनूक्र५ 
कथ) क्िषटूठे छनिटड नंग नाठे। 


मारतव्रिक; 


` खमि काशि ेनल्क सखात्रि सकष्ि शश्र किनःम :-- 
लिलाम, “मदकरं खातर नन्कुकं (नवन्‌)? 

कनि ेन दनिट्नन, “वन्कृक निघ्य 4 रट्‌ ? कद्व 
उडत वन्पूटकतर ष्टम टे उेग्ननाट्ररतव (छाद्‌) ध्वनौ कटक 
नाभिर्‌ । च्टे (छात्रे खाननात (कामवत्‌ कृल्नदश 
तशुन | 

(न € कृनूदमन€ षाव) मटर लदेगाष्िलि; रग 


(१ 


न्य्व काष्ट यक्षि उग््ृव उालशरून : अमित ममम 
रुः रक गोना । यटि (ठ्ाक्‌, यामन्ना ऊट्नन 
खट्व नोर्मिमु। नैखिनाम: नाविटकन्‌। मक्टलष्े (नोकश्‌ लडिन्न 
--(मयानकात ऊन टेम युषे भेडौत्रु;, गाद्रम॒तर लांब भैत्िक्ष^त्‌ 
भरि वालि। काानछेनव माक खोभरतर) ऊटनव्र डित्‌ 
कटमके नाभिम्‌] एलिनाम, (मड कागृनाषए। शृकेषनू। नशद 
न) बडेर खमट्वा मोष मदि साषे्ड नातिन; कि सनल्द 
ड [कृ]ुणन बुर, कि एकन ड)काटण्त शैडि, कि बशुक्व डर टट्‌ 
पि्क्ल दार्व! ओय बाद्ोठे कुषे लग्र कतुकम मने 
पवि नाठ्लांम। 
श्वाय माज्छेात ममम बदगष्टदवतषएटटव यामिग्र (नौक्टाछलःभ 
डेरा भू्काटकट्ठतर खोद्रष्ध। ८कषठि (काष्नि दिष्रूकं २'न 
टय एड्किध्क षष्च्य व्रस्ग्राहष्ट। (म प्य कंडे दमि 
नि दकिक्‌ वलिं नावि ना। (न. मक कलिय 
कष्ठे क)टनत॒ थलि नेम खांमिग्ाङिनि, कंडकश्लि खन्न 


रे 


भट मौर्भ[तिर 


सन्त्‌ दिकरृकं शलिव ट्वा डृलिनल। किट बभव (मयोट्ने 
ताठेलोम न । कानेन नैश (कथोठेग॒) एलिट्नन, जामत] € 
शिष्टान एनिलाम । 

श्यामक) त्‌ मभुखख्टनव कमि वठे अजग्न, यकं कं 
ऊम्‌ 4 टु (य ठडं डृनिदन कलत देनैव गवी ड 
575, खांवा त॒ वक्‌ क 
ऊ यभग थुवक़ नौ । 
मोदके मादद निन्‌- 
गिद्स्व मठ नैो]टत्‌ 
भ । (मठे मन्‌ 
शाटर)टएव (काटल 
(कृ{7न  यक्तकात्‌ 
र।एटलत्‌ मरां कम्‌- 
मिय नामक्‌ वक 
शकत नृङ्ृएाक]तु 
तराक्रम रोमा 
(पयिः शोषेनोम; 
कडकश्लि निर 
खाकतर रक]कृष् 
छरक्रतर गदि श्रि 
घामाणत गोन उाकाषरेडश्लि-८यम उट्सात्र्‌ (राोन्ोद्धे 
4क्‌ अक्यान) युक्त कषक । 





दमटमिम नाम्ने तकम्‌ हि मो 


म्‌ ्ितृक। 2 


-- ------~----- 9. ~ भ ~ ~ 


` 4ढे मव शरोर बूव्विशधो (भद्कोट्न बामह्‌। कए 
लवर मड खान छेनेशिडि र्टेनाम। एङक्रिप्क शाः; 
यथाव छेन नार्‌)ुथ्ट्ना कृकिमू। ययाभजिमू। नैषिमःष ; 
गोदत्र उलोग कललं शोटमव कृ] नध] । दःनष्ि 
आश्र कृ उङ्कृोवु बोट्द मोद नथिहवुत वृ वृ धन 
रथाव छेगतकानब टत भत्रियु] खाृष्ठ। (मात्‌  टेनद्‌ 
रारन ऊातनो सन्नत एनिष्ठ एनिष्ड कानेन निदो 
ठे रके किं «कषठ छिनिव (पड नागिटनन। ^" 
जम्‌] (एय कृष शुका& दविकृके ; (ण्यिटड मन्नु (शान्‌ | 
4 लाक वनिन श्म; एग < नाम म्फ 
य॒ गे; लम ७४० गोेछ व| म मदर मा म। 
वृङ्क्त गृयव्‌] ष्ठष्ठ <क्ट़्े काकं छ्नि। काागठेन 
गाण्डि निकटे भिम्‌ सिक्कषे| वक्त उठेतांत शुक्तके 
छाद्‌ (ष्टादातु खा (महे भूद्रयत्‌ मटका एकोट्य एिट्नन। धक 
तके केव्िशा ध्विद्ज्छे ख्व योर ८पयिलोम--उणेवटन ड़] 
ठृलिव ना; सिक्रटकत्र (नोट मृषा कए वानु) मक) 
मान) वृशिसह्ठ, रिकं नाविकटनव॒ गड वु, -४{्‌] 
:यभूनि (नौल, ८मनि रेष्डन € (मनि एू्‌खिमिग] 
चाभि नागल रटे) (ननाम! ठ वाठ (मे = 

पकए रलिम्‌ लकड (गलो ;, कद्ध कानेन योपरःकं 
वात्र कबिट्रलम € ऊर (ष्टो) वावि कबविग्रा नङढ़ेद्नन। 
पष्ठ] खथनि वृकि (नेन । सशबद्डत्‌ मशक भामोवु 


२9 मशत्ििकं] 
= = ५ ~ १५५१५१९, + 7४ ८४ = = ५ ५ ५ ०५, १५४५ ५. ~ 


१ ८९ ००५५ ८ ५८५८५०५५ ५०५८ ~~ 


व्य जह्न छान ओट रउांशाषड वुदिलामर भूक्ताणिव एाग्र 
८,००,००० शद्धे व्‌1 १८ नक्र एक) ृङेटव्‌ | 

फ भिरि एलिवात्र शद कानेन निद्र ककर कि (खन 
(एथ) काठेय) नख्टिलिन। ठेमात्र कवग छख्नि जोमा्क 
कृ ख्ठेम्‌। एलिष्ड दलिट्लन। क्पे नाङ््व जाोोल 
गिर क्रछाठेणल छनि खाङ्रल र्सि। माभटन कि (फशाठेट्लन। 
(कथिलाम नटनवर कृषे पृषत क्ट नर। ष्टमा माष 
नाग्िद्ट्षट। पफ कतिर क वृव्र कथ्‌] मटन शषनि। किङ्‌ 
ऋ कंग (न्यिलाम (य (महे ठइाघ्व नय 

मठे क्फ) माङ्रव,-- थक जा माकर! करन 
उाट्ख्वरौगर वृतौ (एप्त मठ मृक्ता्यालःत ममत शह 
(मथन यामिय गरूका ङलिटठे योव कविराट्‌ । (वषट 
गतमोट्‌ मङिव | पाविणाव उना मम विनैकं अनोक 
कंव्रिम्‌। (मथाटन भूक) उनि सामिषा । लवर ठन 
ष्व (नोक) छामिद्रड्गष। (न्यिष्ड नाढरनाम्‌, (म अकवा 
नःमिदख्ठ सनाद चेशिण्ण; सदेकश कर्मागेड भकः 
दलि । (नोक कके कणि पडि कृला्न तरिगा४ 
द्रे अविश (म क्कमानड टे] नमा केति । माकर लकष 
शन्लि, (ठठ कठेमर दिक्कं कुष़ाकृव। थलि शृ्िखषष्, जावा 
टतः गट । छ7लव्र माश जाथ मिनित माठ ८ 
शखाकताटत्‌ चड़ कोख (मव्‌ कत्रि । 

शराएव बाणादनर्प्र।खषेय। यामदा उारोत्र जके कड 


म श्विक्‌। 


(मयि्रष्टि। (म्न छ)टवनि य ऊटनत्‌ र्नाम ठते 
मख गोव) ककशन परोक्ष )छोठेष) उ] शकं (पिः । 
शाय खांशे (म जरे चे) नोभ) कद्विःड लान 









+ - १५ "अ - १ ४ 
9 1 ९; १ 





नबी ५५। इनिः! 


परामब्ां€ (वमे खोनान््त्‌ मशि उ51त॥ काङं ८पयि?ट 
21९ (पररि (मरे छाव (नाकि कलव खित नाभिम्‌ 
कं बुक्मयख्य॒ शकेम] (नल। य नीचेश] (म डरा 


२२ मो भैद्क] 


क्नाटक भूक्तादृक्रल्डत उन्न] उठे ऊटलव्र छेनेटव्र देरिवाब 
(एष्ट कत्रिन। 

डारोतर उद्यत कत्म वृकद्डि शोक्लाम। (फचिलाम 
ङ्‌ प्राधा देशत क्प्रि शका प्ल छोय ! सक्ष 
छर्त कृष्व (मष़े छकृडडाभा (नोकषिकं लश्रा कंसा 
डौटतत्र मड षटृषिग) मिष्डःछ । (मरे (घले (षयं रिष 
(यन यादशन दएटृषिडष्ट; शका ठं) सटकदाट्व (याला, 
षत्‌ अहश्‌ माव रीड; श्हडाकं माव्िःड नड मणयः 
धन्‌{7न। ए) 

छल्ग यामि का7 ठ्ठेगर कारकया वञ्नाम। उ) एटबर्‌ 
ख -कप्र च्डटट्‌ निङक्लकं दैषठेवाव्र ऊक (मठे (लकि 


७ 


(1 


सकनद एषे क्वि काएाठेन। उठ्‌ गिदव नानक, 
त्‌ भीम नागिन न। वा, किड्ु (नाकब्‌ खवा7ड (नाकं 


(*। 


(मदेन श्रेय नण्नि। उक्र) अवात एः र्मु 
(लःकडट्िकि शकनाटत एके कत्रिनात छक षटवा याल 
कट्यकं (मटक क्त गवादे 42 कृ टृडष। (भन। 

कनि ेन निम जमाव (माका छठे काठम्‌ काद्र 
(षान (नन गक तवस्‌ भरिता सदकेनादतर राड 
मामद्न्‌ मिसा कए षद्लन। शक्े। नृडन (नाकं (किट 
नटा कषत वकात्‌ डुवुतरौटक छाछ कानेन निदान 
ठः कव्रिलि। काश ठेन अमम माणम र्त्र ञ्ठेष लाण्षठष 
कृाटवव्र बाक्रमरनव बनकर) कव्व लाजिद्लन। २1८4 


मुं भविक २७ 


शष) पषिवा कान्‌ छनदकं एय कदिष्। काष्टिःर (तन्न । 


५ 


धोक] नादी नादी अमन मप्रम कानेन छे कति 





५{६ब्‌ 
मद्विष्रं त्ाराठेम्‌। रात्र (ष्ठात्‌ ठक्रट्वह्‌ दुक्त शद्ग 
7कद्‌]वर॒ आंगूल वमाश छिलन। 


२७ म्‌ि; 


~~~ ~~~ ~~~ --^~ -- --- - + -- - 


८ए यि? णय एरेखःनत्‌ मश शवल बुष वार्धिम्‌ (भन । 
कृःछत तुभ € सङ्ुनास्‌ उयन (यन भैख्न कत्रि लोभिन्न। 
तुद्रक्त्‌ नामत काष्ठ कटे वक्व (कायात पएष्िःड लोजिन। 
मभुण-ऊन्न नान नलोल्न कटे) दरि । नविक्तात॒ ऊन 4रक्रम 
मवठ़े (फथिटग नीादेटजणलिम, ५थन दकव फक्त ममख्टे 
वाना कटे दठेषिल। (कयि कानेन यन 4कङ्ा 
ठ़एटदत कफ) नानद्क। मात भत्िय्‌) उ) दतत्‌ मात्र 
कृलिटडषटन € जनैत रोड (षाद ग्र कमानन्ट चेरत 
भ्म डौवने यै) मराव्ि्डाषटन। कि षिकं खान (षान) 
नमाढरेढ भाोवरिडछिःनन न) नल्निमर] इत्र खड जःचा7ड€ 
किष्टष्ड्डे पमरत्ल्िन।। कट्वर ८म कि सकं 4क्ट़। ताक] । 
मथुण्छल मन यानाण्डि डे टेरिलन ८य, खांमव्‌। (माङ) 
टेश काछाषेःड शाविष्डछ्निोभ्र ना। उतर यन निंव 
शकः मौट्दट्‌ छात ण्वि कान एनद्क माण्निट्ड एशिमरा 
त्न्नि। कानेन सषा धण््लिन; दराध्त्‌ निगम ठ) 
कटिम्‌] कृन्‌ 7एेनदकं तिलिए-र्‌ (भन्न | 

८८ न्[1& < कऋरमात >! दश्ुगन कर 5. छव्‌ काष्ट 
टुप्रिमा धष कम ठ तुशुन कृतव दकव टेश नमोकरेर्‌। 


[ 
[ „4 


प्नि। जानन्‌ वुल काल्नाकं तकु नाश्व कड लान; 
मदे गफय ट्क्त (क्गद्ाश मगुण (यन त्क्व मभ 
कटय टेरिल। दोयम सकृताय ङाध्व मगठ (गाला कति 


नी 


व्नार्जिल। किरु खरान्‌ नकि (स द्टेष्‌] गा्मि-शष्लि 


म्‌] ¶रव्क। २८९ 





71 


नाख्व राड (म मव्रन-गात्‌ यच्ग्ष्ठ। गरद्धायब्रनय 
ठत जठ़ेवांव्र निषकाठेट्ड नागिन । भिटैककेष्ड भिेकाठेट् 
क)ढत्फ़। कनटमाटनत काष्ट यामिमु वाकं। माति ठःषःटक 
ङ्द (रूनिग मिनि। 
कानेन निम) <न्रेवोत छेिम्‌) ताछाठेय। (मदे क्ड्डाना 
एवदीत काष्ट तिम उरक वौषटाकेवात (ष्ट कज्दनन। 
रष्व (कोमटृदत्र मडि काटि (काटलत टगत्र टूलिग्। शीत्‌ 
(भषानिव अक्‌ शाक्ताय ऊलव्र देशत नाकठ] द्डिदलन। 
चाम्रत्‌। छिन्न (मरेतवकाम ऊटलव देशव च्डरिष उवदरौत् 
नकाय निग्र छेमिनाभ। रष्टवव (लाछ्व दाशदोम्र एवदौव 
दिद्रशेस किष ठय नाडे। कानैरषेट्मव्र मज्ञा दवांस ९ ८मन) 
खीसाय जोर्‌]त्‌ ण्ठान गोखष़े रिवम) अभिन्न। (एय शुलिष। 
(वादो अवात छम नशेलन। (म (पंरिन्न डाब मदोःतव्‌ 
ठेनेत्र डोम एक्‌निगव एते माथ) कृन्निदडष | कानेन 
यन ठाव गाःक ठकेषड 4कथु) भुक्त वाङ कति] मठे 
़वुग्गेत्‌ ठ क्टिनन। (म कंानिष्ड कानि्ड खक) चकन 
कंब्िन। खामाणव ८म निन ८कान ऊलःफ्वट] छोविष्ःछनिः 
। म] उल जमन विनप्‌ श्टेषड (कं ऊाराटकं तक्र किट्‌ 
सात्रभेव्र केन एनत ककम मड बोबव्‌] कट्वर [ड्ड्‌ 
ला]रूाठेय नष्निमर। जौभक)त्‌ नथ व्च आश्टन्ट्रोत्‌ 
मदा याँमब्रो अगोटतत्‌ (नोल्द-वैष। (मोकाय खाभिगरा 
छेणिनाम। (नोकाौय तरी तठेनिषा यापरा (नाणिनटम 


२ मा | तकु; 


नी गी प भक यः च क त ५ न ५ य {9 [9 + ^ + क * ^ ५ र 0, 0, प क 6 ५ (0 प, क, कक 


रित्रिटडशि, (णयि राखत उाभिभ्र। देए । टेर) ट्त्व 
नैषि णु र्ठे्व। आङ वु कांत कं छात मरामांभत्‌ 
दाडोट बावत (के)थ€ (कथि नांश्मु) यग न। (फचिष्ड 
(फविटढ खामाटण्तु ८नोकोन एोविपिकं (नषे वात्‌ ठ)}खतु 
भिम) टेरिलन। छात्रा मक्टलठ़े भढ ङष्टातत नान 
एषि शिशा डागाटक भङ़े्ट खाव्र्धुकद्िन। 

मकनन मःदए खातर जम्‌ मवा (न)प्रिलाम्‌ (नौष्टार- 
लाम । (मम्निखामि कानेन निरमात्‌ मधा एङ छिमिर 
(ल्यित्लाम; शथुम कानि रेनद समममाङम, शिडौग्ः 
(य माकरसत्‌ खलश बट डन एलिश) यामिन (मद 
माङ्गावव टे टैत्‌ बमौमर एवम £ उालनाम्‌। 

कथ शमः (मन्नि कानेन वाभःटक वनि्लन, “५ 
य ठष्टठनामोदके (फृदलेन धण्त छाती कृष्टे, ल्व छविड्‌- 
दर्मत्‌ टेनद्‌ ि्न्मौत्‌) यानक्‌ ब्दात्‌ कट । शुकम, 
यमि दयन <न" गदट्न्नि खमि नैट्‌ रदण्नि.-- निर्य 


"तुब्द"जौ शन्न करानि ५ कन 1” 


५९। 


र्थं शैव 
खोव्रव माशत्र ङ्दैटड (ना शिड नभत 


ञ्श कङ्गौ । (कविषु (कथि ` नङ्कष्ोनै 
ग्रक्मत्‌ (काटल कमः मिनार्‌] (नन। (नोद्निलम्‌ वयुन 
चाग कुणि बठल (वने पएनिङषछ। अनष्ठि € 
नाकाछ्डि. जठरे क़ि प्रौनशूछत प्रा ८्य समर्था योन 
याष डरने मृषा र्षि काटा मरुर्णाःन एलिःड ल'जिन। 
खा ह्मिव कत्रि (मिलामि ऊशान-मभुणं र्ठ वांछं 
शवक नवदश ५५,००८ मराठेन नथ कानवत्‌ छन्ना मू] 
खार्गिगाछि। 

शत॒र्नि ण्म काममातो। (नाषिलनम्‌ युथन छट्लवृ 
एशत्र खादोव॒ खामिना छरिल (्थिलाम एड़कि्कं {कशा € 
क्रत एकि नोठे। ऊए़]कत्‌ भेष उथन देत नन्मिमि 
श्टिक, खरार <मान्‌ मानटतद शान वयन ऊोराकं एलिग्ष् | 
के €्मोन्‌ मानित शवम्‌ नावसर ठेनेमानदतवर अददा यायु 
सोम्‌ (मकेयानठे नेथ (गेव; छन काशन निम) 
सामरो्व्र (काशय लटभ) एनिष्डाष्टन ए 

ढे विब्य खामातव (म (नास्व डोवन। (वनो: म 
मियां खोभतर) (काशाग यषः ठ) छ्ष्ठाम किन । 


रेट मो‰तिक्‌] 


प - ~+ ---+ - ~ - ~- -- --- - -- - ------ --~---~ ~ + -- +~ ~^ --+---~- - ~-~~ 


यामि वलिलाम्र, “काशन (कोथा निद्र यष्छन ट 
ट दन्नृष्ड शरि न) (न. ।” 

नट. वलन, “यो ८फथष्ि छाड वुद्धि ध्य कारनेन 
खामाक्तु भीट्ख देनमोग्रेटतत मलशा निम य)षछन); वकि 
ठार्न (मयान 'द्ड वावा सदिति वाम्‌ ठृट्व्‌ ।" 

“स्थिति आमृष्ट र्म ङ कि ठव? वाद्रवलमाद्रकन 
शधगेःतनौ बुद्‌ (न्ड मागत काक उयन्‌ एकदत ।" 

--“{कंढु (लाश्डि मनत ड गुतस्मानातुव्‌ मड रज्र । 
युहगरछ कनात कषे यन (मव स्म नि: ड़ एल 
ठेचेट्वादन खमा (कमन केवर कितव }" 

“याष, (नए, ठेेद्नादण (स्तूरात्‌ छकरा ड नाद ष 
^कन ? समि ८ द्रन्‌ कङ्क (छाए काशा (साड 
छठे ना 1 

ए ःत्िज्नि ट्यु; (नाणिलम्‌ धमान मद्वत्‌ एवि 
य्प्रःथगालि ठाव एतलना7ख्त्‌] कैद्विड नाजिन--क्थन€ छल्‌ 
देशत छामिगर। खावाव॒ कयन§ ततान्‌ कटल एटिग, कयन 
ग्र शौव अवत कयन द धवनटवृत एलि्ड नाज्रिन। 
युन (कन निके गदेन द) द्विके कवि नवि ग) | 
शिक खर. कानमान्‌ ऊर दिएुट्षे धाव्‌ ब्ृढेलन| 

ध्मान मानव षृटृट> खतृदत्‌ क्रे ननद (मवि नटलाम। 
मत्‌ ण्टेढ मक्त छात्रौ सन्न्दर (ण्याटे८रष्नि। एडक 
ट्का-मात मर केवला शदटएत ठेलत्‌ माणा मत्र] ताए शति 


मौ दिक! २ॐ 


वनभ (कथारेद्रुक्नि। क वरु दष (शान (नोल मृजन्‌ 
८तसिनाम। वाौत् ्ट।फएनि कि सन्तत | 

८नाष्िनम्‌ सादाव छव मोतव्रिन। जाद्रद (न्दम काष्ामान 
कन श्रिम्‌ ऊारूङ एनिट्ड नागिन । “के (क्कयान्रौ रविव 
म्रप्रदा सछन्‌ दछेनेमानेःव आवन कविनाम .--4़ः {यन 
क़] युःकिनि, रे कूर भिम्‌ उत्मरामागद्दद जल 
(लार्ड मानित टव कविर । 

८ (कक्ग्रातो जात्य खामन्रा यन मरत्र (एचि 
नाकेलाम। अढे मष्वषठि <क्प्रि यका (क्न्न] वनिन 
एट्न; काना भक्षत टेश दमि कं (सन मभुट्फ्व 
एविशाद्व नीष्रात्‌] किङ । . 9८० शष्टाटक धटे रूद्‌ 
ठेरनाकट्त्‌ बरिकाद्व बोम । €रिटकं किदोनुष्ठव्र॒ श्ट 
-4उन्‌ -षठेभिटक ठेरवाजःक्व षष्टि खटछग्र (कन्न) । 

सामि छखोिनाम काभेन यठेवातव निन्य किदिद्दन, 
का, मा कन्व (नाकालग कमरगठे निकंड़व्ेष 
रकेल्डक। किदि छोङ) न) कवि कानेन निम 
खम्‌ वाोद््वलमाछव अनानौत म्रा यद्वगे कृत्द्नेन। 
वा्वनमाट्छव कथा खाती, वको अर्थं "खर्छ यातु" | 
कङ्‌] टवा ववग प्राठेन खोत्र थट्‌ कृषि मकेन । (नाए़िनम्‌ 
शरत म्म खा चन्त मदा ठेठ) गोत्र श्ठेश (न । सयान 
ठेरव्राछ खत्रामौटमव खट्नक काशख € िमाव्‌ एनाट्कवर) कात्‌, 
८कानषठे। (वाक यढृ्डटङ्‌, (कोनष़] व्‌] (मनष्दार््‌ द्‌] (म) व्षठट्म 


५० मश विक्‌] 


~~~ ~~ ~ ~---+---- ~~~ --~--~-+~-~- - - 


साठ काटठ कठुर (नादिनिमदके छाःनव उल 
डविश्] सषट्ड छृटन। 

(मदेन एश्रूदतर वामत्र) (लार मोगेव निग नख्निामर। 
काश छःनव ८य कि देश ठा किष वुदधिनांप्र | 
जरात (ननं कपरगके कंत्रिस। ामिराषछ,-कंथान्‌) 


~ 


छामिग्र। एनिद्ड्ढ खावात पद्व लारा (णथिटलष़े निष) 
एलि?उः ष्ठ । 

ण्ठे (रूकन्माव्रौ मका मस्व (विड श'केलोम। क 
शूत्राटन जरद्‌, एाद्िग्िकं छक्र शौव £ (यमुत्गाषटत्‌ 
तानान। 4> मषरटवत्‌ मवा णषुषठे। वाढत € एव्व 
परमकं 17 । 

(लार्ड मारत षडेण्ट्िक्त कृश (तयि (मिदर 
एनिग) । ठाकर यािकानत कन दि [लिड निन, 
कावम्‌, शठेन्टिकंत॒ कट्लत्र नलौब्रडा खनुक्र)कृड (वमौ | 
वानुमय॒ मात्‌ दशवर मिगनुवामोवा रे4 गह््वा लाक्रन 
किरा (ण्यिलःम। -नाशिडि मामव नाम वे, किदं कं]7एवु 
मड नब्रिक्घात्‌ छनन। छटलत धात्‌ एटे(उ्ठे “उव्‌ 5 चेष. 
केषा दग्रा; (काणा) शमो वालिन्न एव यु कि- , 
ट्ष; ८म अमौम मकटमिवर धयन्‌ मस नाढ़े। ऊड़ाछ | 
खाना शररकवकृल्ल थत्रि एनिट्ड लालन: रिकं € मरकृट्मि, 
कद्ध नाषनालात्र मथा £ आनक्‌ । 

कार समेन विग्र) यष नागिन टउगन कं{षएन 


मोशत्िक। 


क)नालाय व्मिश्। (न)श्डि मोनटवत्र खात्नोकिकं कम ¢ 
मन्नु (प़यिःड लोजिलोम। सयान खानक शन्‌"टलत 
(क्ट उष; विन्न याकोटव्रत रविर्न ऊाडौोय स्नुक्च 
(फयिल्लोज। देषपव नोन) शकत श्टनत॒ एकन 4 ण्ट 
कानत) चरत नोनान वकम गाव माब ए्खिः7ष-- 


शरदमतण्छाततननतः नार ककलन रन नकः मनश ~ = 
र त ल न 
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(पिः (वा € ०. १ ष ऋ 
त च [रि 3 1 ५ १ ५ 
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छ नर्न [शड्‌ 


$न.छि च्छ, (दया स्लछठ, निवरो. सल, = (नग्राल) "र 
छत्ििटनत मि मिरश्व शौव], मशरुट्वव (नल छेडापि। ठ) 
वाधौ (19 व नान। शको कष्छने (पयिनाम ; नांल, गयेन 
काटल), उल्‌, (मानानि (ष्टे ८ जटनकं मष्ट (तविलाम्‌ । 


५२ मोभैनिकि! 


--~ -~- ~ ----~-~~ =^ ----- ~ - ~ -~~-~--~-----~-~-----~ ~~~ --~------- ~~~ ~ -- न  --~-- - न > ~ # १ ~ -- +~ ~~ ~~ ~~ च ल = ~ न ^ 


रे (कमाती एशरूत्‌ (वनाम ऊाङकत एम छश) 
` (यि कााश्ेन निद्या ङ्च] खाष्न। ऊ।विनाम 
(काशाम्‌ याद्वन ङा डेवाव॒ छ्षण्ठाम। क्त्र यक्‌, डे 
रिक्‌ स्‌ःयाभै। 

कगेन चामाकं (फकिल्ड नौषेशः काट खमि 
खाोमाद्कं वके) मनात एमि छण्डाम] कंति्लन, “नशि 
मानव खानैनोव (कमन नानि शद्क्मात? ववर खनु 


(9, 


यग्रयी (ड कि अनन्‌ छाल लागि म? 4 
शवन्ल, माष, ग्ण. 1 
- ष्ट, धूह छाल लार, कानेन । मभूरखनोडवु 
छरछ््त्‌ टिक कऊोनट्ड्‌ €.८०य ड (नोषठिनटमत (एस्‌ चमन 
स{द्वि। खात्‌ किंटम ठटत }* 
“शयु टःठे नम॒ शल्क्मोत। यदे ८य (न।र्िड मातर 
फ़ उयृ्रत्‌ मभु; एटशिदिके अमौम मक्रडमि वय्‌ 
क्नु; ठका मेटल मदथा राष्त्रं नोमरशक् (नरे। ५ 
यन दालिद्र ८; ठे कृ छृष्ड वराङ्िनि वाजि थम 


८77९० 4 4 


मूल शष्ट खातर कटलव छ्डिति कड नृडन नुन (त्रा 
तालिन्‌ एत॒ (9 ठे? । अत्रे कदन नागर तरायन 
कदलि नाकं बच्छि। सयान कट कालात्‌ राखाव्र लाङ]ङ 
नष्टे ठग । यात्र, (कथा किष (नषे 571९ वमन 54 
कृ € नानिव तानि रेष्ठ छेषष्ठ नयाम ऊनलव्र ठेगत्र थलय 
डाश्‌ सक्र कात (टत (य क]कखं (मके दयात्‌ माकर ष्ट 


मोत तिक। ८. 


{तावा लित्‌ गवा सटकवांदतव अश ठय याम । (नाषनम्‌ 
1मजि न मव द € (षटाबावानलिःक्‌ योट्कन्‌ कंटत॒ न] ।* 

-- छ), कानेन, (वोर < जनौमव शोषौनकःटनव 
खिकि7मऽ 4 मव्‌ डयम दट्ख्व छेद्यं खट्ट । साष्छ), 
पकर क्थ्‌। किष्ठाम कवि, ५ कंन ङ शद्विष्त्‌ ग्वं “स्‌ 
म्र (नोश्डि मानव डन (कन 

--"टनटकं वदन बूम यथन ऊ]ङात्‌ (लाकंकन निद 4५ 
नखं शात ठुष्छिद्रनन स्थन मभूखं कक्‌ छट छत्रिक नथ 
ट्त (णय; नशिषटट्न कात्‌] ताल] ऊक्वर ट्मकमामे नदम्‌ 
ट्फ्तु तुष्टं समष्ट्निनि। रथन सदत्‌ ताल] मगुण 
वोन छयन मूनात (नांकङन नाद्व जिद्रम्‌ €; मभुख< 
यमन (ख्मनि रट याश्र। ज (मकमा मव टद्‌ 
व्‌, (मठे सत॒ नाम (नाशि मानित व॑ द्व 
1 | 
| “लार्ड गभिब्रं € गरषा मानवत्‌ टधा बोङिकःतु 

कानि ऊग््ैकु मिग्रात्‌ मक्र मरुत खा (महे) न 
1 क्ट्न ठेषटेद्तान २" उ व्रडवट्स (यट ल।का्छंत्‌ कड न्न 
मग्र नानैेड। टेल शरटव्व य खर्‌] कें किक] घृत 
1वृर्वध्व बाम्‌(ॐ ख सड खनक मनय नाशि € 
7एेलाफिक मङ्ामोताःव खानक विनुट्पत्‌ बटरबा न्ड ठ'ड: 

ख गग्थेडि बामोफत (फटमत॒ ककन मरङाद्] नरक 
श्छ मागत € समवा मानव चके दोक (याभ कद्व 


७, 


८३ म्‌] 9 बिक] 


न अ > ऋ 
न न ~~~ ---------~ ~~~ ~----- ~--~- --~----~ ~~ ~ --- ~~~ -- --~-~~ -< ~~. ~ -<- -- ----~ ~^, 


छारोल एलोषएटनव्र॒ खनक स्‌विशु कट्त पिषष्छन। छ्‌ 
नोर (नदमश्न. छात्र कोक दन (शैव्य नि।” 

-- ^), वांख्टि्कि छनि क्छन मर्द) वाक; किच 
सट्क कनाल मरा रिम यागनाोक निद (बु 
गातृद ना। कोल वक्वा जोशनाट्कं (नोर म. 
समौ कऊाराटकत (टि (्सिदम द्मा मानव जिष 
शुष । 

--“कानूक्‌ ङ्व मादव जिद्‌ नेर द्रवन !" 

-“छाड वड आन्वी ङ्न ८कन श्चटक्माद्‌ १" 

“याभि साग्र] रृष्छि खषु यके (उद्व कानटक खार 
ङ्ग्व मोग (कमन कटु शिघ्य शेष््तम्‌ १ 

ष्टे] योव ड, उड व योग्छशीा ठृता]द्‌ हि 
साष्ट? 

--“खामि दू लवि शनि (कमन कट, अकण््निः 
प्रहा बाकिकाव॒ ेडमान)-खष्त्रोग चृत याषेलोकिक मद, 
मानव शाव ट्म डमा मातद्व साोदवन 

--“खांङिक। चुट याव ड] याननाटकं (कं वन्न! 

-- डत (कमन कट्वर बावन! मै गसू ठेख मामः 
छाक्राद छेशदब्र शिद्ि खोशनि ऊर्क षएोनाद्नन न) कि 

--ष्ठेनव्र रिग नगु; सयक ठेंश्‌. मदमे मोषटित्र न 
पिम याव्‌ ।" 

-भ्माष्निव उन किमू! (मकि वरकम 


मोँशत्िक। ७4 


-. ~~ ~~ ~~ ^ ~~~ ^~ ~~ ~ -~-~ +~ ~~~ =-= ~ भ ज न श 0 





-- + --*~ ~~~ ~ ^ भ ५ ५ ५ 


-- ^ लोग्नाठात छेनव्र॒ खानक (लोक यन याल 
काष्ट; कि जोव गै मङ्ख वर्मब शू८क्वं छनैवोन «छे 
समख ठे मटमनत्र वक्‌ निघ्न रियर वकर) सतक्रं (वफ रिद्गटकन, 
माङ्रूव (म मष्क किष्टूटे खनन)" 

--^4 वकम सवक्रं मणि मणि खाोष्ष्ट्‌ 

ट), खाट, छावर अशा म्य (नारि मांनेटतद्‌ ऊन 
मक्षा मनिप्व जिम नै) यत॒ नो बखाद्त्दिश्रान्‌ 
नन्‌ ।* | 

--“जाःव रे सूव्राक्रत आटा निनय (षएोतावालि खा; 
डावर ब्रश (नीटन विशि श्ट्ड नीट्रत॒ ड }” 

---“(बाषषे नशर, (मे गोथाःवत॒ सदक्र, क] मोष्नितु 
छेनतर॒ र््ड (म सवृक्र खटनकं नौ, च जनाय दोल्ि 
गाङ । 

--“खाष्छ] खाननि ये सत॒ध्क्रत्‌ कंथ (कमन कटतु 
छान्‌ड नौतुटलन ? 

--^कङकशलि किनि विणम्‌ नन्का कट्त्‌ वे जामि 
खोविक्कतव्र केतूड (नेदब्ि। खोभि (टवषि स्मदा माभीटतव 
< (नोर्ि मानन मोष्टरलि मव धकं कारो, छार्‌टमतु 
खांकांत॒ शेषन नर्न मबङके अकं । छोल्ड खानि दुङ्धनूम ८य्‌ 
खट्नत॒ छिव सूतुक्रं न] शकुन अमन क्थटन] "ट्छ नैत 
ना। छोब्रशब्र खामि यात्र वक्षे नोक] कनूनूम;, इङगरदा 
मोनट्वृतर जनक गोष्ट शट छो्णव्र (नटं जामत खरे) 


८४ मुत्र कि) 





90 





५न ९५ ९८०५.५ १ 


थ ८ 0 6 प क भ क ^ 


नैद्विश (गा (मए4्‌ कष्ट छव सान (छ पि। 
कारक माम शट्‌ किनि मिद्वशव्र छेभैकृन 4ढे वकम 
खनक खोर भेव मोट याभाव लोन शैु। उशन यमि 
वृदनुम्र निग ड्द सक्क्र योष्ट। छोद्भेव्र माम कटु 
मने सूदुक्रत खिख्व्‌ पिम खोभात्‌ कारक एल); «कुनै 
दकवाव्र एालियषठि। “ढ़ सूतृक्र यणि न शौकृड ड] एण 
थे (नारि मर एकृष्ड जामि मारम्‌ कवडमन।।" 


नश न्ष 


एभे-खङकम्र ङलखखु 


नैव्रकिनि णके (ककरातौ। दएरशरूव (वलग जाकङाङ शूनताम्‌ 
कटनत ठेशत छामिमू] रेमिनि। खाजि ोद्फत टेनैतर भिषा 
रेठिनाम, माकर मक्र (न ५व्‌्‌ कन्‌ट्मन्‌< एलिल । टो्नत 
ठेनैत॒ वमि छिनिखःन खटनकं विषम कंशवार्ड] कश्िक्ि, 
मन ममश्र (नण राड वाठ वलन मग्रूदणत्‌ वुक्‌ 
नैव कि कङ़े। किनिव (फथौरेन। 

(नख. खामाटक दछेःष्तभे कतिश] करिन्‌, “यथान कठ) 
किं ङिनिव एनच (फथट्ड गष्छन ? €के.--जैयाटन ।* 

खाभि वजिनाम-“कंटठे १ (कोथा? यौमि ड किष्टूठे 
(एश ड नोष्छि न) |“ 

(नख. पृट्व खांक्रल (कयात्‌) कंञिनि, “जै ध्य चीन; 
शूव छान कट्त॒ (कशुन, नट (व्क ।'' 

रेव) त्र जिनिरऱ) (मचिद्ड गाठेनांम। यम्‌ षे माठेन 
पूव यक्षे] का कांटन) शकार्थं मभूखवटक्र छ] मिट्छःषर-- 
एक्‌ (वन यके वलिब्रषएवर। (मे| अक! क]७ जः 
--4 ककत खङशिकम्‌ ऊनङ विट्भैष । 

एशशोल्क (परिमर) (नाव (एठा सनिम्‌ टेन; 


1 मोभसिकं) 


~~~ ~~~ - ~~~ ~~~ ~~~ -~-~---~~--~----~ ~~~ ~~~ ------ ---- --+~ ------- - -----~-- ~~ ~~ ---+--- -- -~~-~---~- "~ +~ +--~~- ~ - 


रोश]टक गमाविवाव॒ खं (नघ्छ्व रोड निगेभिगे कव्व. 
ना्िन-र)ट्ड छात्र (मठे छय्चानकं रोतव्श्रून। मटन र्ठरेन 
थयनषे वृदि ८म ऊट्लव छेनेत दशहि नैखिद्न। जे 
जमय कौश ्ेन निम) ोकवर देनैव्‌ खोमिटनन। खर 
हाटक (फिगर) ७ (न्त (एोयभ्ूत्यतर छाव (क्सिमू) 
कानेन वलिट्लन, “कि (न, फुशशोट्क (कटय यन 
एने कट्वर त्रद्यष्ट (य? ज्वर ऊंलज्डषठटक (ण्डय छम 
(भ्न नोकि ‰ 

(न. वनिल, “याशो क्क (नटनष़े वटकं मावा 
कट्व॒ जमि। 

काश्‌ ेन वनिदलन, “ङ्‌ (यट नोव, खांमोव (कान्‌ 
खाशैडि नाड; किष (कट) रोट्टत लका (यनन ख्म्‌कग॒।" 

खमि किष्ठम। कत्रिलांभ, ^८कन, भै किं वरु श्श्स 
छ? भिंकांव॒ कष्ठ शिग्र (कौन विश्रमं श्ुष्ड ट्‌ 
न ड ? 

कानेन वनिटलन, शठे, <वा शशक भिंक)नौटणत्‌ 
छेन लांखिःम यम नल, खात उाण््ड (नोक छट 
यांग॒। किदं (न. खथन सोषु डथन ध्म तक्म (कान 
विनिपं रङष्ट्व नो वलन प्रन ्म। छाव रृ}्डत्‌ डाव 
चनव खामाव्र शव विश्राम बांट 

4 ममग मोम नाविकं षाण छेभैत जखोमिमू 
८नोक) शुनि] ऊःनत रेने ऊामाठिन। अकज्ञटनत ठ]ट्ड 


मरति २ 


पकट़। डिभि माति्वात्र उाव्रश्रून; गरन नोविक (नोक) क्खु 
विमा वमिन। (न, कनृट्मन्‌ € खोमि (नोकाम् जिम) 
मिलोम । 

काश्‌ नकं कष्टम कवलम, “यांशेनि खोम्‌टवन 
[] ‰ 

कनि ेन वल्िटलन, शनौ, बोभि बाव्र योष्व न।। 
भकात निट कि योनैनाएव (यन कटति खाम्‌ (णय 
{ठे | (न, (कटय) का (यन कम्‌कांग॒न।। 

८म्योक] रोखिमि (थ्य कटेल। एयलन वलनिषटे न)दिटकव्‌ 
{ष छोनोव णक (नका (न)ङ्ि.माभटवत्‌ देशव पिम 
गोवत्‌ प्रर षटषि्रड ल)गिन। शद रिक एके माडेन पुटद। 
मयि (विड (नोक) अव काट खोमिग| नंडिनि; 
मृटवके एुनैरे। जटनलत गत छोमिट्डाष् । <ङेवात्र (नोकोत्‌ 
1 शूव बाड बाड न ङ्डेष्ट नोभिन; बाड 
कानक्रशं गेट रुगे न) शोनाँम्। र्ड उ।वुश्रून लेषु) 
न (नोकाोत्र मारन रिष कीटेन; उोहात्र (एय 
ठषे। द्रल्लिड नाभिन, खोल वरु मोर्वोख्किं ऊंनङङ्व्‌ 
क नषि र्क्व । कात्शरूटनत्र मक्र मकताएटव्र ५क्षे] 
ष वी वादकं, कातरम्‌ राव्रश्रूनदर याला शकष) डिभि 
यन छल द्‌ बात, छेनैःततर॒ (मठे एषि शति सोडात॒ 
डि निर्नग्र कब्रार्ग्; किद् ठे रोबशरट्नव्र मर्ष वु 
शा श्नि, सोरे कुतर (्वन्मौ र्क्व न। 


82 मोभत्रिकं] 

दशर कि कटव नका क्रिस (पथिट्र लाभिलाम। मदाद्‌ 
म (मे कनत छेन छ) भिट्डशिनि, (वो कय (वर 
(शोडृटेद्ड ामिम्‌। युगषद्‌। शस्थिनि। ठान, छिगि 
शि ऊंनङड शाम पमौ्च-ख)कृडि रेष शाकं; कि 
भर लक राडातरत ममान ङटेट्ल अ शुनठे (वमौ 
ऊंनणृौ व भिक्रूट्वष्ठिटकत्र मड ठेराटमत शतरौत थुवके (कट) 
< (माठ, जाकर सक्ष (लङ खोट; भट्रशत्र ठं) खरि 
थका, रत्र ङ्छ्वकांव शः (यन थक क़ शेकक्तड 

नोक] यथन रिक शटनव्र क़ रोड खाोष्ठ, ठथन 
(मछ ना७ अष गक्िवट्न शाव्रश्रून षटंङ्नि। उ) ब्श्रूः 
शःत शाय न लाभिमग याःकवाद्द्‌ 91 (चंमिगन। कट 
शिशा नणिनि। (नख ब्रामण € श्य छात्र एन छि 
तना गिन | 

खामि वन्निनाम, (नटन, (न, (नशे; मै ८फः 
तक; किदं त्र शोय राव्रश्रुन लोतेनि; व्व कवि (ल 
व} 9। ८चंटमषएटन (तरह ।“ 
(मछ. (@षाटेग्रा वनिल, “नोभे रोत्‌ एना<, रादशरूटनत्र मरि 
धन्‌ कटव्‌ |” 

ङाङारोङि (नोक एामाटेगरो रोत्रशृटनन्र मणि द्र ठ्ठेल 
एः कटनतर जनाय विग्र (ए ष्पद; (नोकाः 
सथागक्कि (वाश एलिट्डाषट) मोल्द भाद्द छत्र पेम लङ! 
ऊटलत छेनैवर॒ ऊांमिम्। ठेरिः्ड नाजिनल। (फयिनलनोम जधा 





मत्कं] 8: 


"माष्ठटे नाद नहडे। शैः छांभिम्ां छेषिटनके (नय. यमन 
टारङाटकं यादाव शकार क कुोटनव्र प्रात जावा कद्व 
साग (मरे भृष्र्ढढे (मे छ्विष्र याट नागिन; 
(मण्ट्क्‌ सकफे स्याने रिष्शिनि न)। ्टमूकन्‌ नाविक 
शानन्‌ (वान प्री द्रानि्ड नागिन; रोशाण्त का्ट्त्‌ 
भिवाश्ट्न) एए कति) कुलिश) देरिःड लाजिन। नोक) 
छुभःम्‌ शिष्ट्टन शिष्न छटवत अड षण्ड; किङ मव 
दकि वृर्थागरयांय॒। भैक किष शव्रिःड नावा (भेन 
न} गंनव साम य तकमर भलोनौन शांकि गौटत्‌ (नय 
डाक] जगरङरे यटमोभ कति ल) शिन । 

कते! शतिम्‌। ढे यु एनिदड लाशिल। थन 
नर] ोनेतर याम) छाने कविस्‌ खामोटतव षेव शख 
नेवोत छक वौकः प्रखल । भ्म जात षष्टिश्‌ 
नेनांडेन न); निष्टन सिसिश्) ामामवर रिक षटूषटिग खोमिन। 

“जामान्‌, मो बोन्‌", वलिग्। नौविटकव्र] (षाठ टेमिन। 

एभै९ जउयन खामफत गान षषम खामिष्डष्ट। कुर 
कृ ठकां९ शाकल रदे थम्काक़शा कोठरा नैन 
नाटकव्‌ विमौनं तर्ष) कं कनिम वाम कि (यन 
किनल। छांव्रनेत (मयान शरे गट श नम्फु पिम) 
माट्त छेन सामि) शडिनि। (नोक क्‌ र्टेश्‌ 
गेल; माकर म्र श्वास णे एन कन (नोक्त छिव 
शधन कद्गिन। नोविकाण्व श्ट (म योज) (नोक) तीन 


8२ मभैज्िक्‌। 


माम्नाषेय। वष्टि (भेल। (नष्‌ छयन क्रुङ्‌ नोकोव. 
कनाम वद्िशा छेशरूत रषे शिया अनलण्िडि एशश-थव 
चात चेनत कुन ग्गं (कोट्नेत्र छेन छ (कान 
माद्द्डि लागिल। र्गरयव निषेव छेनैवर॒ धं. चष 
कत्रिग्रं कुन नखिष्डि नात्रिल; (८नोकोतर म््षा व्रक्-माय। 
एस्वि-माय। मारटमत पकद्व) शिकृवराहेवरं जामिर) शषि{ञ 
नोभिन। खम यब्रनोम छत्र उयन मव्रन-कोप्रु काम्राडे- 
वाब्र ऊक चेर ्ठेन। विनाल भूयनेखवटत (नोक उभ) 
कामछरेग श्र] खामर7फत॒ मवद कन ङ्के (मोका 
गृष्छ ङूनिग्र। (कलिल-- रिकं (यमन कत्रि भिरठ यकष 
ठदिनिणोवक भूय कत्िम्र। (छोटन। अमत्र] मकटन रथव व॒ 
ताछ गशेष्निम; द्वो कत्व) ऊटलव अटा ग्ड ङ्ठेड, 
किक ८. यन यथामङ्न गङ््ड करे ठव्शरन्‌ षटरंष्म् 





--"---~ --+~---~----~ --- 


युश्यतर वुटकव्र मद्रशा वमष्ेवरा मिलि। ध्नोकाव॒ ममदन 
(लोरोव्र नाष्ट क्ि (मोष, छनैः काट र्गो क्षम 
कत्य (मठे (नारू) एरुमतोन्रेया छोन कत्र) मिल: किष 
महे (नव । भर ऊटल्लत ङ्डिवि बआ्ं गोट विगर 
(भेल; किद्धि शरूनवाग खनत चखेशत्र छाम) देर; 
लष नय्--श्षू डावर बद्र (नोकात्र शिषटटन कछ 
यि] वार्शिम्र कान खामाट्रम। काठ] ८मषएे। सान। जडेन) 
जाङाणं टडूलिः्ड नोतिकटफव भुवढे (तन नादेष्डकृटेयाषिनि; 
८मषठिद्र छन ५०,००५ शठे अर्ण< शग ५२९ ममे । 


क 


म्‌9ज्िक ५९ 
| , 


, शन्रपिन ऽभ्डे (रुक्ग्रादौ। नाना कऊाौश्र नाचौ गुटका 
दषि्डशिनि, क्डकश्नि गोत्र वंवाट्वरतर वाव] कत्‌] 
(भेल । छात बहश मानतर-कन)ड € नौननाफव ठम्‌ 


माःक्व)९कृष्टे। वन्न] पोत ममरस भिनांढे नर्वद (एय 
गाढरेनोत्र। ठे नोरा्ट्द चेनत ठुलत्र भूम ज्ेगरव्र्क 


~ ^~ ~~ ^= ~~ ८--~ ~ ^= ~~ ~= ~= ~= 





गरुय (फखिष्ड नोन । ट्वक)द्लत सिर खोद्नोश मभुवत्‌ 
तृटकंत्‌ ेगद जानक @ङक्‌ € ऊन्‌ख्नि (यन) कति ८प थि 
नाडठेनोम। (पफसि्ड (फरि्ड वोदधिव खक्रकाट्तर एड्क्िक 
गणशो र्टेग्‌] (भैन। (क)शथां€ (कोन गक नाठे ; एोत्ििश्िःकं 
निख्क्र, (कवल मोद मोड (गलिकान्‌ ७ अश्ाद निमाषटद्‌ 


85 मोत कं] 


गाचौव ककरण कोन्नांव्र म खोक € गैर्ववट्डत्र छेशब (एष्ेद्‌ 
खाट) भेक ष्टु) यात्‌ रिष्टे (गान्‌ (भैन न)। ब्रां 
9, नमत नमग ख 18 
विभ एलिन, किध 
खङ्रूमोटन वुङ्न 
जं)राल ससःखत्‌ 
शूव॒ कृष्ट्‌]कांष्ठि 
ख) मिष्ट । मा 
नुष्ठव्र मश छ1ङ1ढ 
शरुनतुोग्न सनव 
भेत्‌ डोभिगु) 
छेन, खांमि€ 
छाटमत॒ नेत्‌ निमृ 
छेरिल)म । पृ 
कटे) श्रोन नोन 
खटन। (पविना ; 
9, "क तन कुयामोत॒ फक 
एन्‌ ॥ । खमन ८] ङे (उद ¦ 
--“नाठेे ठाछेम्‌, लार ठादेन्‌ !* 

शिष्टन किति (ण्य कानेन निट्मा। छनि वलिटनन, 

न्य (कथन सुदृम्छ्त नादे ङाेम्‌) सठेवात्र जामत] (म 
दरिःनालत्र अटवा कव्‌ | खानुनि ङेवान्र नो सोन, ऊो₹18ं 





(| म्‌ वरि क्‌ 64 


निमी भीभो नि 01 


धवत फवव, यदकवादत्‌ (मठे इ्मक्षा मोशाव जिदगु (छम 
व्‌ ।* 

खोमत्‌ नौ नोमन्‌ खांमिनलांब। कानेन खमोट्क्‌ 
गक नेग नौोठेलाटेत ( एनक ) चात्‌ लेग) एलिःलन। 








(गैलिकान्‌ 


ठनदलत्र अशा पिम) यय्‌ वर विशपमङ्कन वनिम्‌) कानेन 
विण जहेवांत॒ जोर ए)न)टेटवन। 

नौञेनएत धव (ष्टाष्ढे वनि श्डेःव । नङेनाषटव्‌ 
शिनौन दक्र € (नृनोवल्न ठे} € नार्‌ काव वमौभ गकित्र 
"व्िष्टम्‌ पिट्डरिलि। (म उथन मवदन लोष)क चुताद्रेवाोत्र षक) 
विम्‌] तरीखोकेयशिनि। रकण्एत लौनानल। एमि ८कयिनाम 


५ मोज्िक 


0 00, 9, क, क, क क, क क, क , क क "त प क क र ~ = च 


ऊारङ कममणठे अखन कलल नाभिग्र) यषेट्डाष्ट) माभ 
तात्‌ कृक्भव््नृत गै शटद ८१ €गरान- के (क ७मु)टलव्र 4करिःव्‌ 
(्नाङ्डि मानैव स्पत <कण्िट्िक इमा मोभेव्र; «ठे नोरट्ु 
८म€शाल मिषा € ब)खिक) ठे एटि मरामगटक (याः 
कतिम्राष्टे। क्षद्‌ नाभिश्च] (गनाम, ख्व्‌ (मठे थणटोत्र (यः 
खात (शेस्‌ शमना 

<क््ने। रविम्‌ टेक ` क्म? खोभत्‌। नाभि 
नागिल्नाभ। 4 (कन गाडाटनवर (कट खाम्‌) एलिदडषि; 
गृशिवौत्र वृक श्डेट्ट कड नो नामि आभिनाम। ब्रा 
मोट एमा ममर (यि मायटन नाशातुत माति मारि 
शलावौ शविशा (नाषिनम्‌ ज्वर षटूष्िशा एनिदडष्‌। 
खर्ा(कत एोव्रिशोटम 4 किं उषम भक्छनश्वनि ! वृद 
ठःनटल्नत अशा रिम ८नोट्डि मागत ङंलतानि ए (वा 
रूष एनिःडाष्ट । ८म कि छोषम (साड ! (न)ोएिनिःमवर ठे 
विश्रौड श्ष्िक एनिटड नोजिन, वु (सखोद्ड्तर भूट्थ नैष्ट 
(नाप्रिनम्‌ छव मड टृषटिय्ा एनिन। जाराखत्‌ 
डौ ठके्नकृषटिक योना षठ नोद्रमत॒ (कडमाटनत ठे 
निश गख््डष्िनि; किङ किष्टूठे (कयि नाङेनोमना। 
(मे डौवण (साड कन (यन माम ८कन] ठठ तशव 
कब्रिषर कृण््िष्ट। उष्य अतर वृक ण्गिणिनि कत्रि 
लनागिनल। ब्र (भोटन अनादव्राहठिव मभगर कानन शि 
षाणि छेषिय] काङ्ग] वलिटलन,-“डङ्मका माभत्र * 


वषे भब्रिष्छा 


गोक्गिस न) मष्क 


गेत्रपिनि २ (रक्री । (डावर (वलाम्‌ (नाठिनम्‌ 
छालव छेगेद छोमिध् रेणििनि भद जामि फ़ भि) 
ठेरिलोभ। (वन) मांक्फठाव्र ममरष॒ (न. € कनामन्‌ जाभिगरा 
राजिव र्टेन। सशाक्न (य वयन ड्म मागद्ववर छेनतु 
गग एनिए्डदष्ट ड] जांरोत्रा 4थन लांनिदड नीट्व नादे | 
आमाव्र भदथ मक्न कश्‌ निग्र छहर शवक विग्रिर 
ण्टेन ; ववषु ठं जम्‌ चर. सय, योर्‌ कमन ८८ 
मेन इठे, जोरा किनि) गोपित खन। रिग जोमव्रा भोतु 
रृटेश्‌। बखामिनामर | 

विशय छाद कोणं याषेट्न नेव (नर्व माशापु 
खादर वकं रनौ मिष्रं ठेनैिख श्डेन। अगरादक एमि 
एशि ८म दलिल, ^मथून, देवरात कां्टाकांि यथन वमि 
स्थन यावर (प्रौ कद्र नग्र। (नोषिलम्‌ मक्षा मात्रत 
छा तोव्र॒ शूववषे (समन कट्वर (राक्‌ नीना इव्‌ ।' 

(नटखव्र कश शनिमर) योगात मरम वु रोमि गौटेन; 
दाने ेटनव (षयं बनि गिरं शौना्नो कु (मोक कश 
नगर, दिटमैवः थे देरे(वोटगेव्र काष्टाकाशि आमिष कांश छेन 


ऽ मोभैिक] 


~न =+ ~~ ~ ~~ ~~ ~~ न शक = ~> - = ~ ~~ ~ ~~ =~-- ~~. 
~ ~ ~ ~ - ~ -----*-- 


निन्य सोमान्‌ छेत यत णष्टि तायिश्राष्टन। (न्क 
वनलिनाम, ^(नख, (डांमनोव कि ठे ऊाराखं खला लान 
न? आमोत ड ठे लषंलं (ष्ट खात (कथा (युङ्‌ 
ठष्छ! क्ट्तन।। मगूणलशद्डत ङ छौवलङ्, मन अष्ुङ 
न]नोल), अमन विष्व नतव्रता, अमन बान कथांश 
(पर्ड भौव 

(नर. वनिन, “वामान€ ८य ठे लोलं शाोक्ग्ड ट्ष) 
कटुव न अमन नय; किद वाोष्ौत्‌ कथ] (छ््व खात किष 
ल न्ना न] |" 

(नख्ट्कं खग] ग्म वलिलाोम, ^८नउ, 4 उट न]; 
किनि न) यकनिनि जामत वादो स्ति ५4 रिश्राम यांमःवु 
साष्ट । 

(नख वलिल, “श्व्रकम्र यनिश्किड उविव्राहख्वर खोगोमु न्म 
शक्ल एलूघ्व न। ; नानावा चदे रिक सूट्वाभ्‌ !* 

खि जङिषव्ठाम कव्विलग, “बाषछ] (डाग्रोद कथाढे न। 
ठग माननम, कि “वके रिक सयात मान कि? 

(नख वनिन, “डावर मान अकत्नि अक्को त्राय (मय 
खः या ऊटलन नोखम्र न] अवश्य चेतनत 
क।षछ}क) षि ऊ] एल) एाढे;, याव ज्ञा] ऊटनन्न डि 
न ष्व (ड्म एन। एषे; ड नह्ल बखोमरत्र। शालो 
(कमन कात १ ओके मन॒ कमार रिकं मिटल (भदलटं 
सस 5 ।” 


मोतरतिक। 82 


---~------ -~-------------~-----~---~--~---~~-------~~---- ------------ -- ----- ---- -~---~------- ----- ~ ~-------~---- ~ = क न 


सामि वलिना, ककिद् नौन।्ड निग्र कवत्‌ 
ध्वा नेषन वांौ खिदा नथ यटकवाटत्‌ दक्र, 
ड्‌] क]टन] ? 

८नख. वलिन, “शव ज्ोनि।” 

खांभि वलिना, “्खांष्छ्‌। (व्न्भ, समन सयान सि 
(कोन मिनि बांटम छउ)र्टन जामा लटम कोनोटव, खमि 
उयनठ>े 4 कारं (षटु नौनोटव्‌]। कि <ष़े। (कदन), 
काभेन निघ्मो जड नि्वर्वीश नन्‌ ध्व छेषेटव्ाट्गेव कटष् 
ट्म निश्किडि रुदम्‌ थोकृट्वन। सथन ड छनि खामोट्कत 
ठेनत॒ शूव यत॒ मलान कृष्टि € कर) नाङोत्‌। (कट्तन !* 

शभमिमन। बोटरेनव ररे जौमटण्टनीतव अभाषशिङि मानट्रतरत 
गखीव्रड] वक कष्ाट्न खा अर्थिक । ष्टम कुकोतर कु 
निद्र र्म कारकं कयन कचन) एलिद्रड ल) भिल, छव्‌€ 
मगद्रणवर डलट्णमे नींश्मो (तैन न)। 

०५के (खकमात्रौ जावि लाकांखं (मरे वियाङड कोठे 
परौटशत॒ निक्क़वद्धौ करेन चषएटौन ठेिरोट्म यके प्रौटनैव् 
नोभ अखि विथा)। यारु] रेक मभरखरिनि शतिभ कँ]टषटव्र 
छ्रानोलोब निके वमिग्र जभ्रूटव नोन शैकोत॒ म € खं 
(पयिस ममम कारिरेल्ड नोगिनोम। क त्रक्मर बाष्ट 
(एविदडष्ि-- मन ममग्र क़ किनिव (फथिगर एम्‌क)ङेश 
ण्न । काव क्रोनोनावर म्यं सटनत्र ङ्छिव्र 4क़ि 
| गकस मव] नश, जा क्स्‌ | ऊटनब्र॒ ङख्ित्र ८म एुव-म)खात्‌ 

8 


९० म} बिक] 


=. 


कोटर) एलिग्रादष्, «क दकवौत्‌ एम नषे कंटनद दशु 
खाभिमर) छेणिद्डल्ट। (८कोमटत छांरव्र क)मतवक्, ठार) 
धकषटि मर एोमष्ोत्र थलि वृनिद्डाष्ठ। कानेन निटम) 
भाट्भढे पा ठेशश्ट्निन :; एौ<कव कव्रिम्‌। वनिलाम, "कानत 
ङ्ट्ति कटे (लाक ट्व साट, निष्छगरे लोकाङं व] (नैक्‌) 
ध्थदक शट (श्ट; (यमन क्त (कंक (नाकष़ाक 
कषाम!" 

खाोग्रातर कथांश कट्क्रशं न) कव्व कोशेन ऊौनानात 
कष्ट वांमिनन। कि खानी, (नाकष€ ऊ)र्‌)ऊत्‌ क] 
खाभिम्‌ जानोनाद्‌ कषतव देनैव भूयं रिशा काष्ठेन 
कानेन ङ्ख म्म) कि केमांतव्रा कव्िलन, (नाक 
रु नै] नाखि जारा ठेव फन, उाबनुत॒ (म कलत छेत्‌ 
जाजिगा टेरिम खश र्डेन। 

<ठेतात॒ कानेन कथ] कशिटलन, वनिदनन,--"“डर 
नट्वन न) शटक्मात्‌ ; त॒ नोर रटे “भैक ---यीयांनक) 
जक्टलडे 4८्क (एटट्न। मात्र कष्ठट्ड 4 टकवात्‌ 
उषडग्र। छोक्राग्र मा व्थट्कं कऊटनत छछतर शोकः ५ 
(वभो उ।ननादम); षएक्िनं चक्रो मदटृशषा (वनो छश मभस 
ऊलव च्वि काग यक प्रौग (थक यात॒ क्‌ प्रौ 
मौ -टातर (का (वाट्नाक़े थत्र क) ।“ 
--“खाभैनि छ)'कृटन « (न) कष्ठेकं (एमन ?" 
-- “निन!” धके वलिम्‌। कानेन यकष (नार 


~~ - ------~---~---~--- = (न= न ~= 24 --- ---- - -- -- ---- - 





म्‌ शव्िक ९ 


मन्दकत काष्ट निग डा शूलिनन “वर छाराव॒ छित्‌ 
रेष्ठ छोल रान (मान) वाश्व कव्विष्ड नोगिनन। चान्नाछ 
वदिन छर क्न कम्र नैटक्र ४,००० गौ्े छठे, 
सरु चठेक़ातर मूला २,००.००० नौ ठ्ठेद्व। छ जाल 
डाल भ्मोन। कानेन काथ) जडाः नोकेटनन, यन 
ठे (जान) किं कत्वि्वन, यवर क]रौक्‌ फिट्वन १ «डे मव कथ्‌! 
खोविष्छिषटि, कोशेन (भोनांत्र उौलशनि भिन्कुटक वायिम) 
ध्वशं छन छांट्व . वक्र कविश्र| अक्के छेनकृषटि.कं (वन्‌ 
ताजोकेट्नन । ए व्रिखन नादिकं जामिर कान ेटनत्‌ केकूम 
मड अछिकट्ष्टे (जरे भिन्हूकरे। व।रिट्वि नषेध| (भन । भिंखि 
वर्ग षोटकत छेतर नहे] (नैन छ)ङ1७ शखनिद्रड नैारेनोभ । 
कान देन एनिग] (शरैटनन । 

तवि्ड (माषे चूम खमिन ना; षि्त्र नवर षि 
आजि बंवर ख्व (खौ नोकटेड लांगिल। (मढ 
छट्नवर॒ ङित (लोट्कवर माकर टे भिन्दूट्क्व्र॒ निच्छम्र (कान 
मशके खोष्ट। ाटणव्र ठेनेतर मिन्कूकषठे। न्ह यावात्‌ खर्थु 
कि? खभ कानेन (कोम कथे वलिटनन न) । शौव 
तोप्वं छनिट्ड नोडरेलांम छन्त छेशेत्र भिन्पुकषठ। ८ बरडेव 
निग) लेग (भन; छोव्रनैव खोट) एमताम्‌ गक्-- मरन 
ठन्‌, मिन्ृक। छाए किनोत्राम्‌ न्ग श्रिगर ऊटनत छछतर 
-फलिग्‌। (कड्या रडेन। छोत्रणव्र कारां शूनव्रा् कटन 
शविष्ड खोत्रह् कत्रिन। मिन्कूकं (कोशाम्र एलान (कग 


९२ मोभैब्िक) 


क 8 9 १ वा गा वा क प या का ता व ण पाः ` हा व या व क 





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रटेन? ठेखेदव्राटनैतव (कन्‌ (कटने कान टनव जाज्ञौगर द. 
दक्र ख)टन ? 

जमरखे तािं कोगिख कोटशेनोभ। नैतरिनि मकल 
ठ्णिय्रा खात निदकव्र कंठं कद्रिष्ठ नाभिनाम्‌। मून 
4कथु[न) वषे लिथिवावर ङक नकं छशा (जाश कंदिडङ्टि। 
रेमव क्वि कद्र मक्ता) नी रेन । (मठे ममम 
मन उमक भतम व्वा रृषेल (घ्य मक्वाक्र एर्‌ नन्‌गन्‌ 
कर्ब्विश््‌। चाप्र वाश्व र्डेष्ड लोजिनलन। नाट्य (काफ़े काम 
शूलिग] (कलिलोम ; उव € शत्र कृमिल न]। कि एकेन, 
नेव (य कमे वासम एलिनल। सोङ्ाटलं याश्न लोगिन 
न। कि? माोद्नागिहाट्त (करिनम कोठा सोषणुषे उना 
गिम] एलिदङदष्ट । 

के ममम कानेन जामिदनन, वनिदलन, “मविम्रा्चिम 
स्थि ।* 

खामि वलिलाब, “| कानेन, सव्र (वनै नेत्रम जमर) 
मख कनद भावव न्‌] 1" 

कने ्ढेन वलिटलन, डन न) हग जतम नाड ङ 
पिलूम।" 

खोभमि विश्रि ठटेम्‌। वलिनाम, "ड र्न अके भेजम 
ङ्य व्‌] ना-र्‌€य्‌ गांनैरनाँब्र ङृाट्ड ?" 

कने ढेन वलिटलन, “खाोभोन्र हृष्ट रिक नम ष्व 
जाश्टनत एल्विव्र माद (टक मट्व्र॒ (जटनहे कन) ।* 


मोँतरुब्िकं ९७ 


- चोमि वनिनाम, "“ोश्टनत एच्च! डा'क्ट्न ठे भवम 
वाठट्त॒ (भटक खाम्‌ 

काशन वनिटनन, ^}, लयन" जाग्रता टेश कृशम 
अनवत छिव पिश एटनलछि। 

ञाभमि अवाक्‌ र्टेम्‌। किषण्ठोमा कविनाम, "म कि 
कान्‌ देन ?" 

“4 (पशून. वलिग्र' कानेन कत ऊनोलावर क 
मनाम पिटनन । 

(पयिनोम मभूत कन सदक्वाटव्र॒ माफ।,--ऊन यू 
शूणि्न (यकन ख)कृडि म । (मठे कुष संनत डिज्व्रनक्राःकत॒ 
(थ 7श्‌] छलिग्र) <वषाषशेट्डष्ट । रकं।षएव दठेनेतव <कवात्र र} 
एक खमख नेत्रम वनि ठो मवाठेम्‌। नछेलोम। 

खमि किष्ठाजं कव्रिना, ^५4 (कोलम्‌ यमिनाम्‌, 
कानेन ? 

कानेन वलिदटनन, ^4 रुद साश्रम्र्गिर्ति (मने । गाङ्स 
(कवल सेन € विरू विखरमत्र नामे जाट्न; कि मबूट्येव 
जनां (य कं अमय] खाद्शरैमशिवि बषठ ड] ८कं कट्न? 
धमव खाश्ैयुजिति लयन (नट्व्‌ नि।” 

(मयिट्छ (पयिष्ड नैवम यमन उगष्त्‌ ङ्के) ेडिन (य 
¶मयश्वाम वक्र रटे खामिन। मबुदयेव्र कुषेर्‌ ऊंल <न 
माम (फथहेघ्डङ्िलि, सडेवात्र लाल च्केग। रेठिन। यव 
नोर € शक््कत्‌ मक् डेन (पयारेट्टरशलि। मकार 


९5 मात्रिक] 


पि नि 00000 ० 1 । 6 १ का । 01 910 


घटम ख्य (भेन, एम वक्र र्ठेय्‌| खमिन, मटन रृढ़ेल, 
केवत भथ) धुरि नष साषेव। (कफाटेगर वन्निनोग, 
ख्द्ि एनून कानेन, खव्र नीवि न) शाकृट्ड।" 
कने हनत कूम नाम्‌ सार}ल सिव्िश। एलिल । शनत 
भिनिषठि न्व खारा कनद ठेनत छोमिम्‌। टेन । मभूत 
नोरल रा श्यांम थाम्‌ रा9] र्डेल। 

८ताछम्‌, (मव्रिटगे।, (क्न. मालिन्नान्‌ नोव ञ्ठेग) खाराखं 
(माङ) नैनम गूथ एलिन्न । 


मश्चुम नैव्िद्छ 
डोगर ङखर्भ 

शके (य छमधामानेव, छादरौ सन्तत्र अके भभू | अमन 
नोल कन्न जावर (कान्‌ मनू खोद? मगुदखव देनेत यगन 
सन्तत युत्त मनय वाजम जोत (काशा बषठ? कं 
डोर करटिनौ मरि ठेष्ात नाभ कङ्डि तरिश । 
शोक, ८वामान्‌, वाभिरौप्रान्‌, क्थकिगरान्‌, वा!विद्नानिगान, 
स्णे़वन्‌. गोोदर्वुनिष्रान्‌, (छातियान्‌, खाट्य्ानिग्ान्‌, माठेताकिचम्‌ 
€ निगतवामौ दौर शक्रेण टेकात दुटक्व्र छेत रिम) 
प्नोट्रत्रं कव्िग्राट्। देरव छेनैकृटन कड सन्तत तौजा,-- 
थम्‌, ठेोनौ, ग्रान्‌ट्वनिष्ा, ूल्णामाखिष्र, क्तौ. मोठेथम्‌, 
याद्ग्ानिग्रो, (तोम्‌, मिभमिलि, माङख्निग्रा, कर्मिक), खाम्‌, 
(ग्णृग 1 यमक्न्‌ (फन (यन एिववमाङत ताका | यथान छ) तु- 
त्रेत प्रड यब्र नौश्रड नडे खातर टेडव्ररेेःवाट्नैव्‌ ब 
तीव्र गौड नाठे। य्थनकोत्र (नकत्‌ क सयौ ! ठेरापत 
गृदय (यन एएविन षर)मि नोभिमु) खाट । सन्तत केठदपतु 
मरषच्य, कि खचृद्व (भानात्री ठेराटफव गोदत्र चर्‌! रेरोत्र 
शवतौनड नग व्‌] खभेटवव ब्राहजात देनैव कथयन) (नाङ€ 
क्वन।। टठेर्तु। ठेक7फत्‌ (षषे (षा ताजाश्लि नरेमाढे 
मङ्ख । 


८७ मनस्क 


"~~ ~+ -~-~---~-~----+~--~-- ~~ ---~ --+~------ ------- -- --- ~~ -- न म ज ज भ ज ज जा १ अ -* ~ +~ ~~ ~~~ ~~~ ~~ 


ङे मभूख-ेनैकुनशिड मम शनिन्र ऊमि खार 
छेवदेत्‌। ; छोर) त॒ छेत टदख्ठानिकं ७ नानाति खांभूनिकं शक्किमू। 
प्रोत] ऊलजित्र ङ ठे<कष जोधन कत] र्कम्‌] शोदकं । 4धयान- 
कोव गेखाक्तज, रटलत वांनोन, कुटलत वाशान, (भएोतनेङ्मि, 
कृव्कशेन्लौ जम (फयथिववर छिनिम। अथांनक्]व वमत छश 
(नाके कृरिकाटषाव ष्ठात्‌] जौविक)निद्वीर्‌ कट्वर। अमोत 
(फट्मत एकौत भरन्‌ कि ठेकृटमव (मन शीत्‌ एषम्‌ नग। 
मकट्नषे वनगलौ, मकान साशौन, मकटनङे सयौ | मकटलव्रडे 
नि निक टेष्ठन ७ गखट्कवं खो । .4>े मव कृषटकत्र) खरि 
सी, कथिरकोक्दनव्र मर भोट्रतर वर! (षटटनदमटसम द्मौशरूकष 
जकटलङरे नवि व नैनिष्छत्र त्रिन्‌ ऊाम)कोने नेतिमू। रभि 
८यनिगर। काङ कत्म (वषग काडङोब॒ भुय दशतु 
ष्व (तथ व] शम्‌, (कोष € गाोंरमदवात्र एिङ्माय 
(मथिष्ड नडम्‌] याय >| 

मन कटलत्‌ वाशन्‌, मन कलव नानीन, यमन सन्तत 
उक्रलछात्र॒ नन्लनक)नन अक छत्रखवर्ष ड वोत (कान (टम्‌ 
आटष्ट १ < (फटमेत्‌ मकटलव्रढे निल मिल शरकमश्लश्र क कृषि 
शरटन्नफान याट । जके मव कृट्लव्र॒वांशीं्न नग्रन- 
अनङ्ष्िकन्र कड बक्त्‌ शुकेन) कृरिग्र बाट; (कानशनि 
खङ्रशम सशक्त ऊक विदा], यावत्र कंडकशैलि एम<क)व 
व्रः € बशर वाङोतव्र कट थमिक-एल्लम्चिक), (श्वडदनालोन, 
व्रकट्भानांन, व्रककव्रवौ, पाशी, कठलिरनि, कनक, 


मौ भ्रिक। ९१ 
वर्णी, प््लौ, नीपे), कव), तकन, मकल], मल्िक), 
कारेजल्चिक), र्वैढे, एन गे, मिग, (दन, शक्तव्राङ, 
पकनोगशक्), ए 7मनि, कून्त्‌, फभेत, काभिनौ,.८कड्कौ, मनुस्रमोौशुन 
नाङेनाक्‌, किद्त॒निमुम्‌, लिलि, स्वुहने-मि-नष़े, नानि, 
ए्वीगयो, लनिभियम्‌, कर्मुङ्ाडगात, न1एनखिगा, ८ निम्‌ 
नै, भिदनोद्नफै, काद्मनिश), कामिन्‌ निग), िबदवाख. 
ु.-८वन्‌, काष्े-श्चिन, (क्त) कुषे, ककु-फखग्त्‌, ठनि-मक्‌न्‌, 
पठ-षेकेलिमराम्‌, उम्‌ रेड, नर -ठेन्‌-खारेउन्‌घनम्‌, 
भा} खिन्‌, टमा. शोनिद्रमीन्‌ अर्छि कज वकटमत्‌ शुनङे 
म कृषिम्‌ खाट | छे जव ङुलव्र वाशरोटनत एाविषा्त कि 
पन्त (क)एेन शटष््त (व) ; मव (क्कोषेन भोटषटव नोोत्‌ 
क वाकार, (कोन नौ नश, (कौन ना वांपोमो, ध्कान 
१] ए ९1, (कौन नैींड। (नगीौन, यांवांव (कोन नीड) व्‌] 
कीकृोटन) | नीत वरे व] क व्रक््र ;--८कर्‌ मवु, (कङ्‌ 
वशन्‌, (कक रनम, (कर्‌ नांल, (कङ्‌ (नीौनोभौ, (कङ्‌ 
कषटङिंटन) ! खवा 4ङे मव धननिवष्ठं (कफेन भैष्ट वर (वषो त 
ण्लोग॒ छलोग्र कड तकाव नांव खूर्वव ८कम्रोनौ ! (काश 
कक्फ, (काथ श¡खावारट्वर, (कंथा व नष्छावजो न), 
क] शख विनि घाम, (कोश ओांङेडि, ८र)था€ व) शाढम्‌ 
‡ मटव्टनत्र सम्वत सन्तत्र (कयात । 

(कशत मसौ वाशीोन! मखो वांभाद्म क्छबरकट्मतर 
भानोक्त वानीन खोटन) कविय खौष् ! कुलकनि, वीथाकशि, 


2 ` मुभे विक] । 


~ ~ ----~~---- --- -~--------- ------~---~----- -- --- ---- ~~ ---- ~ == = 


एनाकनि. नकि, गालनैीम, मिनाद्, र्गिमरौखं, ्िस!ककलि 
दौेनालम, दाुगांलम, नकत्‌, कना ॐ, गषत ष्ठि, ववि, 
उन्‌८ङद्नि, एमोे।, ८वशन, (तेनावि. मून।, नैम, श्श्े, कवन, 
शिक), चेष, वुल, ककरन, (तम, षिषक्रि), काकूु, 
खना, ना, कूम अङ्‌ वाशीदनव्र भूद्व (ग वित्र 
कविगा?ष। बावत्‌ (काथा€ व) व व रटलत् वाभौन! ~ममव्‌ 
दनान कड त॒कटमवत रलर्केय।खाषछ;-- याम, कना - एन), 
मर्दमान, केषाज्नि, कोवि, कालौदवी, एोषिम, हिनिान्‌), भभरडि, 
सतख, शक्रूतनौ, कानाठेर्व्‌शौ ; बादनन, क्राम्‌गोाडि, उतुल, 
यत्गूख।, खानाव्रम, रिष्‌, कन, €शाननषे, (नलवु--वा)नौ ८लवु, 
कग्रलाद्लव्‌, नैखिटलव्‌, कानि, (नीछिट्न, एिद्नकानैङ्ि, 
मत्रवौ, नात्र, ष्टिनि्लव्‌ ; खाद, (वण्यन), ८नेगरात।, विनी 
भाव, लिषए्+ खा मखल, फल्‌म।, क) मनुाक्र), कवग), माणा व्र, जाड 
(नान), नटकष्े, खानूटवायूव।, बालू, वायदताषे, याग 
विलांडो बामड़।, कामक, वके, ऽ1नड।, कीन, (वल, 
कक्‌ःवल्न, कोषेकमल।, कलनोढे, कनि, मूत, (शालोनैकाम, 
वानाम, शुवानि, (थ॑णत्‌, (नष्ट) अड्ड तोतान बाना कतिर 
खोट । न तृ सामवागोदनम नाना व्रकट्मत अम ठ्टेगर 
याकल), दवाोक्राकृ, छिभजोभेव्र, भ्रौ, -बान्‌- 
र्ण], रूफनौ, (कलदथाम्‌, (नागोनयीम्‌, (नगानदङ# 
(नानालद्थन्‌, किवनाडान, (ग्णरनद्रछश, गौजद्रडा१, 
८उ)डश्रुवरौ । 


मबक) > 


- ठेठ) वाजो कर सूशक्ि नेष्ट-ठ्ेठेकाोलिशषाम्‌, एन्त्न, 
कर्णुत, माक्ष्टिनि, लवकर, वनां, रन्‌ छन, वर, तष, गाठेन, 
(शनमिग्रान) अटि कड सूक्त नष्ट । ममत दम यन 
मठे मव शक उत्शरत रषेगर] याद्‌ | 

८तोद्रणोख्चलन यखाघ्नाघ्क गष < अथा नः7ष्त् 
क्छ नाडा श्नि ङनूमन्‌ कव्रिडष्ट। मबरूदखत्‌ (कान (षंमिमृ 
कड शोकार्त (खनी क्ीराठेग्र वशगा | मृत गृटतर (ऊव 
मष्ट वत्िदात्र (नोकागरषष्िगरि) मब्रूदणत्र ठेव कौन (कूलिगु) 
राष्ठ ववििटडटष | (नपकात्‌ नोन शनि तू र्केड गान ङ्ढेटड- 
श्नि ८यन मभूदयत्र कलन ठेनेत मोम मोफत नयौ मोत 
काण्िःडाछ। कि रयौ यरे (लानत जौदन ! रोक्नाद मोक्ष 
र्या 8 ठेठा्फतर क्रत वुल) वानि (शग) कनब्रव किष 
(छा१ कव्ि्ड रगन।। मनबुणव्र छेषिका वोम शाटेम, 
मम्‌(ए4 वजार पृष (फरिम्‌ टेक) छौवन काषाय षत्‌ 
रेशाद्नत च्चौ ७ शरूलकंडानैगे मद्वमाके ठेकोटणत्र कशो मटन 
केवि्डछ; ठेटमव्‌ शीोटन मउ्ख्डे छाराटमत॒ मन ए}रिस्‌ 
मा । (गैस त्टड खखगेमो क्क्व ञ्चान खाट्नोत्र छन्नो 
(नाक) एालोेग्, श्ट्मि छकग सथन रेकाव) ष्ट शद्ग चदव 
कत्य) याम छथन ठेङाट्णवर गौ € (ष्टदनदमद््रण्त कण 
पनन्त | (ष्टमटमत॒ (मठे कन-कांकलौ <€ गजम) खन्‌ 
५'नान्का्न भवि बरूट्शव्र सूजिष्टे कामि (परिमर) डाङ्ाणवे 
 खानान्तं छनि छे; भग तुङन्णेत कोडङ्ि छउ)क्]तु\ 


ॐ © म्‌9) ह कु] 


निटमट्व ङ्न यांग; छाषाटणत मम कष्टक मरर्थकं गट 
कृत्रि निदखटमव खौवनटकं धृक वनिम्‌] बटन कट । 

>> (कङ्गा कै खांमतर। भीम्‌ नोत ठ्ठे। ष्ठे .सकमचतौ 
खामद लौला।नौत अनौनौ नात ठ्ढे; बीर खःएत्निग 
चोत्‌ अदधा आमत्र) मक्षामनैव् अच््किम्‌ कति। 

८नट्छ्व खान) एताम) रुक्‌] पार्डेन;, कानमे काङ़ादखंद्‌ 
नखि ष्काग नेमिम्‌. गोडेन, "बीर खि (मटक ९ ऊ}₹1ड 
एच्चिग यु शिमाए्व एनि्डष । धमन अनर्म ऊाङ़ःठ कृङटेट 
नाण याड्ग्रात अर्थं शानेखाने कृत्‌ । 








खणे शद्रे 
ख)।एैल)1 क्‌ मरामोशैत 


आाैनाछिक्‌ ! याषिनाकिक्‌ भोमोशेव्‌! कि अमौप, 
घनह्, वे अरहोमाभव ! टेर। (यमन चमौम्‌ € विभिन, (मनि 
टगृव । ठेव ऊनतभि याष गड नक्र दुर्गे भोषरेन;, 
क मा नग त्र माडल, व्ल शद सिन सोकाव् 
पल । शरृथिवौत्र मवग व वषु नपरौ जके महामागिव 
याजिर्‌। गषिग्रा्ट~-८मके नावम्‌, मिनिभिगि, सोमाखन, 
न) श्रा, ऽव्रनाक।, निव, काका, (माननी)नल, सन्‌, 
(नायात तोेन्‌। ठेरोफत्‌ कटकशनि नैरिदौत्र मक्ा्ेक्र) 
गामव अथा रषे वरदा खांमिय्ोष्ट, खोवात्‌ करक- 
श्न कंनङौन थषव € शेडोव्‌ परम सक्रालव मधा इडे 
यामिग्रो्ट। ठेङ्‌व (भस ङ्कगाक एर रगत खङ्दरौटनेवर 
८भर मौभोग-(कन र्म € (क्श. यक्‌ श. (कारू ( ठेव 
यत्र॒ वक्षि नाम (क्न अक्‌ (दषे )-यारोत्‌ नाभ 
धनिन नोदिक्भरे छाग कारिग्र छे। 

शिवात्‌ ररेठ कराल तिमर एलिन । या.नाोकिक्‌ 
गमाग्व शैखिग्र जदेवोवरं यमत्र (कान्‌ तिट्कं शोषेव 
८ॐ। किष्टरे वुदधिनांम न।। सकरन छशा कट्नद्र छेन 


७२  मोभतिक] 


छामिग्र ेरिन; खाः, (नख. € कनूद्रमन्‌ छटण्त देनन्‌ जिग | 
टेरिलोम; ८फयि वाद्व) मकेन शरदं (कन. (मके. छिनुद्रमण 

अङि बर्ग्येष्टे ख्व (कय) यारेष्छष्ट। खामोदण्ब ऊाराड 
शयन (स्खटनव गामे पिश एलिद्डल्ट। रिक दष्ट नश्‌, किंशु 
मच्छि मिक रटे सक्ष अवल वाोडाम वश््डि सक्र 
कत्िग्राटष्ठ; मभू शुलिग्‌। टेगरिसा (षेलत्र टेशतर॒ (दे 
याषटखाटेश) ग्न कविर । "सराजं 4 एूलिषट खात 
कत्निन ८ छाटण्त छेनिद्तर जात॒ शाक) मष्वभेतर ठ्ठेलन। 
नाभिम्‌ खामिमा चव कित्िलाम। कनट्मन्‌ निटडत चात 
नेन, किदं (न खागावर मक्र घटत एकिन। 

(नख्व मनव कश वुद्धि नातिभ्र उार्)टकं वलिनोम, 
“न, (डामति कृश) खानि वड छि, किष 4क खवः छोङ! 
(छ याख्स्‌ (नहा निक्व्‌क्किव भर कारू कत्‌; ट्व ।" 
(नख. (कानत पिनन), कान € कं (र्क्टकाठ़म्‌) प्र 
ण्वि ८21 क्लम्‌) तरम्‌ बशिनि। डङ़्ाकं खानां 
रिग वलिलाम, “ङ्म्‌ ठ्ट्या न। (न; जोराङ्लं ठेवा 
गू नोदनव नामन ग््ि वा््व; काष्ठे टेन) € छाम. 
-न्‌।नावात्र यक्षे न चकष सटां भिनूद्वटे । 

(न. खाया नोदन ोमिक्क्रन षाश्िि| बुह्ल, शद 
वनिन्‌, व्यनि नानाोष्डंर्ग्‌ ड खां वराटके भौनाव।” 

ड)ठ़ात॒ कथ निम्‌) वामि एकाङ्ग टेिलाम। «५ 
गोच नाोलावात्र ङक वामि माए थद निम न्‌ा। 





मर विकं। ५८ 

८५उ_ वलिट्ड नागिन, “खां तराले ठक्‌ ममश्; मामन 
८स्णोटनव्र ठेगेकुन, (मुन] व्रं, दुख (वन वरे; “मन 
सट्यांशे खात्‌ भिनू्वन।। वलन, योङ, बरोट्रवं भानाद्वनः 

ख्ामोत भूय ङट्ड (कोन कथ वांछित क्ढरेन न। (नय, 
वनिन, “योक त्रायिड रिकं नशत मगर! कंन्हमनूदकं 
खमि शिक रुट्छ वलि; (मख श्छ र्ट शोकृटव | ब्रां 
नषठोव्र॒ मम कानेन निन्य निद्तर चटत्त्र छिव शाकृट्वन, 
रगृ व्‌] विष्टानोग टम्‌ नैाःवन । नाविक]. य याब काटल 
शाक्व, (क (कथ नाद्व न।। (नोकाग्र क, शोल, 
माखन मवे छिक्‌ क्त्‌) खादषठ। क्फ (त्क (छाशोख 
कटवि, (मोका) कारात्‌ मक्र शग. ङ्क एम खि 
यष, शन्‌ (कोन कष्टे ङट्व्‌ ना 

यामि वनिलाग, “कि मब्रूट्यत्‌ खव] (मय. र!" 

८नछ._ वनिन, ^श्वावौन] (गदड (नटन वकरैक्‌ कष्टे कव 
क्व त्व कि। (नोकांशषटःखुय)ंवणज्यख्य कि, खाद्‌ क्"गकरेलषे 
त्‌] ?" 

८नख. एलिम) (भेन । जामि काणे र्म दमिद वर्ना; 
शयन कि केव्िव? (नद्रख्व करए थर्ि-खोकरे शोन।ङष् 
ट्व । मि, (नख छ शिक कथाट़े तलिषरट्ट, वमन सदयोभ 
फ़ कववं भिनिद्व न), कोन रगृ काश छेन खोकर) ठट्ड भै 
भख मोडेन पृटव्र ोमानव्र नरे योज््वमकि न छ) (क 
वनिट्ड शीत्‌ ? 


५8 मोगैबिक। 


ठे ममर स्मि शमि कविर गकं रेट नागिन; वुबि- 
लोम काशङठं कट्नव्र खवर विद्ज्टृष्ट। ममर मिन निवूद्रमत्‌ 
मड वभमिग] तरर््निग्। <कर्िट्कि ख]शौनजाव यवन लान, 
थात कन्दक मगरूखङनरटरुत्र नूर्न नृखन लौवलश्त्र कथं 
क्रानिवांह विश्रून खांथठ। ममम (यन खगत ङ्डेग छेन । 
(कवन खनि्ड्शि खान कण्वक़े। वकि? वर्म्नि नेत (फागी 
ित्रिद ऊदिम] मनत (काम .शूजित खाजाम रेकिवूकि 
माोविष्ड नागिन, जांवात यऽ ज्केःड लोौजिल। यढ 
(क्क्‌, नाोनाटन) निश्िडि कानिष। किनिषव नैख श््टा्रे्ड 
नानिनाम; कानु (षान सिक कत्रि] नठेनाम, (लश)वृ 
(खय मव (नषे कब्विमूार््निम छउोकाऽ शष्टाङेम्‌) नठ़नाोम। 
कानि नवर कथ) छाविघ्र मन सक एटयञ्ठेन ! कान 
जक]टल कानेन यथन (थद्वन (ष खामता मतिम्‌ नड 
डयन उक्त किक्न्‌ बनव वख क्क्व } ड गङार्थन।, 
ड योव यद्यव ठे र्न छनि खोविद्वन माकरषाकं 
खावांतव्र दिग्चीम कत्रिम्‌। (वम गिक नीटमारि । डोव्रशव्र 
कााशुद्ठःनत माकर (थं कव्विवाव्र € ऊर्व मशि (भीष 
वांट्त्रत्र म कथ्‌] कशिवान्‌ खं वषे ङेष्छ कृङेल। 

जम्‌ (सन योत्र काटे न। मक्षा माज वाङ्जिमू। (गन, 
यन & कने कुटि मिनि वकि! छेट्डछनांतव पंक्रण वुक्‌ 
षिन. णिनि. कर्व्ड लांशिन; शिति उढेग्र। वभमिम्र| थाकि(ढ 
गाव्रिनाम न), कटके कत्रिटड लाभिनाम। श्ानूटन भिम (मव 


माति क ५९ 


ददतत गड काशे ददरेःनतर भ्िेकिमाम्‌ (फसिद्ड (नीनोम; 
ग्ठिकिम्रादमव मिरु बगूना किनिसश्नि षष सोरेट्डं 
मरन मत्रि न।। क्व कारनाद्‌ कष्ट खन्‌ कवत्‌ 
भिं वमिट्ड ठेष्छ। ङ्न । ककि सथान वर्म] कृ 
ग्रोनन्क नैंडेग्राछि! खोएषठे। वाक्जिन। लार) उयन्‌ € बा 
कर नोऽ विम) छेडव पिटक एनिघ्डाषठ । एोविपिक निखक्रः 
दु रेक्षिटनत चट चष. गक नगे वकि आंत्र के्मक 
मिनिष्ठे गौं वाकौ। (नद्ख्त्र वद्वत्र णत्रूजोव देनव कान 
नार्तं खनिलोम, (कान गक नाङ़े। (नास्त जोक्स 
निद्छंव वावरत छ्ड्व निगु वमिनामर। कोकाङ एनिःड एल 
ठु>!< धाभि (गन); ड)।व्रनव्र ग्रेषु<्‌ कष्ठे] वक्र खङ्गरव 
कदिनोमि। वृङ्लिग्र कारुल मभूत जनाश भि) 
नाभिश्षषट । न वाकम्‌] (भल; (नय जाजमिनन)।। यङे 
गमम थदव्रव मवत शूलिग्र। कानि न निद्या शेद्वशे कि 
नन । ऊर्क (परिम्‌ आभि षएभूकाठेय) टठेरिनोम। 
कानेन वनिद्नन, (८ग्खनुहकटमव ठेजिङम खागनि किष 
छनन, शंटक्मात॒ १" 

डौतगतर॒ कानेन न्मौ क्फ प(्मोरूोग वमि 
(^ शेट्नव्र स्पौर्थ ठेङिकिम वनि खोत्ध कर्चिट्नन। मक्षा 
युद्भ स्णूानिम्‌ व्र किक्रग वन रटे छेरिग्राशिनि, लभेत 
ध्वा मव्वाद्नक्र। वलदान ङोडि वनिग्र। छशटमत्‌ खरृह्]ट्वव्‌ 
कथ), नुन (कनं कम्‌ कतिवाव छोरा्कत्‌ धवन खाजैर-- 

(4 


४७ मौज्िक) 


= ~~ -~--~ -+~ ~~ ~~ -~- ^~ ~~~ ~~ ~ -~ -~~4 =+ -+~~-^ ~ -५+-*+ ~~. न ~= न = ५ ^^ ^^ ५५१ 


टे जम कथ टक सट्क वलिघ्ड लोशिटनन। कलानाम्‌ 
शन मट्व बाटरमव्रिक) खारिकोव्र कव्िगराद्न; ग््णाःनिमे त्‌) 
८गटठ़े (फटने जिंश) ऊक कवग] कं छान छान्न (माना 
(फट खोनिद्ड नाोनिन। बाँदमव्िकोम उयन स्युः निम्‌ दत 
क्ष्छ्यं अार्विनडा । €न्द्रिक्‌ डेरव्रङत्रा€ अाद्मत्विकत 
शिक वृ किल्ड नाजिनल। गन्‌ बरजिमरा (भेन; (षष्ठ 
विवार रकेट्ड चदवण] कटय शवलः कठेम्‌) करोठेल। मभूत 
छेगव षेरदोकठ ऊोरछःण्त मक स्खाानिम. ऊ)रोरुष्व धोतदे 
युष ठ्केड। छश देलमानिटत मनि सक्ष युण्के ठ्य; (म 
युक ज्छानिशना रठेऽवाङफव कठ तिमः यास॒। 
ग्निम्‌ ण्त्‌ कष्ठ मड मंड मन्‌ (मोनात्‌ नन; मक 
रुट् (मठे मव श्ट (यिषा स्खोनिम्‌ द) निटकटमत्‌ 
कारक सादन लानिावरस। (फम्‌ । काटठा छतिर) (भन; 
ड (मनाव जान ऊटलव नाम ममार्थिं ला कविनि। 

कान्‌ देन नलिदनन, मड्नि। टेनमानैटत्‌ खामव्र यन 
<मङ्टि; (मठे मव -भैडकमिकं कोशन यकि एोगूव (एथ 
षान ड ञोमात माकर भासन)" 

कान देट्नव्र मक्र भिग। (फथि जाक ङमितर ठेशत छि 
क्के व्रश्िगराष्ठ ; ण्न केद्नकृषनि.क्‌ यापना कारं 
कृठ्ड वा म्ाठेल नर्य मभूयर्न ब।दनाक्िि ट 
चेशिग्राएष्ट। नव्विक्ठत वालित्र ेभैत्र वककिःनव्र नैष कोठ, मत्र 
व्रा (लाठात (एन, (नाख्व; जातात मादक माद हाड ए 


मु विकं। ७१ 


;मानांव छल । कर्व कंड्िनिय नोविकृ यट नौर्बिन्न 
मान कार्]ट्ल खोनिय निल; कड नषि] त॒रिनि 
छा! युद्थष्टे। ५१०२ शृषटाटक वङ्‌] चषि खख डाङ। 
नट्छ्त॒ (द्य (कलिला । सथन वुदधिलान कनि ठेन निद्र 
किक वनौ ; ध मद्वत छिमिठे यकमा अर्शिकातौ। 

कन्न निरमा वलिटनन, “कनेष्ड्त मद्वा उदनकं 
एव्िणं लाडि यो, वलव]दमत॒ को षत्‌ षत॒कान 
वक्र, न्ड € उवबानिड शट्‌ खाोमष्ट। वटे मव्‌ (मान) 
मातत जामि मिया गकि 1" 

कन टृठटनत कंथ निम्‌) ममख्दरम अआामाद्‌ माथ) क्रठेय 
खामिन। पंत्रिटयंव ङक छकान्‌ चर एव | उयन्‌ वृदिन्नाम 
समधामोग्वत मदा (य (नाके मष्टा काण्ट्डष्टिल 
काोग्‌(ेन निद्या (कन रष्क अड जान खान्‌ (मोन) 
विलाठेम्‌] िटिनिन । 


नवर भैत्द्ष्छमं 
ऊनमश्र नभतो 


गत॒रिनि भञ्टने (क्कमुदौ। मक्नःःवनोम्‌ (नण खोभिर्‌ 
खाना च्व शुदं कंव्ििलि। षत मलिन मिष्ट 
एषि 8 घ्न रुडागान (फम्‌ खाोगात्‌ द] विक्‌ पः 
रङटड लाशिल । 

खानि वलिलाोब, “नख 

नय दलिन्न, “क, घ्य ममम नालावात कथ] रिक (मक 
ममम छारारू ऊटलवे टलः वटम ८एकृन ।” 

खमि वलिनाम, “ठं, टयम कान छेन निद्म) ऊव 
नक (एय (ड (नामष्िद्नने ।“ 

(नख विख मठम्‌] एकर विश्वगौव्रिड कंग ङ्कः 


ध 


सगमत कंशलौन वटे बन्ं |" 


॥। 
हे 


कवि, ध्वा (ण्ड, (म कि! 

उयन त्रित फ़न) मव ट्रक 4८7 शूलिद्र वलिष्र 
वामि करिनम, च्ठेे(तागेवं वाटकरव (नारव मिन्करूकवु 
ख्ङतिषिक) व्राथाव्र (षस कान्‌ षिन निद्माव वादक एत वनै 
निवन । ययन मङ्ास्त श्वम ःकेत्‌।दत्‌ निटसश्‌ |” 

दिग््रहव्र खाव काष्नि्न शवर (नर. वनिन, “नागर २, 
दमव कथ! । कान ङष्नन। वृद्न ङ्डाग्े एवन न], सत्र श 
निषश्य खादत] सृटया+ खजव" 


मोँव्रिक। 


# \८ 
?। 


(नरु. एलिम] (भन । 
लोमाकानैए गेव्रिश् खानूदन शिंश कन्म (पयिस नुदि- 
लोभ (नोएिनम्‌ यन मक्िण-फक्िम-नेन्ष्िमि रिक एलिटङ्दष् । 
अ्थी९ खारा ठेवा ठ्ेटवरनटकं नच्फाएड वायिश। मुत 
मिष भैख्ट्डष्ट। (वन) ननाटब्रा्ठौव मग्ग काऊ खनव 
ठव खोमिमरा रेठिनि। ष्या छोटणव्र ठेव (भनम्‌, (नस 
खाद्नठे छेनङणिडि र्केग्राट्छठ। (गयि एादिकिटिकें (८काथः<€ 
रक्रा षि ने ; एोबििशिटकं यपू कृष्टि एल ८कदल काढरल) 
मन नभेटनव्र अर नाोणिख्द् । जका वे (मध्‌ न) ; कलत 
यश्] शूवषे धाताश्‌, वष्ट व (एर देशि नाशिन। वृदधि- 
नाम राक्र) ककेट्ढ खोमा वल्नूटव खाजिस्) नैष्गराि। चाष 
नाोकिक्‌ मकु)जागरदतत (म कि प्थांत्र निक्ष काङंनल बु! 
-परिट्न सयाम भिकविग €, क्य कौशिगा ला] मधन र्व 
यन (कोन्‌ याषकनौ गांग्रावद्ल यनि खगाय छात्‌ वृ्कंव 
षत मोग हानिम्‌ ववि < गूषं म्वा आभा निति 
निश्‌] याठ़ेटव्‌ । नोनलिनौव्र भ (मङ़े नौव कन) कऊटल्वु 
म किचेन, ठेडान, टेष्राम रेष्छखन वख | (मकि क 
८ क| वरु वष्ट (ठे | (रेत नेव (षे; (यन ठे) 
५[य्‌ नादे, कख नाड, कट अवमा ना, शु 9ै.न्ोभौव शके 
~ पनायत (यन (कोन नि मोटे शुलिमर फुलिग्र), भुवि 
दयु], (टेश्नि थक्‌ त ठेनव॒ खातर क्ट] नोखोठेय 
। ' गाग निद्र । वौ्ि-विटक्राङ्डि मड खलब्राभित्र 


१० मोभंतिक) 


वन स्मै -----~~ ---~~---------------~-- ---- --- ~----- ------- ~------ ------------ -~+- -- --------+- ----~----- -- --~----*---*~- ~ 


(म कि छग खावर्ढन-विवर्खन, (मकि ेग्राए रेक्नाम लन्करन 
दग्गेन,: (मकि कत्र कृष्न छमांवर खाकर्षम्‌ € विकर्षण) 
मगरूदणत (मरे कृण रष्व गृटि (थिष शोत्म कष ज्रि 
लाजिन। न्द्छत्‌ घटत खिविग। खोमिनम। 

काशे षठेन निदा चतरत छ्व्र (किटनन। कश्‌ 
<कथोत्‌ नेव डिनि वलिटलम, “खाबरक मभुटएतर जलाम्‌ 
(व्ोड यावन खमन? .चण्नि छ ए्ट्निद (वलोम 
निगाणिट्रलन, सृदयीव खःटना€ यशे शिनि; अचेत किन 
(धात शरुत ब्राद्िव्र अउक्तक्ाःत मगृ्ख्व नाम (वद्र 
खमूट्वन एनुन 1 

खाभि डथयनि बाख्नाण्व मरङ्डि बोभाव मग्र ङ)नोठेनोम। 

कान ष्ठन वनिन, “कि दौ) रेवां वु योतोनै, 
खनक रेड ट्व । (यच्ड (खड कषे! नाड) नौ 
कृटड ठत, नाथ खनक तरु वर शर्क नष्व ।* 

खरोभि वलिलाम, “ानैनोत्र कथ शट्न खांमात्रः <थूमि 
यड ठेष्छर) कुद | 

कान षिन दलिटनन, “वम्‌, छोर एनून 1” 

ऊीङात्‌ मकर (नावाक नत्रिवोव्र वदत्‌ भिय यदश 
भदिलान्। नेवोत मक्र (कर्ठे याठे्व न], (कंवल खाम्‌ 
एखन । मम मत॒क्षःम शत्र सेवत दछ्राभे कव्विदटं 
नातिलाभ्‌। सनेव महक शत॒ नतब्रिमए१ वाम नध्र 
ङ्षेन; कि मक्र खोला ल्य रेल न। काश नयक 


मोजिक] १५ 


कोव्रम क्ष्म) कनिन्‌, छनि वलिटनन, “बोदला (क्न 
श्वमोखन नाङडे। माकर कतिश षएठेकट्न षेठे। (नाशव् 
18} लङेनाम । 

वाङ छथन रिक षक ज्व गौत अक्ृकातत 
माद्याद्म्‌ याेनाफिक्‌ अकङ्ामागेद्रतत्र बर्नण्ट्न नी रिप 
नो्िनाम। जाक (मक्थ। मन नेषन नाट क़ ज्वं 
ट? ! (मठे खनत न्धौव्ड) नय॒ रक्लाव॒ कुषे । एट्क्किक्‌ 
डोव अक्रकाव ! किषटूकम एनिवाव्र शेद्‌ षठ ठन तूटत (८कचि- 
नाम कषे नोन रष्व म कि बहिग्राछठ ; (यन वलगूटद 
वकफ़। छेष्न बान) सलि । याएेला।किक्‌ मरङ)गागैद्तवु 
जरु जलाम्‌ (यकि खान) खलिटडह किष वृङधिलाग ना | 
यके (क्क्‌, खाना र्बद्िस। खजुमत्र कृटठेलाम। मरांशादु 
ठे किटमव गक र्ङट्ट नाभिन--यक्फान। कभूकबूदयम्‌ 
गक, तृदिला छेनप्तर खगरानक वृष्टि एडे7ङः्,--५ उत॒ 
गैकः। 

व्क] शेश एनिववाव्र शव॒ त्ख कममःके गोशूटब € 
द्‌ ताट्यव दत] रके नोगिल। (मरे मव शनाथदवरव्‌ छेनेस 
कंवक्म ऊंलोप शाड्ना छट, अदमक्वाव्र न रुवकाकेमु] 
(भेन, लोकात छो] शव्रिषा एलिड लाजिनानि। शने 
मागन एनिघ्ड नोभिनांभ खाोट्न जडे देष्ठन रे 
नात्रिन । 4 जलग 4 टठेष्लन < किट्मत खाटन) ? (यिः 
नाम सूनट्थ (यन मादे पाठे कत्रिवरा ॐोरम यार्न खेनिद्डषट ¦ 


१२ मो तिकं 


जि जे ज भ ज. ज कना त च ज 0 क कण 0 क भ ८१ 0 जा त न न म "+ 


वानोत किष वदधिलांम न), ख्व) काट निग्र (कथिन'न.-- 
मागन यके जख वटर नोर वरटि, ठर वतठे ७ धीतु 
रषे खा श्न छेगि्जाष । कानेन जाद मर शिथ- 
भट्त्‌ एनिःउ ना निटनन, खांभि अना मल्लैः म) ववाटन 
ग रट नाशत्र € रदं ख्डिठेम। ऊरोत जिष्टटन शिष्टटन 
एनिःड नानिनोम। मागन (वि कष्ट विष्ट रऊक्रन। 
(फवम)क् शोत भर ८कवकम्र वु वष नेष. किध ममे 
भत्िश भिसो; नो कदा नैं) नाढे, किं यन- 
नान ममख्ढे रिकं खााष्ठ। मगखढे (यन नाशथवर्डेमू) 
निमा, उावनवर॒वुदधिलामर शैषटदलि मगरख कमुल्‌ र्ठेम्‌। 
भिम्‌1टष् | 

नाथन € भीत्‌ ठेनव न्म्‌ एनिटडं लोनिलोम। सकं 
क छ)गूभाोग नाशट्वुत्र एष्ट तु वष नट ८म (य कं 
नौर वनिष्डनात्रिन); नौ उाकाठ्ट्ड खग उकेद्ड नागिन। 
> मव्‌ नःढईत ख्व (यकि यौ छ (कः सान । इगु 
टे शीटर्खत्‌ छखिष्त ठ्ठेट्ड यनि यके किं्डकिमक्ान्‌ 
क) ऊनछङ तांछ्वि क्ठेद। खामिट्व। धक्‌ यक्ख7नन 
“का क श्वर, (यन ठं कविश्र निलिष्ड जामि! । 
(कश 8 नश चड दिन्ची (घ्य सकृवाव्र न रृत्रकाटठेम्‌] (शट्न 
.थटक्वाद्त नाजानाटकभ एलिख्। याङेव। (कोशो नोक 
माव्रियर कटे, नौाथत्र ङे याब कषे नोशटत॒ याहेट्छ 
ना जिलाम, मोदथटन थक नस्तत्र । (महे (नारङ््ि खाटनांग्र 


निमि कवि कि 





| मोब्िक्‌] १४ 


८ *---=~ ५ 1 ५ ~~ ~ ~= ~~ ~ 4 न च क ज + ~ + = ~~~ ~ 


दपरिनाभ शात छेनैत॒ वु वरु नोशतर॒ वूलिगर) ठ्छगरादट-- 
ए विगट्रकके थक & अको कोट्न। कान नारो | 

एङे्ण। गन छाव एनिड नागिनलाम । नमत उन) 
रुके्ड व व बंष्ट मनवभ] याठे्ड नानिलः नोत्‌ 
ना वु व शष्वृत्र। कं कष्टे शश्वटवरतर प्रावहन्‌ 
शुक] शक) म) (अलिस] कि मव मिम्‌) तश्िग्ोष्; 
याम मर्वाक शिम रदे] याठेल; यांगादरमत॒ ८णयिग) 
णा श्नि ख्व एकश गण्ड लांभिन; किध र]रत्र) 
खाक) बागोद्पत ` पने, क्ष) मात्र वाय बानवु 
खाक ठेर नैष्वि। (कङ्‌ (कक्‌ कं वके, नाष 
वाुषेय्‌। पिम्‌ योगमाफ्द (नोक जोष्छाण्नव्र टेनत 
स्न कर्यिम्‌। खानाफव नैतौक्र) कत्रि नाशिन। खोनोदफतर 
नाट्गुत्‌ ख्लाग शक) भक) शद; (म मव %द्र 
-4टकेवद्त्‌ नलद नारमिग्रा गगा, जाङात्‌ [दत 
रुलात राव्‌ एक्‌ स्रलिद्डदष्ट, ८म मन छखोवमे खनत खेन 
एम; निट निंव शट विदा डाकोद। विख्याम कद्वद । 
काथो वु वु षटरष्ौ मष्ट नाथद्तत ठेशत्र चि शौव शीष 
निग्र सित्रिदख्दष्ट-- (म्वा छोर]त) धकं क्छ) मोक्र८सत्‌ भर 
काश) व्‌] ब्रोक्रूटम काक्र) वमिग्र ब्रहिगराटछ्--८यन अक 
क्षि वारी शो्ौ | (कोशा व) अङ्काय कष्छन न] 
कवि नैन वाटे) गश नोख््डि्ट; ङाङ्]त्‌ (योट्नत्‌ 
मदक्ष नए टगर भाकूम अटक्टभं एकिट्ड शोत । (काथो€ व्‌] 


१8 मोदक] 


गत्‌ छय॒कत खाक नाम छाठा्मत्‌ न्‌। व| श्नि खाल. 
किमू वभि व्ररिगा7ष ; यक कपि न (यन सक्त यक्ष्टि 





खदकरनम्‌ 
मगन मान | याोमनाटम किटृठकिमाकाव खाकृदिविरिषट 
खआटलाके-माषठ चूरन्सि ववष्टे; छाराद्रक्त्र 9] देष 
८क वने याल] वाशित कषेः । 


ङे ममम अमद एोजोटनव म गाषर}7खुत -4क गनै 


म्री तुकं] १९ 


----~--~~-- ~ --~-~ ~~: +~ -ल =^ = र~ ~ च ० न ~ = ~ ~ 


खोमिग्र छशष र्टेनाम्‌। नोत खाद थक्ष्नि नृडन एथ, 
गोमन वपव विद श्वस्मथोंश्ु खषठेलिक), एर, मन्तित्रि € 
शौ्मव (खगो (पसिषड नञेनोम। ५ छ उगवाःनव्र रुष्टिनय; 
मभृद्यतव सड उनाय माद्वत निरि कवावनौ (मरम) 
विद्धिड रुढरेलांभ। एांतिगिटक व वु नौव नैष तरश, 
ङ्डिारोतर मोदक मोघ्व वक शरत्रोङन श्वम चत्वा 
पाठम) तरमा । जनेक्नै मरुख मरुख खए़े।लिक्‌। (फयट् 
भाठेलाम। (कोशा व] वाक्लोत॒ वश्गाष्ठ, एवित 
(7 [का7नव्‌ (जनो; (काशथ)€ अन्किटटत अड त्रैरु तरमा; 
(काथा€ व। वरु व (कन्न, वन्त शङ़डि खग्गेष्टेखटव वृद्ध 
यष्ट । सक्‌ यक खोघ्न छश (मंड्याद्नत्‌ (थनौ वक्णुत 
गेयारु एलिष्र] निम्राषट। श्र (मोषदन्यनोत्‌ मोद रिग जुगेर 
तु] खनथ वर्ग | 

< (कथांय॒ खामिलाोम? कान ेनःकं किक्छाम) कत्र 
(शलभ, किदे छयनि न्ख वक्रम्‌] वुद्धि नो्निनर 
कि कर्व; काान्ष्ठेनव वक शरविख) कणे काक) श्निांम: 
काश द्ेन जांभरोट्कं ठेजानर) कदिग छाव माकर खात्‌] 
भशुमव्र ङषढेहड वनिटनन । ववरमथथश्च ननेतौव खनव नर्म 
८मठ़े शै द्वकशिर शराएव एष्ाषटि (फथ। याड । नार्‌) 
(एव्‌ छेषड। शग धारम कुक ठठेटव । नियट्तत्र छेनैदिानं 
रुषे देष्डरलन योट्ना्कव॒ भर पादे पे किमू) कि (यन 
प्रलिद्डष्िननि। वुदिलाम ठेठ] सक्षि साग्रम्‌ । (मड 


१४ मो तुिके। 


गक्वमिं यतत्र छेन्न 9 रटे गदश णुके टेर 
भैयी वर व नांथटवत कूण श्षटिकाडेगु। वर्वर ञुडे्डङिनि 8 
छोशोव मक्र धुम € छख शैवल (वदभ निर्न छठेट्रछ्नि) 
ख।ट्ध्रयतिति रुन (कोानथकाव ांश्न वाशति श्षेटडशिलि 
न), किङ (मरे मकल र्ेडश शाङ्निःस4 उठे कड) 
अङि डोयग छेव्न) वांछित ङ्गिनि; छ!ठज्ठे ए] विकि 
खाटनाकि र्ेदडशिनि। याशरेम्रशिबित्र निक्ष्ेवद्धौ ऊनताोभि 
(कवन शरक्षौङ्ड वादष्णेव मड (तथाठेडछ्िनि। 

द्वरमथोश्च ननतौत्‌ ककन ८मोषएनौय वन्त॒ कत॒म 
के दात्र दुक्लिाम । याघ्रमृजिदिदर अवल खध्रत<नादड € दा ड्‌- 
निश्सघ््व ममर ननेतरौ श्राति 8 यटकवादव नष्टे रकग त्रिसाहष्। 
कि 4 ध८्कोन्‌ (कम? कानेन निय) खामान्र वाकृनड। 
वृद्धद्ढ नाव्रिनन, ङ्मि हके 4कथड नाशु नदष 
4 के] (फ़डग्राटलन्‌ छेत लियिटलन, “मूला किम्‌" । 

ध] किम्‌] अनव छवि पिम्‌ (यन कफे) रेका षटषठिमु 
(भेन । नाम (थिम) एभूकाठेया देरिनलाम। यठे (महे 
ङेडिकाम- श्रमिक ग्ााएेनानषिम्‌ ननौ | (श्व), श्चिनि शङ्ख 
शान जैखिङ़मिकभन्‌ ८य ननेदौत्र यडन वजेश्रवा € शनन 
भेत क्रटमत्‌ कथ्‌। 4 कविम्‌] वमशम। कृति जिमष्टन। 
ठेयांन अमममारमौ गा!एना।नररेख नम्‌ ताम कत्िदरडन-- 
साराटफत्र मक्र अौक वौवनरूककव्णं कडवा त्‌ गुष्कं कत्रियाटष्टन । 

डङ्मिकश्ण, अध्रा<्नाढ, वार्वारि चङ्डि शृथिवोत्र अछा 


मो भविक] १५ 


छवखिड अमौम गैक्िति यटग्राटने नेशिवौत्र ठेनव्रिशिड (मम 
मकल करमन कृनै)ङविर रठड | जाऊ (यथोटन मरहम 
वरश्स्दष्े, मरुस वर्मन शटवर उग्ड (मय)ट्न मष्रोमभरूख रितरा 
कव्व; योङ ८यथौटन मश मानेतर बर्गर महस वमन नोद्‌ 
(मयोटन मरणम कोजम्‌) छेशिट्व। सढेक्ग निग॒ङठ़े एठः । 
4ककोट्न दङ्गिनग नैर्ववज्ट्ब्यनो, तांकश्रूखन।, अाख्िकात 
माव) मक्रङमि, यावर," (वनुष्टिष्ान, थत्‌ € (नदि मक्तद्मि 
म॒मखके मभूखख्टन निमरध्र शिनि। जयन के मकंन सोगरनाग 
कठि मङ्‌ामागेत्र विष्मान छिलि। जवात्‌ खाङिकात्र मक्रिगे- 
खो, बाोखानां खव, मोनकिङ. षन्‌, उ वखवदर्व्‌ मशि खान, 
बोन्तोभोन, निटकोवत्‌ द्ठोगशरू्, समाय), कराड). (मलिविम्‌, 
(व) गिं, खिनिनीोङेन, निरेभिनि, खून अङि (फमल 
कम्रं युक छनि; ययन उोङ)व्र कटकं कक्‌ जरम मगरूण- 
खन रविम निम्र । धक्‌ म्रााहेनाोन्‌णिम्‌ (कमे 4२ यादश्चमू- 
[गि48 सक्‌ ममम कंनवर ठेवा श्नि, काोनकटम 
मभूखंलटल निम्र उट गट । 

शग कषक) शद्ग एातिप्िटकं धुत्रिमर) रिवम < 
शोष्ठोन नभेतौव्र (गोड € (मोन्त्ा (पथिट्ड नाभिना । ठे 
मभसु कौप ठेिन; ऊटनव डिवि पिम्‌) हीणत्‌ करो ञ्‌) 
(वान) खानक मख ननतौ (यन बृखवाक्िदं छा।काट्म 
भूष्यव्र भ (फयोरेषड नांगिल। यथन सखरा्ल किब्रिग 
खाजिनौभर उथन (छाव स्क खत (वभौ (पत्री नारे । 


पेज शुव्व्र्छत 
« (कशोर खाजिलोग ¶ 
नेविनि २ण्छमे (कक्ब्रातरौ। शूर्क्वं दखनोव नेदिश्वधमत्‌ 
एकन खास अटनक्‌ (वन) नवार चुमाठेग) छ्लिम; चुम यथन 
ाज्रिल जयन (वन यनराक्फे।। ऊर टयन डनम कुष 
ऊट्लव॒ उन्न) मिम्‌) विम्भ ब्रेल (वदे षूिःडशनि। भार 
नााकिक्‌ मरामागद्दव्र माष्टशनि अक्रार मुखत मोहृष्टत ८ 
जटनैक्रकृड वृशृप्राकुडत। 4कं के) गोष्ट च व ८रट्क्डा 
नलिन < एन्‌, खश छोडात्र घाकृटि शिक मरह मड । क्‌ 
खाडौगर माष गट्नव रु फी, र]ठादणव मौवौद्‌ समौ मक्ि। 
व वषु नान ऊछाडोय ठव € (धकम्‌ (विलय । (श्राकम्‌- 
नि नानव णुके नोरथ, मीतरौव्र च खष्छ (य छटनत मटक ऊट्‌) 
कवा मिनिम निग्र, षषे कतिया वृद्धिद्डं नोव साय॒न। 





द्षव मोन 
अटनकंद्रकम वु वु मान वके कांड वु1ए जलव्र 


मु शैव्िक्‌। १३ 


ख्व (वणार (पयिन)मर। <कवक्म आष (थिनाम 
टाक} कवन ॐ), अथ छर) व] ठगेव । ग} का ग॒] नगक 
कतकम्‌ (धौत कृक्श्व्न्‌ं मष (पचिलोम्र, त्पट्वी गनद कुषे । 
उदव्रासान भो€ ट्फट्वी एक्विम कु, दक कट्कं खट्व व 
पूवि] (वष्ाकेट्डष्ट । ठेठ} वाङ (पवृ माछ, (खाति, 
ताम्‌.माष्ट, भून्‌ मष्ट शषुडि कंड्तक्म आष्के न] (कविनाम | 





शका वा]< 


ङे ममस जटनत॒ डद खा व्‌ौव्र श) ङ्]टडब् अगो (पंशट्ड 
गोठेनाभ। यां नीशत (पडगटनत नगे मिम] लोङांख 
एनि्ड नांभिन। वृदिलाम कानांति प्रौगेश्र्च व) (कण. 


८० मोविक। 


==-----*--- ----~ --- ~ -~----~--------*~--~~---~----------~ --- --~ ---~-- ~~ -~- ~~~ ~ ~~--~---~--~----- ~~~ ~ ~~ ~~ ---- ~~ ~~ ~~~ ~ ~~ ~ --~ 


टत्‌ निके ऊार्‌]क खामिग]ष्ट। लोर छित रटे) 


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मो#तिक्‌) ८.५ 


, धूम्र खोक्रिन टकवाट्व नैतव्ररिनि (्वना खात ममबर। 
षोट्फत छेतर जत्र) (ण्यि कारां कटनवर छेत 





ूटनष्े ग्ट 
सामिट््दष्ट, कदि षएक्रिटक (वात्र उक्ृकात-याशोट्कं वटनं 
परणोएख््र खक्ृकात्र। (धात्र खक्ृकात्र ब्रायिटछ (यथन मांभूटन 
# 1 


४२ मो तिक्‌। 


माङर्वत्र मुय (फा यान], 45 (मरेवक्भ्रे खक्ृक्ात्‌ ; अथष 
रिट्नब्र (वना ! «4 किर्केन? (कांथाम जामिलोमर उद्व कि 
यन व्राचि? न), “केम छ धरि (ए्रिम्र) वामिनाम। दैक, 
मथा छेनवर ड कड़ा € उत] (पथ] याडेद्टष्ट न} वलिद् 
किं ाजिट्वला€ समन धात विचूट्फ़े खक्रकान मषटवरए्‌ 
(णय) साग न । 





८ एति राष्ट 


मन ममग् योमाटक्‌ मग्न केतम्‌] (कं वलित 
«थक (य्‌, टर्म त्‌ ?" 

दुदधिलाम कांग ट्ठेन निद्रमा कथ्‌ कशिट्डाष्ठन। ऊषा 
किष्डाम। कब्रिमाम, ^ (कोशाम्र जाजिनाम, कानेन 1" 


मो तिक। 19. 


, कान टेन वलिट्रनन, “बाड़ डनाग॒।” 
जामि वलिना, "बाोषित्र जलाम्‌, खथ ऊाक)लं ऊट्लनतु 
ठेनैत्र छम्‌टृष्ट !” 
कानेन वनिटलन्‌, “वख र्ट्वन न), मवे वृद्ध 
शुव्रूहवन, जटकमाव्र। चक्रे अथोटन ीखोन, खाभि खान 
निम खोज ।” 
मन खक्रकात (य, कन ेनदरक (मेढे (पथिट् 
गूढेन >| देनव नोन ङ।काठेम्‌) (पखिनलाम्र अक) 
अछि क्लम्‌ खन्न जाटन) खनक दलक्रे <करे। (नरानाकत्‌ 
शीर्खव अशा पिश खोमिट्डा्ट; यामिट्ड खामिटड मोद्ध नैटथठे 
(म) (गस्‌ रषे निट । (ययाटन तरोठसाङ्नि म्र (मयाोटन 
्षोव॒ खक्रकात; रेगट्वरे छषू (मके क्रो खोन)-- नौः 
(माषे नोभिदरुक्िनि ना। 
के ममम कानेन खान) नटेश्र। खोमिटनन ; देखन 
भ्नकषिक्‌ ोट्नोग (एं इन्‌मोठेम्‌] (तरैल। (फयिलाम 
थक] नोरोट्र्तर नीदमे (नाणनिम्‌ शिवि रुडेया डामर । 
4) 4कण़। ठम, ए) तिगिटके नै।र्‌]छव देष (फडयन : ठत 
भाकृणि (भरलाकत, छात्‌ वाम नमू दे भराठेन। दुक 
(दन कद्वत) (गाल)कोत्र नीर्‌)ट्छ्व (ख्याल खटनक दे 
पसा, व्याग षग्रमर कहे ङ्ठेट्व ; किद्ध (माजाखाद्व अर्श 
पढे न तिम्‌ णिक शग्रूटछत्‌ अ केनः (कुलि) 
| कयोटन भिभिग्रादष््‌ ; (कवन आथा छेत (ष्टो कडि 


8 मोशीब्विक) 
कवर; धे ुक्व्र वाड बाटल) व] वांग्रू यटनदमेव नैश 
ात्र॒ (कानयोटन नांडे। क्ट। कुमिन्‌ छेकरेम्‌) ब्रायिदलं 
(सव्राभै (पथांग नीशव खट्व कुडि ख्टनकष। 
८मटेक्ग्‌ | 

मादनाोभिषठत्र (विग्र वुदधिनोम वङिश्िडि मभ्रूदख त्‌ ७ डे 
र्घ्मत्‌ खंटनव्र ठेनदिङाभे मबरड्न ; अर्थी< एतत मक्र मभू्यत 
(कान कोरनागर (यानै खाद्‌ । .नोङट््वबि €नाट्मटे मूख; 
ऊःनत ज्व नार] (कान स)मृनोंम निन्गुढे (कान 
नर्द खाट । । 

कान ठेनट्क किंखाम। कविनाम, “4 (काशथोग्र खामिनोग, 
कानेन ? 

कानेन वनिद्नन, “यके यो्रैम्रनितित्र भटा, किष 
धवन <] निट्व (शरद । ङ्गिकट्न्णेत मकम नङ्‌] 
(प ऽय)टनव्र भटा कष्ठे कठेन रखता छात्र मथा मिम 
मगरू्यत्र जन च्व (एकं छाङाष्ड खरे बादतेमरजित्रि 
नि्दयाय॒। खोशनि यथन ूगरष्छिट्निन, (महे ममम (नाणिलम्‌ 
छःलत्र विनं कृषे नौ करे) 9 किट चतर छिख्टव्र (टक । 
८नाण्िनिटमतर यक्षे खाम्‌ द्‌] दन्णव्र षषे, (मलेखंक ठे 
ऊ) गृ9171 (व निदयशि ; सयान कतव छम (नहे, (एव 
खग (नहे, मर्‌ा-छक्रतत्र छग नाङे। अमन सुन्फव वन्त 
छशष खाव्र॒ (काशा (काशुटृष्टन टफ्मोत्‌ १ 

जामि वनिनाम, “क जां, गनि कत खांट्धरग्र 


मों 9 ति क्‌ | ^+ 4 


~-----~--~---~“~-~--------~----~---~--~-~----~-~ 


भितित्र छिद्र एटट्काष्टन ! सोष्छ्, छेगदतर (य सकए] सन्णष्ट 
ग (पय्‌ (नैलौभ, (मरे कि ९ 

कान टेन वनिटनन, ५य छेनेवरत न्ख पिटग्रे ट छत 
कांत॒र्वृभ, छश, शोडनिसव खादत दौ*त॒ ङ्‌)" 

खमि जिख्छाम। केवलां, “याननाव खटकम (नोषएिनम्‌ कि 
गद्य क्र र्द्म शेन, ८य, वन्पटत्‌ टम खोखय॒ निट कृ"ट्न) ? 

कानेन वनिद्लन, ' भ्न. ङ नश; करु) 
यन कंयलोत॒ प्रत्रकाव॒ रुद्र; छ े<शो्न कंनु 
“य कंग॒लाव्‌ अट्माङंन ङ्य) (वथ र्मक्ोटनन। «ढ़ कत्‌ 
ठ्नाग्र 4कं कत्र कगनाव्‌ नि ख।ष् ; ठेर) निे-कामनत्‌ 
छट ८कोन्‌ खर्ट (ष्टा नघर। सरे कयन) शूष ययन 
उड ठेश्नीौपन कंवर र्ट्व । कमूलांव (वम्‌ यै चठ फिट 
द ङ्त र्व; वाश्ट्िवरिव (नाकं छाव, खाश्मभ्रित्रिव छित 
र (र्षम छग । अयेन कट्युकं क़] धब कयन) (छान 
र्व, खाननात्‌] यत्‌ मदथ] रेष] कतल नारृट्र्व [डउच्टवरत् 
णरविण्िकं चुत चुट्तर (पटय ाम्‌टड नोट्रतन ।” 

(न्‌ € कन्‌दमनूटकं छकिष न्ङेभ्र। छिन्न नीशातुव्र 
एनत जिगर छेडिनोम । नाशाःदव्र (१७गाटन॥ नोर ए] रानु 
मर एनिवांत्र क्षे) व्रा) ख किम दौकिश्च एोतिग्ट्किं घब) 
भिाटष्ट । «धे ब्रा श्त्या चू्रिमा धूत्रिम। येन अटनक 
ठत नैर्र देषि्ड शाबर याोग। एोरिपिटक वु वण् 
ग थदटब्वर॒ ७ शष्थि ब्ररिम्राटष्ट । नै शवशनित्र छेगत्ङिंश 





------~--~-~---~ ~~~ --------~-*~-- ~ --~--- ~~ -~--~~---~ ~ ---- ~. 


८.४५ मोँभ॑बिक। 


नाटमटनन्र गड नद्िक्ात्र, एक्षटट्क, दुकृद्धट्क; दुङ्धिनाम् 
रेढश् खा श्टनव मरन्दं खामिग्। नो शत्र्निव्र भेक्रनै खद 
शुठेगाट् । त्राखात छेनत छम धुन); खत श्छ षव 
ण॑तिमाः० नषिम बरिगो्ट। ये (नोनाकौव नेथ वत्रिथ 
खात] अट्नक ठक गीर देशि लांजिनोम। तो) 
पकमन्भुठे याक ककड नाभिल। लहेयएन मन त्रक्मर 
शाटसाठत शांत (यिद नाेलाम ; कद्ध वयन 26; 
र्ठेर्‌] कशिन र्रेश। भिगोह । लक क खाट्न अटन्‌ कठेन 
(यनम शक्टकत कर्ने नौ] दर्म | खानक देर 
कठि) वृक (मोमोश्ित्रि एक्‌ (थिद्रड नारेनोम। टक 
उन्नाय भेककं ष्दानाठेम्‌ (र्ब कवरिष्डडे (गोगोषशिशितनि 
ठे शान)ठेल । (नय छथन ए कृषे) खोकर) लछम) जोत 
खर्वटः कामुक (मव मधू (ऊन कड्लि। लाकर 
शतिर गथ (यि) न) एिभिग्र। खोट्व्रा छेक छेरिट्ड नागिलांम 
भेर्त भददत कोष्टोकाष्टि खमिन (करिनम नीरोट्र्व 
कान खनक नीँशौ वाम) कच्चि] बरङ्श्राष्ट। मोक 
(एयम्‌) छांराव्‌। र्ेष्िा (भन मक्र वन्फुक खान नाष 
वलिमू। (नख. ुव ष्य कच्विट्ड नागिन; उव्‌ क्रमक क्ष 
षमा (नख (षट कतरिषर। थकहि। कोड नादौ वश्च कव्रिल। 
काशक घुने शूत्र यंभव) नौ नोमिग्र चाभिनोम। 

भतिन (नांग्िलम्‌ श्रूनतरौग्र ऊटमत्र छ्िव्र व मोरिगर 
खादना कक्‌ मरमाश्रप्तत मा गिरा षटि लाभिल। 


का] नैद्वट्ष्छं 


खोहेल71 शक्‌ गङ्‌ मोभैदततर जर्नङ्टल 

८नाष्रिनम्‌ लयन साहेनाछिक्‌ अकंमोगततर मरोद्माि 
सोमिगरोषठ । 

राव) याङाव्र छोल शषा निग्र ान्‌ण्‌ (मद 
नाम छनिम्रा्ट। दरा वकि शैवल छेष ऊटनतर॒ (साड : 
मभृछ्त भोल सलवान शद्रे ठेर मन्शूर्भंविखिन्न। 
मूख क़ि निक्षीदिड नथ शरि जने गोन्‌र शरम 
एोत्िण्ट्कि चुतं भिग्ोष्ट। (फाति छेनैमोशैव रटे 
बोषठेलांणिक्‌ मङ्‌माशट्वत्र चकि निक्षोतिर भेथ शिग्र) ठेदव्र 
मर मांगटदतर ग्मिषिङ्वाहरकन खवर श्रिोष्ठ। वथोनङ्डेट्ड 
ठाव एङि विङिन्नि गोशा णएठेतिःक भिग्रा् ; सकष नत्र 
< खागरोतनााद्त्र ठेनैकृन भिय (मेस रेया ; खातर यक्षि 
(साछवीतर) मक्के तिकि दब्रिग्‌। खाकिकाव गश्िमि कल 
राग शूनता चूतिस्रं ग्रानष्िनिम्‌ प्ौनशरूक्षेतव भोम मिम 
(मरिटक) ठेनेमानटतव्र बटक्ष यद्वने कत्व | 

ठे गोनृक. मत्र (सौरा त अछि ४७ । बोएेना]किकं 
मरामोवव' डरे (नानांकात्‌ भेथ चुत खामिघ्ड उशाद 
शग छिनवर्मव्र लै । धके (सोर मधावडोौ छोग्रगोषठोट्वं 
खातुश्ोटम माशरवर वल। सखानाफिक मठामोरद्वरत्र भोव- 
यान अरे कलत्रोभि चटका णव्र; (कोनयेकात्र (षे व) 





ण्ण मोँभैतिक्‌) 


५ न ण 0 ण णा ण भ भ कन णे कि 


एकन] नाड । खोेना) रिकं अङ} मोनदतत्र देनैव मर्कवम्‌के 
व व (षे देरिष्डटष्ट । ममच्छ गरक्माोनेव खट्ग) 
ख।एेनाोक्रिक मकोमोभेत्र (य मववा्नैक्त डम्‌ ७ कश} मकट्लढे 
लटन ; कद्ध «ठे उगत छेठोन अरोमानेटतत मधावद्धौ 
खोतुभोएम) मानैव मन्शरर्नं छित॒। श्रूकुब व) डण्त खटनव 
म रेका खनलताभि श]रू ७ निक । 

(नोणिनम्‌ सथन सठे खासनम्‌ मोभरट्वव्र कष्ट 
खाभिग7ष्। खावृशाए्मोौव सन (एय नै न; भरन कम्‌ 
(सन कष्ट मख्वरु कर्ने नो) वरङ्ग । यछ ताटजाव 
ऊनौय धाम, शोषनीलात छक्र छोल, नां), नान) कौत 
नल], खन्‌) कुन, शक रुन, यवर खि, गात ए, ऊोरुंख- 
खोकर] कठ, छ, ऊख्नौ धम, खाभाष्1, टमेवोलक्ल खांमिमू। 
यान लम छठे । ऊमा वौर्शिम्‌। छोरौत्‌) भनि करिन 
रठेगरोटष्ठ ८य छौ] शन्न कर्म| यार्ड मांशातर ऊोरृ}खत 
गङिष्ड कृलांग॒ ना । खातो कथि ग्णौ)निम, ठेर अर्थ 
खाज] । (नाषिनम्‌ के खनव छन) णि एलिउ नाशिनन । 

विया नखि (माति मौटछद ठेङोत थकष्रिजछि सन्तत 
काद्र निद्कमै कतिगोृषन। क्षि खलनूर्नं नशाप्ये लमा 
छाव देनैव ककश्लि (टं कोने व] चाम्र एकत) 
फलिग) छोत्रगत्र बाक्रूल गिम्र। कनदिट्क बूत्राठे्न गोदजय 
ममङ ऊनक्‌ भूत्िटरड थाकिट्व। (षर कांनङकशनि७ चूब्रिद्ड 
शोकिव, शवरि धुत्रिःड छ)ङोव्रा कटनव्र मोदयाटन रिंग 


+ त 


मोशत्िक। \* > 


्ररारेट्व; कदम “के मोदूबाटनवर कंटनव॒ भखित (वने शुतद् 
मांग । (महेश बेनाकिक गररमागनेटव्रव एत्िणिटिकटे 
शान्‌रू क्षेम घुरि, छठे आदथाद्नत खादुशोटमा मोश्रव 
टकवांट्त्‌ निक; य ताजाव्र खतरा) ङेशौःन मिग 
कं) कटेगा्। ठेक)त्‌ मश क्कश्लि भोषठ € लष्ड। (तम 
वणि वरिमा, कुकश्नि अक्र खनक (पमे रषे चयाद> 
खांमिगर। ऊख शटेगराष्ट । (पयिनांम छेडत जाटमव्िकाव `दकि 
नेर्द्व € पछि ख्मव्रिकांतव्र "खख गर्व्वछ रेड वु 
वृ शौ ष्ट्व॒ ® छि "मिभिमिगि, € “खा मांङन्‌' नतौ वर्ग दयान 
खांभिय ऊब) उषेगरौष्ठ। क्डयख्प्र कारकं मखल, व 
वु छक, एय} व, लानान), कट्वर मिं, उान ड़ यथान 
ख।मिग। खण वरिग्रष्ठ। (मांव्रि मोटक्व वनन, कान्द 
कमव कंगूल्लग भतिन रङ्रेट्व । नल, लोन, मवरं बात 
वष्ट व खटनक शृनख कृष्ठम्‌ वशि । 

नैतपिनि २०८८१ (ककम्रातो। खात्शटम) मानैव शवान 
कतिम। लाराखं शनव्राग्र खाना)किकं अरमानदतत्‌ छलं 
नैत छ)मिग्‌ छेडिन। खाल ठटेट्ड ठिक ठेनिभे जिन शतिम्‌। 
बर्णी९्‌ ऽरेके ओोफछक नैवा सोर क्मोशे एशि एटि 
यषटशगणख्िट् षण्ड नोशिन । वृदिलाम कानेन निट) 
्टेवांत्र (कन. ठर थत्रि ख्द्धेनिग्रव पिटक योडे्वन। 

ङे निग र्ट्निव्र भटा विस मरन किष ध घा 
नाङे। खाोएेनाकिक भङोमाोनटत्त एशि खश्गे कत॒क्मर 





& मो बिक] 


ण त ज न 0-9-99 





निख्छन वनिन एटन ; जांसाल व छित कमोषि९ (मथि्छ 
गोम] यांग्र। (महे (नोषिनिम खे कमुप्रिन छल छेभत 
छांभिम। एलिन । कानेन निद्रमाव्र मक्र ककोषटिर्‌ (कय 
रके ; (कवन थक क्न बदु घुम ाक्िम्‌। (गट्न 
ऊशोत अन्रीटनद ककत दवनि काग खा्मि। छाव (मे 
ककम सदन वाङ्न छनिष्ा खाभाव्रड यामे करिमरा ठेर । 
वुकिाम कांश ेन ऊौवदन वरु थत्र खोच।ंड नोट्गरोट्टन, 
(महे यधांड € (महे (गक लयन लिड गाट्वन नां । 
ठऊकात॒ ककण स्रीन-वनि माद्ताड कोरृ]कत॒ घटत घटत्‌ 
एशथत वान खोकाेम। बाष्टङि निष्ट} शङेड। 

कत्रिनि (नांषठिनम्‌ कलव ठेनव खामिशा एलिमर्‌; 
निष्टान के छिमि मावििवातर (नोक खोटपत्र निष्ट 
ङा) कवि लोगिन । उरात्र ८नाषटिनम्‌कं 4कष़े। अङक 
ञमि डवि उब्रश्रून रष्ादेगा जिषटट्न शिष््टन खामिद्ड 
नाभिन। अटनकक्र छऊशा्तत्र (ऊागाडठेम्‌ा (नांणिनम्‌ (मद्व 
ऊट्नवर ङ्त एव मात्रिल। 

खाटनाकिक अरामांनद्वव टे (८मङ़े सोमृन।--(यथाद्न 
क]]न ठन (नरम्‌ 8२,००० काखात्र शुषे एष (रुलिग्र) € ऊंट्नत्‌ 
उल नान नांे। छात्रनव्र काशन नरकात्‌ आट्व्र। (वन 
पडि ८रुलिय] अर्णी९्‌ २०,४४० दुष परि (कलिगरांड उलटमम 
ग्णेर्म कब्रिट्ड नोदव्रन नोे। (न।षिलम्‌ “़ेवाव् वक्‌ नि 
एविषद्ड नागिन । (फथिटड (मविटड कोशल कलव 8२,००० 


माजिक] 


छठे. निघ्न रिग एनिउ लोगिन ; एांविकिट्क सपौध शर्दव्डत्‌ 
व्यगो एलिगाट ; रे जकन नैर्‌} खङि ष, (कर कठ 
एके भादटेल, छखिनि मरन रेक अर्थी९्‌ चाव॒ टे भोठ़ेन 
व} छिनि भारेल विन छव उलन नींश्ष युटट्व) 
एातिपिट्कं (धात्‌ कृर्वन्‌ गद््वभियेव॒ | श्मिलम्‌ व] सराञिम्‌ 
व] तकि नैक्वट्ट्त (षट ङे मकन नौर्‌] € नैर्दव्मियद्‌ 
(कोन जरट्रग (ष्टोष़े नार्‌ | 

ठे मकल गक्वजदखगोद बोदयथांन पिमा खङ्ि मोदकान 
छोाराक षएनिड लाजिन । छावभेव्र (८नांषिलम्‌ जखाद्रवरा नि 
ए्व्ट्डि लाशिन। ख थाम कभिभ्रा देरिनि! वुखिनाम 
ऊ]कजत ठेनव खटनव्र कि डोम एन भद््म्षष्ट! सारा 
डौसगहवा9 नौ नोबिहड नागिन; ठेकिःनव “एड गर्द 
खम्‌ खम्‌ गक; रठेगट्वव (लन्‌ टनव एकग ल ठ7ऊव मवद) 
किम्‌ ङ्भ क्रिय कशिट्ड नागिल। काशाट्कत छेन्न 
गोजख्नि कृन्‌ कृन्‌ कत्रि) भक्‌ कव्विद्ड नानिन। मटन 
रुठेल -धयनि मम दरू 5 नए शूनिग् याडेट्व। सण 
(नङ्‌ ब्र एोंडर्नि वकि टेषिन ; खांनूटनतर कानानानि 
ङ्डिबिगोटन (निम) खोमिट्ड लोगिन; सकंडिनि डेसर 
निर्गि ङ्‌, कख, नै, (वाके. यिल ममर यार्न 
कदि छेिल। मायात्र छेशट्त छान एमे) नौ कठेग 
ख्‌] जि नागिन । 

छठ) टे मम यकरण न] कब्र अध्वा निद 


ठरे मिक] 


़विष्ड नांगशिल। गोङद्ुतर छेशैव नान दकम गीगरूक ७ 
दिङरिकं न॒र्गट; छकाटफव भियेव (थन नैशटवरत मज 
शक्र € गेकत। अर निम जावर (कान यानो (फिष्ड नीकेलाम 
म्‌। शाम ८०,००० रु नौ नाभिम्‌ खरु) धामि 
गेखिनि। देष्डन दे्नकृष्ठिक यांल)ग (फयिलोम एाविपिटिक 
नोक. नोशट्वत खन एलिम, बोदृद मोट वु वष 
श्छ व्-ध्म जद ८य (कशाय नामि निग जाद पिकानां 
नांडे। स्कं थक खान जानवर अङ सन्तत्र थानक 
नोथट्तत तो! वानाट्न ्रहिग्रा्। छटय विरम खानटन्तं मू 
रटे ग। ठे नून त्राटजातर खनक्ने (गख (पथिष्ड लाशिन्ाम । 

कान्‌ ठन वनिटनन, “बाव नौ (नम पव्रकोव्र नाड, 
ठ टल जोरावर क्रि उड नाद्व । चटेवांत छठ याक्‌। 
खोनैनि शूव मोवधाटन निद्छटक (षएट्गं शक्न ।" 

कान ेटमत थेन मावशान कत्रा कातुम्‌ वुद्धिलायन; 
किदं उयनि वातत (मट्ड यामि नषि) (भैनोभ। जलाराजं 
डोव मड ठेनघ्त हेषरिघ्ड नांगिन। (म कि खौष ९ 
नखि ! कछनल्नतागि श्त्रिखिन्न कब्रिषर| कर्‌ (वनूटनव्र मज 
८मांस। (मं 1-८म-८मं। किर छेनद्त्र षेगनि्ड लाशिन। (मट्‌ 
८०,००० कु बनत्रामि (ऊम्‌ कविम्‌) छेगत छेणिः्ड सराटछव्र 
रिक एातरिभिनिषठे मम्‌ लांभिन; एावििक 5७ (छे छनि) 
खारोख छट्लत ठेगव्र छामिग्र छिन । 


ष्पगं भैव्विटष्तं 


क्रागानहेदणत्र मदक खगक्रत॒ गू 

४४८ भोफ़् । (नोष्निनम्‌ (कश्‌ श्म काष्टाकोष्ि यामिन, 
अनृत णिटव्र (छन्‌ रिछ नोक ष्ठौद्रनेव टणडा-जमान 
गक्वणषषा श्नि (मद्ध्वत्र खान रक्रा अग्ष (नयां 
योेट्टश््नि। लार कमेः प्ठौट्नव्‌ निक्क़वद्धी इठे{ज 
नाशिन। मूत्र इट्ठ (तथिनलाम मभूकृन व्क छगरहृत ; वौनूमम 
ऊर्मि वनिगरा रिष्टे ना; (कवन काल कौल स्‌-रेक्क 
नीररुथनि शरे छाव मब्रूदयवर छ्छ्ति नोभियर तग्रा । 
अदे मद ॒नोरोटए़व्र उन्दने षांफेनाफिक € ग्रान) क 
मरोमाशष्तव (थावर कृक्वर्भं गरन (एषरेशनि यामिगर। मृक्त्‌ 
नाःक खषा गण्ड । नारव ठेनैव (वाव कग्रल ; 
यरे मव सकरन समन शष्ट सष योरोट्फव्र वगम ङंखात्‌ 
ए रु]क]त वश्मव्‌। जकेकुन ष्ट याटमव्रिकात्र ७ जांफिकांव 
ठक्रट्न खानक (यिट्ड शशया याय । ठे मव खक्रलत मुधा 
आमबिकावर खापिमि अर्शिवामिभै4 एन] वीर्बिगरा निर्वि 
वमवौम कट्व्र। रेष्ौत्‌। मक्टनठे काखिकोोम्, कि शोट्यत्‌ 
त छाभा़ठे। वद्नव्र छिठि् र्ट य्व म देरि्रुशिन। 
वनवामौतरा र्थदराब्ना कदिघ्टष्, न ठग खान (गाषरटेद्टृष् । 
वटे धूमद्रोनि (करिग्र) थीम स्माोनिम्‌नेगे ष्ौगेषठित्र नाम 
"धद्व (छन्‌ रिखिणर।' सर्था९्‌ वयया (ममः तरिष्रौशिनि। 


ॐ8 मोँविक्‌ 





~ --~----~- ----~-~~-~ -- "~~~ - -+ ~~~ --~ --+~- ~~ --~---~ -*~~-~-~--~ --+ ----- --~ -- -+~ -- <~ --~---~ ----- ~~~ --*~-~ -~~-~--- 


शुशिवषैह्ड < (फन (पिया, कि 4 वरकेब (पमे (काथ 
(णि नाोढे। रेषात॒ नोषार्-नैक्वड, नोष्टनान), छनवाग्रू 
मखे खर्च । गारोरुख्लि चछ रै ८य्‌, वत्र एकग) 
जोष््‌ ; नोषटनि छयरष्त्‌ मोर्ध, रखा (कु रोलाव कुषे दः । 

एकि पिक रेड थक उगर्त्र ॐ) (जोत चोाम 
वश्िटङशिनि ; (म गजल वांजोटमव्र स्ख्मृ एंतिक्कि (णन द्धिभ्‌ 
दि किल्ड नात्रिन। ष्ठौट्नेव्र देशत वंभ तनि कौटल)] 
धम (अथ ऊभमिम) वरिमा ; ८म (मघ व छमह्ृत ; वृकिलम 
भोचठ>े कह उशत दष टेश्िट्व। (म कृष य छरष्त्र (य्‌ 
शर्द्दधड्तव ठेगविषिड योन्‌नै। निलोरछखलि नैर्‌्एत भ 
नर्य जोदमत्र ठेनेव गिरसा नु; छार अटनक नादौ ७ 
८लोदकब्र थाम्‌ नष्टे ठम्‌ । 

कि खान्य, खोङाक (काथो (कन. ठण्‌ भूत्रिर) धन 
अमानत निम्र] नख्ट्िवि, छक न कृतिम क्रमान्‌ फ्रि 
निट्क्‌ एलिल । कारा 4 कोथाग षएलिनल? «ध्य (पथि 
7ज्िण (अक्शट्णनव पिटकं ऊाषर्)ज एलिडष्ठ | (म ८य्‌ 
ऊनमानव-गख्गक्तो-वृक्रनष्ारोन वत्त (पम। कानेन 
निद्म कि (करभि ठेष््निन ? (नवर मकन खांशे विलौम 
रुटेन, ब्रा दथ (म कुनिड लोशिन। (वाश कति व] 
<यनि कान एनद्क शृत्रिम्र मोद्विग् वमिद्रव! 

ककन (जम खांमाटक किख्छाम। कद्रिन, “याौष्छ), के 
खर) टखं क (नकं खटष््‌ वन्‌ नैटवुन्‌ ‰" 


मौशत्िक्‌ ^ 


--~-~-+~~-------^~~~------- - ~~ ~~ -- ~~~ ~~ -*-~-----~ -~ -- ---~ ---- ~ प = शके कि क 0७ क्क @-9 + ० 


खमि वलिनांम, “योय सए मद्ठत्‌ कन ।" 

(न. वलिल, “छनङटनव्र॒ नेट्क्त व (वनो ।* (न7.उवु 
अवख) (कयि) खाोमाोतष्टश्य स्केलन। पवकनन खोधौनङादय 
छौवनथानैन कव्िमू। खाल छारोव वन्ौत णमे) ! 

यक्तरान पिनि कोषटड नोभिन ; (नाक नाड, छन नाड; 
मबुखवटक्र (कान कारंल, (कोन नौयौ,-(कान किष (एचि 
भोठेनांज न । “ङ (य संनखं डर्ाता€ (रन बद्धेन बशो 
रुटेय)7ष्ट । एौतिषिक ऊन, लल, ऊन ;-- लन यात॒ ऊन-- 
खौ ऊन! ओम ठीनाटेभ् टेशिद्ड नाजिन। 

यङे ममम «किन कोशल उढे्ड कं माल बृदत धकं 
वक छिभिमोष् ऊटलव्र छेन का7ना काटल शिरे छामाठेय) 
मोोव काडि्डाष््‌ (मयिट्ड गोङेनोम। (नटख्तव कि खोनन्क। 
अनना €. ७ (वति जागेत छिभिभोश्ढे मदवाटशक्त) वृङ्< : 
किध देर! त्‌ छ।ङोएमंद्‌ ८षट्रय॒ (कौन खश्ट्न कम न्र। डेक)- 
(पतर अशा 4कं 4कट़े। कग कुषे मौ (फयिष्ड नोटेनामर। 
(न. अौनना]& 8 (वव्रिर मोन गर गख छिमि वश कत्िगरोद्। 
खां छिमि (मयिष जाराद्‌ रं षषे कत्िटड लाभिन। 
(यम क़ अण उात्रनून नचा (म राट्ड धुत्राषृ 
लातिन | 

भि वनिनां म, ५८न., जिमि भब्रघ्ठ यपि <ख्ङे रेष] 
र्म शाटक ऊ काश ेटनव्र अब्मछि निट -धकवातु 
(ष्ट (नटवा न जामा कथ्‌ निम्र) कनूटमन्‌ षटि 


न माजैबिक।] 


[च = ५०५ 4 ० च ५0५५५ + +^ वि [त 


कने 7़नटक छोकिट्ड (नैन। कानेन जामिया टिभिश्नि 


ष 
,* ध ल । 
« ध * र न 


त ऋक 
नू प॑ ‡ १ < ४ 


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टनव ठेनतर (यन) सूर्या रिं्ाटष््‌ | 


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| कुत मष्ट 
५-4-८4) | ॥ 

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मोव्रिक। २१ 


(न. वलिन--“का न टेन, फम्‌ कट खांमोट्क 4कवाब॒ 
छि मत्त खक्रूबछि (पटवन र 

कने (फ़न वनिटलन, ^८कन (न , दमत भिशिभिष्टि (मदव्र 
किना? खांभाट्णत यन ऊ (छन 1 एद्विव॒ कन पवकाव 
(नटे ।” 

(नख. वलिन, “ट्व (लङि जोगेटव छगरफोट्कं जोव्‌दाव्‌ 
खङ्रप्रङि (कन पिटमश्ट्निन ?" 

काशन वनिट्नन, “खयन नांिकट्कव्र माम कमर 
वमछिनि, (मरे खन षर मानु्ड वटनरश्िनिभ। (क्न 
एत॒कातर नो खथ (ययौनदट्ने वटपत्र भिशिभिषि मात्रा खाोजि 
खाल बहन कबिन)।। सवा छांतौ गै], थत्‌] मोक्वत कथटन। 
(कान डि कृट्त॒ न), खथ गाङ्‌ ट्प (जात (बहतर (नागन 
क्तूवोत्र (षट कबर । वान्‌ छेनमोभेदव्रत्र ख डिभि खात्‌ 
भाग ८कथन्ड नौोखगा साम्न) शक्वं कंभट्ड कड खक 
र्द छिन, लयन मव्‌ (नोन (नद्य (भरहष्ट। छखषु खोट दके 
खमि, 18 बटन रय गो (लांशं (भेद्य योघ्व। छ] टो] 
एत्र गेयः छ कंभ (ने; यट्फव गेोङमिष्टे € निटक्वशं (फट 
अर ऊरनखंङ--८य॒मन का मौलषटे, यरीनाष्, कद्राङम)षट-- 
<८गव्र (कय (ड (नटन मन वरव जा कट्त, खोवर॒ जीम्रडे 
(टव (कुटल ।” 

काग नत्र कथांनि शूवठे मा । मक्सव निशत 
मानान्लत रूटन «रे छिभिभारे गोखषरे (नांनै नैटेट्व्‌। सङरे 

१ 


> माव्रिक्‌। 
जमर कानेन मूट्व मनूटखव वुटकब्र छेनैतर खाल (मयाद्‌ 
वनिटनन,-“े (ंथुन, णिमित्र छोषण मैक याम्‌ । य़ 
भाठेन पृट्वर थै८य कान) काटना- रिष्ट (पंशृटरु गाद्षछन? 

^), कानेन, नाष्छि। कि वनूम (वि? 

--^“कांशानषट! वष मारवाख्कि ङु! त वोम फल 
(वट थोट्क्‌ ; यक्‌ क्‌ टन एग छखिनटमे। शीण भाटक | 
ता (यभनि श्श्खि (मनि छौषुने। मब यगि ठम्‌ याव 
माव) छेष्डि। स्िजिद्णेव शान गक रुष ५५]; यटपत 
गद्रोटतत मषा भूय € र जर्द्वख। वामत नदत धाम 
षाडव कुषे लका ठग, छाव मदृशः मोथाषठठे गीत्मौहवत्‌ छिन 
ख)एनेत वकडाने । वदत्‌ बुटयत्र मामन गेम केटतर भैक- 
कराड खाट्छ, भल्याक्षि ये ठेकि नश्च] थत्‌ (यछ 
खरि विषै!" 

डे ममम कागानहे्नि छिमिमत (फंथिट्ड' नूम 
डाख।टफव मव्रिवातर छक षष्टिर) बोंमिद्रश्नि। उरते 
८य युदक खयलाड कब्रिट्व (म दिस्य (कोन मटन्तर्‌ श्नि न। 
डाराव्‌। मर्या (एत (वमी, छात्र छेत जमन डोम प; 
खोवाब्र छिभिटमतर (ट्य तरा ऊंट्नत ङ्त खदत्र) अनकक 
शकि नीाट्व। रर्ाव्रा ख्मिफत शुव कोष्ट चार्मिमरा 
भैणिनि । 

का]ग॑ट़्ेन वलिटलन, “डिमिष्त्र (यमन कट (कक्‌ 
खामोटमव्र वषट श्ट्व । एनन्‌, <टरेवातर कांमलषटतेव मा 


मौनत्रिक) २ 


बाजरा खोरम्‌ नडं ट्व। सट्मत टेनैत्‌ अआंमोत्र तक 
{वै| फम्‌] नाड ।* 

(नाणिनम्‌ अणि मह्न ऊटनत्र॒ खिति एव भाव्रिलल। 
कन्‌ट्मन्‌, (न. € यामि खानुट्नत्र ऊानानलातर काष्ट जिग 
ताठेनाभ। कश्‌ ्ेन ऊडाव्र नोविकटणत पल रिविमू। 
(शट्लन । (फचिदृड (फथिड ल} ठकतव्र भडि कम्मे वक्रि 
ठृढेड त्नागिन। 

८नाणिनिम्‌ का]भौनषदनव मादक -खोभमिषु शडिनि। ठयन 
खिमिकव माकर कामोनहटेणेत डौषम लठ दार्थिय] तिगाद् । 
शशृटम (नांणिनमुट्रक (यिम कामन ण्न अक़ड उम 
नैकेन न); छोरा) थन छख्मि मोदिवावर रखेष्टङ्लनामू्‌ मठ 
णके टेतिषष्ट। कि गोखने उाङ्‌दा वुद्धि गोद्विन कि 
छ्णेमन्‌ गंतोर्थु उोराटफतव मद्वा जामिम । 

कामोनषिमव माकं (नोषिनदमनब्र ८म कि डौषम बुष! 
रेश्िनि कमोदधम्‌ कमरोकम्‌ माक एनिदखष््‌, आंत्र (नोष़टिनम्‌ 
८कंवनि एक्ताकाट्व धू विग्र घूविग) 5७ विकट कामानमव्‌ 
माघांड क्बिखष्ट । काश ढेन खम्ूर ठेरिन एोौनाडद्डदष्न। 
छार्खं कणिक र्ठ आंत्र करटकं (कवलि शोकं शीय 
नृति । (य का)गान छोराटलत मभनम श्ट डोर 
रस्करना९ पएरे र्टेग एटेफिट्क छान कटेम। वाटेट्टार्‌। 
ग थक] छौसम का) माने कारोत ठिक मोभून! ये छोरोलं 
| ४४ छां] व (फारत छेशत्र भषिलि! थै (वय उाङाव्र प्ररे 


०० मो 9 व्क) 


(फकःथतुशत्‌ कव्विग्। कं]शिट्ख्ट््! अओ खाबरक, उद्भव 
खात्र क्ट! ! मोभरान नष्प्डष्ट खात्र षठ ठटेग। एृषेमिएक 
कशिटड कनिट्ड छाजिर्‌। यारे्ट्टष्ट! धम कि डौषम यु! 
ग ग का]गालफ़ लार्‌7छंव्र नैव छार कविय ग्रोमिन। 
(नटखत € ग]ट्छवर खाचाट्ड जारा्जन्र उङ्क] € कए ङूनक्न्‌ 
किङ लाज्निन। (म कि डौ नाट! निष्ट उ्खाव्‌ 
खनन कानेन मोखरा देरिद्रनन। रेकाट्फवर दिशि 
(कटक मभूखकन (दद्र केम ठेठिल । ऊटलव्र छेनव्र (म कि 
सन गक! का]मोना़ेत मन छयन' उगहत्‌ तार्निभ्र) ठेरि- 
ग्रा; छोशाटणत्र ह्मिष्म्‌ नकं € छग्न्त शब्छटन कन्‌ तुर्शित 
रटे] याक नाोजिन। मगटखत्र गा ऊंनतरानि )ङ्‌}टपव 
(न्क्व खाद कनि ठेर; व वष ८एचे रेष नागिन, 
रिकं «कं च्रे श्रि] यङे युष एलिन। छोव्रश॑त्‌ अवनि 
कामोन्ेव एन यानव छाग दक्रश्वाम षटि ननो 
लोभिन । 

मव एूगष्ठागे ! मभूदखव ठेडान कन वात्र शो ङ्ठेन। 
ए विटक कुमाला्ठेत गड नङ धिय (कक ठेगवए। एयर 
नौल, उना) मांफा। कटकं मोठेन न॑दीरे मभूद्यवर छन 
(टात्‌ (लार्डि वर्म शात कंदिल। बाकव्र मानव खांभत 
खामिटड नातिन । 

कनन क्िव्रिषा खांमिदलन । (नय कं वलिदनन, “फ 
(नख. (कमन (कयन? 


भोरविक। : ०४ 


८5 त १ पन प मत स म प भे म पोत 9 भ जम. भ 9 4 २ र १ मी ५ = ~~ +न किण न ~ 


" (नए. वलिल्, ^ मन गरव पश यामि कथान। (कयि नाष 
किमि कमठे ने, आमि गिकांतौ! जाभुनि य। कवल 
ड] निंकोत॒ नथु, (मऱे] कमै)ठे4द्‌ कोक ।" 

कश्‌ ेन वलिलन, “अत्‌ वष छगृष्त्‌ कं, धात्‌ 4 
वक्मर क्वे बरोबर ङ्ग्र। 

आकरे मम्‌ खरक यके छिभिव्र कोष्ट वामिन्। शक 
टमि, किङ बड; काोमौमौत पीखव यांचा टर 
मक्वाक्र क्ररकिक्रठ। भूयं कफे| वाक्त शतिं (म) मतिम 
छामिष्डाष्ट। वक्ताऽ भत्र शिग्राष्ट। ख्ि। क) 
केश) छाभिज्नि। छोरा कष येल नैत कागकन 
नातिकं ए कव्रिहड नलात्रिलन छर (पथिषु) बांमि विबि 
ठकेलांम। ख्व मठे व्ठेड प्निषरं ठनि शत ष 
नाशित कत्रि गायं नाद छत्र नाभरिलः टांडा ऽकान 
धोग्‌ साफ़ मम टेव कानेन अक कोशं षश खामाक 
वाड एिःनन : ठो उशन € (वम्‌ भेत तुश्िग्रष्। याभाव 
दष किकग षम्‌ षष्ठ नागिन, किध यीगेष्ठ बानकफे 
शक्त एव्‌ मठ । ठे एत] माम, भनिर, छान श्त नत्र 
प्रो शेखर रठेम्‌। करटक उविषाडत्‌ (वांतोक कत्‌) वृषठिलि। 


वट्मफमे नैटष्छप्‌ 


वत॒ट्फत॒ (मं 

८नाष्िलम्‌ कमार एकिभूय एनिएञाषट ; कऊरोक्द 
डि शुदे फट वलि्ड ङ्केःव। नेकगत्न यक्रावशत निक 
खमि) जामव्रं ऊाःनवर ठेशेव' ववृक ऊ।मिटड एसिना) 
(वनौ व नष्‌, (छट ८ वव्ररथ, (कोने) कृषि क 
कोन) व षिमि कृषे फौच। (नख ठेठ मक्मोशरद रिरि 
माव्रिड भमर सटेकण खनक वद्र छोभिःठ (भरिया: 
डाठे (म ठेर] (फिर विट्मव विग्र शठेन न; कि 
कनटमन्‌ € ोमि गह्वर मड <म्‌ बाठेमुवार्गे ( (लला) 
(एशि नोभिनाम। "योक़म्‌ः मान वद्र, ध्योर्भ मोन 
न;ए, बर्थी९ वत्त्व नीरा । (कथि (परि वु दु 
वव्रहक्व ठे (पथि गोकना । जिनत्र॒ बाला सके मद 
द्रहकत हेनेत्र शष नान, नौल, उनु, मवृ, (दशन 
शख वाण्‌ शङ्कित र्ठ) अनिर्कवषएनौम्‌ (गांड काग 
कव्रिडश्नि। मक्िण टक यञ्के जथमत्‌ र्‌ नोगिलाम 
ठरे याटेमवार्त मथा। वार्ड नागिन । 

ङ्क्र मगरूहखत्‌ शेर्‌ (वम (यौनाठ़े शिनि, किह य 
अक्रव्थोतर कष यामिन (फथिलाम श॑थ सकदाट्वर व्र। 
एाव्रिज्िक वव्र छपरा वीर्शिग्रा विग्र; अश्रमव शेवा 


मैजिक | ५ ० 


~ -ल ५ ५ ५# ५, ५५८५-८ 6 ५0 ५५4 च ५ ५ ५4 *-# 0 मि निमी मि वि 9 00 ५ ५५: ५ <^ ५ न ० अ ० 


वछेक्‌ नथ त्राय नादे | विगान मरोमाशरवव अमौम लद) मि 
व्यन अनेयाट्न (गेव रृटेगराष्ट। उटनक शूंङिम) कशुन 
निट्रमो वब्हखव बट्वा तिश्र चक मह्कौर्नं नै वारित कतिद्लन; 
जारोवर मवागिग्र कानेन खजौम मोङ्मर्ट्त्र खकूटडाट 
स)रुल छएालारेट्ड नाभिटनन। एष्व वत्त (फेने शत्‌ ध 
कब्िङदछ। ग्ज्व ब ८म न निकर! नष्ट नोर, गोल) 
नाढे,--(काथा8 याट्नत सकु कड (ण्सिष्ड न)ठेलाम 
न।। वतर्ररूद (षएटयर वाजांम खाट] गोन वनि बन र्ढेल। 
खलंत्‌ नामक्‌ (नावाटक जामामवर मक्वीक्र आवृ; राजत 
अङाङ््रखोश र्टनकृषटिक (ट पिनव्रङ शतम कतिभृ 
तरो) ₹ठेट्ख्ट्ट ; कि छव्‌ ोटडत्र॒ वन विक्र खोमद्र (वग 
खङ्रूख्व॒ कब्विट्ड नोगिनांभ। सर बमो भाम, अए७ 
अौग्रकान। न) लौनि गोरुकोटन लयांटन अांजिटन कि~क 
रुढेड | 

(फथिट्ड (पररि खामव्रा (गेना)8 8 माछेय खर्कट्मत्‌ 
निके जामिम । कानेन वनिटनन, “सरे ाटन शू््द 
यत शतरि मिन्‌ नोऽ] योरेड, कि छखिभि-भिकोत्रीव 
एन ययाटन खमिन वटव दरम दव्रम कतिगराद् ।'' 

ऽख्डे मष जामत मक्त (अक्ता शात र्ठेनाम। 
काश टेन वद्रत्र छितर षुब्निय शतिर (काश्‌) रुटे्ठ नथ 
थिभ नेमा जारा एानदेघ् लांशिदलन। षएर्क्षिक 
वक्त्र (तमे शृ ु क्रिस । चमे छञवोनव्र रुषि, न) 


न 


५०8 मो भविक 


0 नि स 00 90 


(कान मास्व याएकटव्रव्रल्छतौ ? (मष्ट (णटशेत (मन्त (पिर) 
खोमोत्र सपश्र-मन भूष छ्ठेल। ववकत॒ क बरक खांकृछि; 
(कशां अन्तित रटे इटि, (कांथा€ व] अमकछ्िम ङ्गा 
तरिगराष्ट, (कांश (खन धव्रवाौ मव ेक।ठेख। नैषु) 
निग्मोटष् । 

ए व्िफिकं ट्कवांदवर निकर, (कवल वतदु्त्‌ मटक वत्रद्कत 
धाकांत गक । कयन] व] दतरदख्व- ख, दवमिमू। य) छि 
क्रो गेक,-(कोंथ€ व्‌ वत्ताक्द मो? रविम क्ल नाचित 
रश नेडिन, छोरोवर गक । एनिःख एनिृड कथन कथन) 
मन ङ्श लागिल ध्य, मामरटनव नैश सवकंनदत॒ वक्र, 
सौकेवाव्र ऊक्‌ वो नाटे। कि कानेन ममिवांब शौवं 
नटृकन ; (ययान नोडन) व) ंनौग वब्ररू (मवि नैटेट्नन 
छारत्र छेन ॐ गकिल्ड खोशृलव शाक्र। मोव्रिष्ड 
नोत्िनन । वव्ररषएतूषन्‌ क्वि कष्ठे यड्ड लांतिनल। 
मनि कतिया कागेषेन कमन पक्िनोखिगुट्य खथमव्‌ 
ररेट्ड नाशिटनन । शिष्ट्टन रिम (णय, (य (य नां 
शत्रि| ख।मिग्रारि छार अषए® गालव पंक ठेडिमट्]>े 
खम). वँ†शिमं निया | 

4 कि! (गास वतरत (णण येका शख शा 
र्]व्राटेडश्ङेट्व? सङा ए गेङ्ि वन ववक्‌ छक्ति 
छाक्रिःड यथमन्र ठ्ेटडटश ; लार्‌।ट्त्र शाङ्) योठेम्‌। नुव्रणत 
एकत्र श ठ्ठे्रं वांका्रनं रण्ड लागिन। खां कथटन। 





च न~ ~न क [कणी मीर 


मोैविकं। >^? 


४0 ५.८ १ 0 पप 0 प म प प प, ८0 पद पो. प प २.9 पण प सण पे थ म 0 २0 थ क का न म म न म र = = ण ~ + ~” = ~ ~ ^~ ^^ 


दब्टणुत शत्र वाक] जोतिष, कथन) (कौन कँीटकेव॒ अशा 
षो गिग, कोटे, कमम? पजिनय एनिषड लांजिल। 
भोम मत 8 छि कदिम्‌। कनिटड नाभरिलांम। नादद 
गषव (पयिलोम ग्य कड नौ स्थि नो ददान 
नोौभिषाष्ट। विष्ाडत ङ्प क्म योराप नैतट्म 
वर यिश्राष्ट। ऽण्डे बक रोविट्थं लोराक याव जनमत ङेः 
नोविलि नो; गथ धटकनाोटव वक्र} मागन नु व नत्रद्कतु 


2 व. 


४९ ०११५४. 


(क - + , # 
शि] शि) ष 


1 ५ ८५ 
ं 1 १. ध क १५ ् क, 
४ 1; ५१५ “ ककि 1 ५ 
५ न} श्च = ५ ५५ 
> [प (* न 1 ११ ५ ^ 
१). 4 + ष 
ग ८... ट ५५ ऋ ६ च 
न ५ मः - "ना 
1 = १४ [6 भ ९ 
1 १७० [॥ ५५ न १ 
ण “ ह ^, ध ४ 
|) १ = 


(शन्‌ शनी 
नार! । (म नैशं (डप कत्रिया योदेवोव्र गकि क्रु 
८नोषठिलटमव्र नाहे । (महे जायने ८५० ख विभ। ७ ७१० «> 
सन्छटब्रशीय अदश । 








>० मशक] 


[व ~~ ~~ ~ --~- -- ~ -~ ~. -- -- ~~ = 
क ~~~ ० 


यन सेनम्‌ ? एोविरिटिक नैश वक्र; (क्न कदम लयन 
शृटेट्ड दाोशिव्रिषश्श्म यास? ए)व्ििट्िक माए। वत्रटरूतव नैर 
माद्शाटन काना (नाएिनिम्‌ वत्त मक्र कमपि दौमर) 
तरिग्ाष्। ५ काटयक्रिनि यमत्र सूद्रात्र भूय (कवन एत्‌ 
(वला कटक मिनित कक (फ्यिष्ड नीहेबाशिनांम; 
<योट्न रयाव (म जयद्र व्‌] गकि नाङके। षएव्रिफिट्रकं 
(ात्र॒ निखकरड), (कान किष्ूत्र यक्‌ शक नाट; (कवन 
(ग्रेन्‌ € निरेखिनि गांयौव्र रषिम सोटेवोव खन. करान. 





शि्ेकिन्‌ नानी) 

मक । (म कि ौरम भक! रार) (यन टक 917न्‌4 
मङोनटडा नाडे। षड उड (नम गककु€ (यन लम 
विग यादेः ला्मिनल 

« कनि दनवर ने।-८कासोतव्रौी' € निर्क्व छिव क्न ओ 
ङेवात॒ (दमे कपगृक्रम कंत्िलामर। नि निं गरव्विद्व, 
मटक माकर खामोट्व्र माद्रिद्वन । सके ममग्र कानि 


म भब्िकं। ५०१ 


यात्र काष्ट खोमिग्रा जिंख्छाम) कद्विलन, “कि कद यष 
4यन अटरूमोत॒ ‰ 

खमि लिना, छेनोम उ जामि द्िषट (कश्ड 
न ष्छि न ।” 

कोशे एन वनिटनन, “खट्व कि वन्‌्ड एन (स, <ङेथाटन 
खामरत्र। याहेक) नद गाम्‌] योव ? 

ख।मि वनिनांम, ^] छर्‌} खातर कि वनद 

काशं एन रेदं विप्काशैव्र रमि ङोमिष टशं< नर्दवरटत्‌ 
दलिटनन, ५ र यटक्नाव जनिना (तोय; जाननोवा 
छव्‌ विश ७ कष्टे टा यात्र किष काननन)। खमि 
दन्‌ कि (न)ए़रिलम्‌ (य॒ (कवन निकंटक ङे दब्रर ङ षोष्ोद्ड 
गातट्व दु ८] नम्र, ठेष्छ) कुन जाोट्व। पजि गिद्क 
4 खट्ट नटवत्‌ । 

च्यामि अवाक्‌ रटे) विलोम, “तनन कि खोट) 
तक्म ट्रक (टड नोदटतन खानैनि? न, छ <टकवांटत्‌ 
भमडधव ! 

काणेन वलिदलन, “उमङव रिष्टे नम, खमि रेष) 
केतन ययन (मरे प्मक्शम्मत्‌ ठिक अवायाट्न शिष्य 
पेशेश्िङ ङ्ङ नाति ।* 

तुङ्न डे अमममाङ्मौ माकण नेक किषटूरे खमष्टव 
“ग । मकट्नडे कानन, रेड (भक खट्ग] एक्क (भक्त 
गथ याहत] रर्गेम ; रेत (मक्र थटकटमे खटनटक खा(नकपृत 


नण मों तिक्‌ 


> ~ ~~~ 








+~ -*--* ----+--+-^-* ~“ ~~ ~+ ~~ ~~~ ~~ --- ~~~ --~ -~-- ~~ ~ = ~ ~ न ० = 


गवी य)रेट्ड नौव्रिम्रादष्, कि एक्किन्‌ (मक्त थद्मटभत ड्व 
अविं 4 गयी (कशे यरटृड नीट नोढे। 

काशे रेन वनिट्लन, “खाशनि डव षन ५ मव शं 
जमो :एन), किद्धटेषाव शरट्क्वं कथन यामि दथोटन चोमि 
नडे, किद्‌ अकवांव्र (षष्ट कटव॒ (फथव मक्र ८मक्ट्छ 
यड नावि किन} 

कन ेनवर क्थ छनिय्‌) धामि€ थक्ट़े विकदशव खद 
वनिनोब, श्छ ठं], छांडे षएनून; 4 एटेमड छिनिगड दु 
छे वव्रदक्व्र नार एर्नकिषए्णं कटव्र (माक) वभि एनून ।” 

काशे टेन वनिटलन, “नत्त छेनत गिद्य याव छ 
खानिनटक (कं वन्‌ट्नं ¢ यपि याष वत्द्रूत नन] फिट यव । 

खमि अछि विश््टर खकु ौ<काव्रकविमू) वलिना, “डल 
किटि १ कि वनूटष्टन खांशुनि, कानष्ठेन 

कान छेन वलिटनन, “| उल ज्ट्मि। खननि कोटनन 
ध्वं ठग, छे वब्रटक्त्‌ उनटमटग्‌ (यमन मबरूएं (मनर जोष् 
(कवल छेगत्रहे। ठव मक्र वत्र र्ठेम्‌। निगो । «48 
छाटनन ध्वा रङ्ग (य्‌, वद्क्‌ खनव टेगव॒ कख्ैक्‌ छोट्म 
ख्लांग्र छात्र छिन उदिगा शापक; नव्रट्क्त्र क्कु यि 
छेगाटव्र छम, उट्व उलाग्र छिन एव्‌ खाद वृद्ध ऱटव्‌। 
डे वत्रःर्त्र श] रुषश्णन। नने दुष्ट छेष, बर्थ उलागू 
नग्रभड कृद नो भैरवी वब्रक याष, ऊत्‌ छलोग्र (यमन 
खंम॒ (छमनि कन खाट । अयन जके नगरम युर वव्र 


“~ 


मोब ५० 


(फ़ कृतर (नांणिनद्मव्र शाक कि चट्कवादब्रे खमड्धव, 
शट त ? 

खमि खानट्न्व छेद्डललनागर मखम) ठेमिनाम, वलिलांम, 
नकिष्ट नष, रिष्ट नम!“ 

कानेन शौत्रखौट्व कङिटरिनिन, ^७घू यकङ़। वाश] शेख ए, 
कण्नि कटनत्र जनाय शांकृड रश्व छत छक (नडे, दाजाम्‌ 
रणि रर्मिटन कृतराटेमर याम, धू टे रमर ।” 

खांभि किंख्ठाम्‌) कविनाम, “यावर कि (कान दाश) खा, 
कानेन ?" 

कानेन वलिद्नन, ^, खादर क्के दाश खाद । 
ये पक्र पिटक योव के ठ) वाख टव ; कटनत॒ छल 
णगि (सष (यड यणि मन र्ग (य (मयानकोत्र मगूटयत्‌ 
खल जव ववर्‌ र्म (शष््, छ)" रषट्ल किध म मिस 
यात्‌ क्षिबरू्ड शातुद न] ।“ 

क्न (नत्र कथ सनिग] खांमि वनिनलाभ, ^८न]9़िनटमव्‌ 
माकर (य यक छौव छा खोट (मे ङ्न यादन (कम 
कानेन ? (कोषय खोंरटकतव खमन एकम ठ (न)एिनम्‌े 
कट्त॒छिनि। (गन विशम नैन (मठे यी शिम वृत (पं 
कृट्त्‌ कि खोभद) छेगघ्व ८2्न छ2.ड शोवरव न] ?" 

जोव्ृशेव॒ यक्‌ शान कों छार्‌)टे कवर) रुरल, चर्ण९ 
छशो्यं आटूव शेतिमांटम वाम न्ग्रा रकेन । (वन) 
ए त्िषठित मय (गबदाोद्वरत्र र वव्रटकवर (ममे (मिम्‌) नहेनाम्‌ । 


३० मों भविक्‌। 


~न ण च ण ण 0 न न ण न नन ~ न ^ ५ 4 ८ ५ ज ५५0 च ४ ५ ५ न ७ = १ ग न प [थ 
= 1 ^ ~~, क 


वााटवराभिरिद्व्र छेडांने रयन किटवरा श्डेट्ड वादव खनौ नौ । 
2181 वाटम्‌ नोट्सतर बरक रश्मि टेम चामि लोशिल। 
डाब्रभेत्र ममन नाविक कुन लषेष्‌ वत्र ठेगबर नोजिष्‌। 
छोरा्छव एाद्वितरिक्व्र वद्र काटि नागिन; कोरर) 
शूवे ारोडा्छु कब्र ङ्ठेन, कात्र वकशथात्र काणिट्ङ 
ना कोषिःड खातर 4कक्षत्‌ ऊमा श्ठे्ड लागिन। उावभैत्‌ 
ऊर]ल कमभ ए ण्म वतर खोस नौ नामि 
लागिन। नश्रगेड णु <ठेकशे ववक्‌ ख)क्रिश) शोत 
मभूखकटन सखामिप्रा गदल; कि करालं बटत नौ 
नागिष्ड लात्निन--थागर २,१०० कुरे नौ नाभिम्‌) एनिःर 
लोजिन। वाा्वाभिषाद्व शाव्रणं नुत्‌ कदम) द्रि 
योकरटड नोगिन । 

ख।मन्‌] ययन ८१ अक्रटवथांसच वशमाश । >°" अन्वय 
पक्तिम्‌ (गरक । ल)ङ]ऊ्‌ वक़ोय छोद्विमि भोठेन (व्‌ एनिद 
नागिन, अर्था वठेकन ८ एलिद्न खात्‌ एचि वकत 
मवम वामता फक्क (मक भिम] रेनैणिड ठटेव। 
केट्लकृषटिकं खाः्नाग्र मभूणखन बाटलाकिडि; शखानुूट्न वभिघ् 
मभूखं (मवि नोगिनाम, सका मष्ट वा (कान काव 
ऊनलङध (एथ शैष्निन।। | 

गुव्रक्नि न्ने माफ़ । लोरटकत्‌ 9 बटनकषे। कमिषः 
खोमिग्ाष्ट : वृकिनांम खाक सथन ठेनदव्र मिवा (षट 
कृव्रिडाष्ट। क21< क्फ! छौयन धाक मक, वतात्‌ मक्र 


मोगविक्‌। >: 


(नारिनधमव्र ीक। नांभिल। यमात दृके एने. कव्य 
लाभिल। (नोष्निलदमब्‌ नि ठगेव डिनडाङोत शे वद्र ; 
(म वतक (छां कद्विवाव कम (नोष्िलामव्र नादरे। काक 
मोब] पक्र एलिःड लोौशिनल। यवात्‌ ८मठेकणे शाक, 
गिव टेगेःवतर व्रर्‌ टर रङोक्लातु शफे चखे। आद 
धनिक एनिदाव भव॒ खानुतर थक शाक, नत्र रिक 
(कषरा फु चे । वेकं शक्‌ मोदि मत्रि 
म्म एलिट्ड नलाशिल। दृविलांम वव्रक कमम % 
गं जामि । ` मग्ररिनि कादि (भल ; त्रो छौ दमागू 
जानचुमञ्ठेलना। नवर (लाह चुम रटे दरम, 
कानेन शात्रव ङित शटवमे कत्िःलन, दनिलन, "मग्रव 
शश नैिष्षत्‌। 


क 
७ 2 


५५३ ) ६ 
भ ^. ^ 


ए फम्‌ शैव्ि्रषटत 
ण्ण भक 


क्कि (मक । छाव ठेनेव षषम (गलामर। ङि सन्त्व | 
कि सन्त्र! वत्क्त (कमेव नोटत व्य समन स्नेत तखा 
(लाकक्ुतर उष्द्रान नुकाटेग्ाश्लि, छार ८क कानि? 
एडक्रिटक निल, छक्र मगृणक्नल ; माद्ब मा्क ए वक 
दवुथ छामिडाष्ट। कल अमशश मष्ट निग किटि 
कदा; ठेरोटणत भासत्‌ तः (वव्र मोन; खांकोट्म्‌ ठछोत्‌ 
राका शावौ चेर्‌ ८वणटेडाष्ट। ८ (यन एत्‌-वमद््व्‌ 
वराछा। च्डत्न्दिक एश्‌) (नयिलाम्‌, पृष्व दकव यरि 
राद कृम्ाशाव्र मरड सन्णष्टेडा््व कत्रहकत्र (षम (तथ) 
याड । 

फण भरोटेल एकिः कृषि निष्न प्रौग (पविद्ड नोडगुं 
-त्रल। (म्डेणिःक छोरा एलिठ नागिन; चक धके 
प्रा प्ठोःनैवर॒ मिक (नौषठाढ़ष) ऊर क्ौगे।टक कवांत्‌ 
शक्रम कविष्र। खामिन। (षटि प्रौग, ठेव शर्वं मोः 
नए मरेन प्रौटनेवर शत्र यकप (षार शंन; शानत 
शभहव्र विषु मरमम गेष्म बरहिग्राष। 

छाराण श्ट (नोक) ना्रा्ना स्ठेल। उ 


मांभतिकं। ५५७ 


< ~~ = ~ 7 ~~ = + = "~ ^^ ~ ~ ~" - ~ ज ~ 


कानेन, एटेखन नाविक, कनूटमन्‌ € खोमि भि) एङ्निाम । 
(न त्रानै कत्रिम्र मिल न।। (वल) उन प्र) | 
मिनि कटबक नैव (नोक) प्ौ्नतर कोट अोमिम्‌। नैडिन। 
कन्‌टमन्‌ (मोक्] र्ङेदड नारू गिम प्रौट्मव्र छेभव्र॒ नैषि 
शाष्ेडशनि, खमि जंशाटकं शद्वि) (कलिलांभ, वलिन)म, 
“कनटमन्‌, शाट्ब, शां ।” 
डोव्रनेतव कान ेनद्रक मह्न कंव्रिश खमि दनिलोम, 
“कानेन, यरे पौट्नैत्र ठेव यथम नै स्िविोव्र॒ मन्दान 
यननांत्हे यांना ; खनेनि खादत नोगून ।" 
कान्‌ देन वलिदलन, द! अद्रो, यदे प्रौटन ५ 
गवी (कान भक्ष्‌ शगोर्नमे कव नि, चखोमिरे अशम!” 
फे वनिग्रा छनि (नोक ङे प्रौट्गेत्‌ छेगेतर नारङेशरा 
गे्िनन । ओामव्रा (नोकांस्र वमिस वरिलाम। कानेन 
ए कष] (दे गर्व छेगव्र छरियं ए तिकि 
(पशिटड न} जिटनन । जोवभैत छनि खांमाटमतव ख)किट्लन,; 
भोमि © कनुद्मन्‌ पौट्णेत्र ठेनेदर नौभिलाम; नोविक् षि 
नोकोत्‌ छेनेवर इहिनि। षरौदणेत्र माणि तर कैसर नान्‌^ए; 
#थू(त्र मष विम भ्न रश्षेन; यक्ष किल रडटछ 
“क्क्‌ (धु]मू। ठेरिट्जट्ट । अदे मव ल्कम्‌ (परिम्‌) दृदिनाम 
४ ्ौनठि अब्रु]<्गाटखव्र पक खग्रना कत्रिग्राट् । प्रौटनेव् 
भव कमक कात्र गोकं € नर संग्राम) लशिग्राटष्ट। 
एयिलौम, छातिशोट््र वृङ-८वब्र्तव यजोनैेडि दरिषु) 





५98 मोजीलिक 


अ +न ० ~ ~~ = ५ ५ = चन ज च न ५ न ५ ५ ~ ~ ~ ~~ ~ ~ + +~ +~ = 


(वष्ाटेट्डट् । खटलत्र शोटवर खमस्था मातां] नैयौ, (कनि 
स्मि € छात्रामाष्ट (परिद्ड नढेनाभ। जोकटग ङ]खोातु 
रक।त नारौ छेष ८वारेखट् ; छाटमव पौ<क। त श्वनिटर 
खामोटणव कान दानोनाल शृङेट्ड लोभिन। शाङोट्ुत छन्‌ 
खजः नौयौ वमिस तश्सिटछ, खोमदफत्‌ (परिम देष 





मा्टद्‌11 गदौ 


नलोढकेन ना। ॐोषृोट्ज्के वुदधिनांम ठेठातरा मारव कथः 
(पद्य नाटठे। नैयौदणतव म्द (शक्रूेन्‌ नयौ मर्दवादुण् 
(्वनो। (भेक्ेन्‌ भायौ (फचिष्ड भूव व, केकफत सतौ 
याथष छारी, छाना थ्नि (ष्टा (छाएे। छाकठोटणव्र (ए) यग 
छाव दके शष्ौत्र; नेना खत अडि क्कम्‌ । जका 
खनक ग्रान्‌वाषेत्रम्‌ रेख््डष्ठ ८कयिष्ड शाठेलाम ; १५ 


मोभ्रीक्‌। 


# 
९. 
निः 


म ठेर्‌)ट्मव्र नोट्सुव व्‌; छान्‌ षोटेटन ठङ््क्तव्‌ यक 
छान शरेष्ठ खातर थक छानाव्र टेण्ी (एोष् शु । नृरुणकातु 
(नन्‌ € हमत म अक्व्रक्म गोयौ (क्ञिनोम। सके 
:नटेन्‌ गौकौव (मरुव मधु टेख्टनव्र छश य अभिकं ८य 





८जंनि-सिम्‌ € जो द्रीर्माष्ट 
ेरादमत खौश्टम भदिट्ड ना शदिष्ज्डे मोछे पोरे कविभरा 
स्लिम] अद्ै। (महि तत यकव्रकम वराखरदैौम (णविनाोम, 
ट ग्व भनोत खत अविकल भ षव॒ खटवुत्‌ ब! 
एोद्विशिःक कृद्रागां; (वना >| वाग (भन खवू 
फ़गीत्र भूयं (पिष गोकेलांम नो। चोट ध्य श्म 


> > मोबुिको 


जा प त पि सोन 7 .  ५, = = ~ ~ -*+----~---- 





= - ~ - *--~ ~~ - ^+ ~~ ~+ + ~ - ~~ --- ~ -~+ -- -- ~+ ~~~ +^ "~ -“ ~ -- -- -- 


(मक्त कानेन निघ्म। उङ्‌ एष कव्िष्र विश्चीम कब्र 





(नेत्र्‌ शर्थ 


नत्रिलन ना । मट्क्रडिनि यश्चनाडि म॑वटे नियोन, (कंद 


म ¶ विक्‌ | > 


& 
न्म 


सृत अङाट्व्‌ कषे निकर कत्विट्ड नोतिटनन न।। {दन 
एरे। वोजिग्र। (भेल व्‌ रर्व्पदवव्र (मय नाहे न्कान 
ठडेटव--वनिग्| कानेन जमाव नषे) कोकां 
किब्रिटलन । ममख पिनि कुमान] (लोए नीक्‌ व्रष्नि 8 
मोहद आट वव्रु नैष्ट नोर्जिन। 

शत॒फिनि ममर पिनि श्वि] वब्ररू भेष्िः नाभिन। ऊ 
डोव रे] नेडिनि ध्य ऊर र्षेः वांछति ठ्थ्य्‌ 
अमष्व्‌ ढेन । 

उर्गव्रपिनि व्क नण शोगिष्र (भैल। काशन 
निद्मोदक (एसिड नाकेनामन।। कनटमन्‌ € यानि ८नोकोम्‌ 
षग (मष्ट मञादफमषठि (्यिवाव्र कंक वोत कटेन) । 





प्रा॑न्‌वाहेद्म्‌ 


एकत छेनेत्र नोभिषा (यि अयान खमरस्शा (नैगडेनव्र 
ण्न । मिन्‌माष्टड अमश्या (पयिलाम, (कं वा छक्नव टेनैव 


> मतिं 


खेय तरिग्रट्छ, ख) वोत॒ (ककु (क्क्‌ ऊटनद टेनव्र मौव 
कोणि्डटष्ट । मिनभाष्टश्नि दक «कटि मश्मोत॒ नेय (वम्भ 
निरस्‌ मोणित छेनैत शष तरिरा । वष] नि खार मनाम 
(मोखादणोडि कब्रिघ््ट्, व्क्कु व] भात मोषे रादेट्र्टष्, 
वाश शेष्धौवांट्व न्ट्कव्र॒ वाषफोथ्नि € सौव ठखेशव अश्‌ 





मिनमष्ठ 


एषि तोथिग। वमि) वश्मि । सक्व्रक्म छंनरुखौ (नचि 
नाडेनाम, ठााव्र (मदी वजिश कृषे € ध विश कृष. 
डेश्‌व्र] 1 कविभु) क}र[त€ अनिष्टे क्त्र न, शूव ५ 


मो ज्रिकं) ५9 


„„ - ~~ ~~~ - --- --- -------~--~--~- ------------------ ---- - ----------------- `~ ~ 





वकि क क 1 किं 


दनि रटे८व ; कि वामत भेकव ङ) स्ठेः रवँषए)ढ़ेवाव्‌ 
ङ्का देरोव्रा छग्कत र्म) ठे । 

वे ममम बव एकव बड नेकं कोन सामिन्‌; 
कठ! नशत खंखाटन एङेठे। मम्‌” छौ लष्ौठे वादाढेग) 
ग्ष्ट। सके खाटन आनक मम्‌ (यिष्ड नोडेनान 
केतव शनाव खोक रिकं भेक्तवर मर; (नद्धा टेठंव॒) (खट्व 
क. ; भागव ब्र केवर एन्‌ष्रम, शौव यदथ (नाम खो | 
किष्ट्कम नेव खोभद्रो जोशटकत्र पिटक सिद्विलाम । 

फितिवांव्र नव्य (पयि कानेन निदा (मङे क्षौदशव्र 
ठेनत्र नाभिश शज्गगोखि लेस) कि मव कव्विटड्टषन । एएरशरत्र ८वल)] 
मृ्यीद ख)ड) मेव< (मथ (भेन, कि रृ्ीट्त्व (कथ पिलन 
न। खाङं उ२०्८नम मछ; कान्‌ २५८ग्‌ बर्ग९ 61० ; 
मृयाटफ्व क[ल (गेव (कथ) निमष्टम मामव कंक योव (यी 
तिदवन ना। के (मक्रथटनदमव १ खिर यरे। जीवर शति 
णठ खगत (मक्-तायि खाव्रहध ृषेट्व । कान फेन वनिद्लन, 
याक< सृकी (पथ पिनि न।\ काल (फम्र ड छान, < 
एश भम्‌ जत्‌ खाभोद श्मिव कदवांवर॒ सूविष) शृट्व न]। 
मकेन कर) सितिम्‌। खो मिनांम । 

भुतुकिनि (छाद्व नष्टौ ममम घूम छक्यं (भेन। 
दाशत खमि (मयि आकोदगत खवच्‌। छानटे वनि 
रेव । ज्ाजिकाट्न जोर्]ऊ खाट्व्रा कट्यक भोडेन पक्कणे 
न्पिकि खमि (दला नमित मभ जामत मरे 


५२० मो ठिक) 


पीती नि 11 9 9 क क 0, 579११78, मि 


मरफटमत्र॒छेनेत॒ नाम्रा नख्निांम। कानेन निरयं 
यञ्खभाखि शिक कत्रिश सृदवीव्र ङक खटनैक्र] कबविट्ड लः त्रिटनन्‌। 
वल] वादब्राीव ममम खाकतर माद्धथोटन जकठे। नोन 
डत खग्णरष्टे खट्व सूषा (पय पिनि। काना भिकतत्‌ 
कए रटत जनांम शतम खिनि अटनकक्रम्‌ भव्विश्च कि 
(पचिटड लोभिटनन । जाव्रनवनखौतखःन्‌ कनन वलिटनन, 
“पक्कणं (अक | पशि (भक 1” , 

का]षटष्ठेंव ठेनैत श्म] (ण्य सयात शखिविष ग्राकांटमत 
माक्या7न रिकं षठेडा7१9 विक ङ्कम्‌ काव छेनैत्र न ङ्गी । 

ड व्रशव ख्पभात काट्त छेन॒त॒ रोड वायिश। ८ठनान पिम्‌ 
कौखोडेम्‌ कानेन वलिटनन, “यार खमि, कानेन 
निमा, >ण्य्णः यृष्टाटक्व >भ्८्मै माफ छोब्रिप्रय ठे फक्रिण 
(प्रकत नवद थि क्रतव निके (नीषाष्ेग्‌) अढे 
मराट्कम--यार) शुशिवौवर॒ ममर मरटमगेश्लित एगखा7नैत 
4क]¶~-ङ] ङ्‌] जर्शिक) त्‌ कतिलाम ।” 

खांमि जिख्छाम। कत्ििलाम, “काव नोट्म अर्थिक)त॒ कबुष्टन, 
कानेदुेन ? 

--“*खःंभांव नाम !” जे वलि कटि कृखध्वर्न नोक) 
यृनिगा (छाङांत्र माद खनींक्राव्र॒ सकष ^ निरि) 
(मठे मषो्तटमीव्र चेनत (लौ कतिट्लन। (पथि 
८पशिष्ड रू खनश र्कम्‌ (णेल। ष्टम माद्मव्र कका (मक 
टाम डीव खक्नकांत्‌ ना्मिगर) आमि लांजिन। 


नुशुम नत्त 


खगुक्रत॒ विशेत 


नतुफ्रिनि २२८१ मरो । मकान टत ममम र्सिदःत्‌ 
ध्यांशोष उृब्रेटड लातगिल । डौयम्‌ 2181: लाल्नत्‌ ठेनाःत्‌ बाढम्‌ 
वार्त म॒रश। कमभ वाङ्डि लाभिन। सकाम शक 
अशृ (खािभिथ; ठेठ एक्रिगेटमक्त (मठे विशा म॒श्सि 
तौ (नानोतु विगान । निप्र ङृवाद्राषछन्न ङ्मित्र ठेशत्र षे) 
धके सशव तोप्रद्रूत (गो टेर्गोफ़न केव्रिदड लोशिन्न। 
गोदौत्र मर्था) (एत कमि) शिग्र; मिना € अमन 
निग (महे ङ्षावरत ठेशत्‌ दठेगर दशगर । र्षाव्रशाटु 
6 कृयागागर एादिषििक कमममः यकृकात र्ेगु वामिनन । 

(नोष्िलिम्‌ जलत रला विष्ट बाव्रष्ठ कद्लि। थग्‌ 
थकङाखात कृ निप्र नोभिग्र] लाक धकोग शनत मेनन 
घवा छेद्राखिभूएथ एलिएठ लाशिन । एनत (महे विशाल 
वव्र षन्‌, ठा ठन) शिं छाष्ाख् एलि्र नागिन । 
पढ यथन छिन), उयन सकं ठौषणै धाकाग € ककन 
भाोर्नोद्णं खोमांत घुमर छक्र (ेन। रिष्ठानात्र देशत 
णिग वमिष्रु नां मिदर शकरा चट्वरतर (मदय भिर 
-ेलामि; एोव्रिकिःकंत्‌ य किनिसणजं ङ्एब्रूु कत्रि 


४२२ मो त्कं 
नखिष्ड नाभिन। (नाषिनम्‌ कोरा मक्र ौक। याग 
८यन क खनु गङ्िवटन खेकोष्ेम ठेव रिक शि़िकाटेगरा 
(गल । खक्तकाट्व रोर्ड उार्छटरेटरड खानूटन जिग 
(णय खाना खलिक; मगर जिनिवगल रेऩाषेय 
नेषब्राद्ट; (कडगाटलव विनि (माजङाट्व कूनिद्रष्टिनि, 
यन हेावुष्टाखोघ्व वलिख । (नाष़रिनम्‌ ःकवोट्व क] 
रा छेऩटेग) शिम । 

खानूटन काशे द्फेनद्क (एचिष््ड न शेटेशरां गोकना 
ट्व भिर काग षनिटक (फदिष्ड नोडेनाम। जिष्ाम। 
कत्िलाम, “कि रु्ट्ग॒ष्ठ कनिष्ठेन! 

कने फेन वलिटनन, “उगत विनि रट्यटछ ।* ठे।क]द्‌ 
मुय ङस्‌ नारश्छवर्न, गला काङ्ग निगो । डिनि 
दलिटनन, “छ र्ङं एालाट्नाव (णाव (८य ठे विनिम चदे 
ड] नश्र। कऊाङाऊ वब्रदक्त उना न्प शरिकठे याष्छिन, 
धमन ममम वक विन्भैन वत्त श, 4कए़।] शक्व 
वम्‌न 8 एट्न,--श्वमिग्रा कलत छलमर विमा जटकवाव 
छेन कय गट्छ। नोतम लटनत्‌ ग्रम्‌ महद गोल्ड के तुक्मर 
वत्टनेव्र छश श्दमिग्रा शिब न्च यश्मरात एक्‌ 
ऊाराङःक€ माकर कत्रि छेनैट्त डलिग्ा धट । कोठार 
यन छाठ़े कृा९ ठट कएल ङ्य वहग | 

शव्रम कटनव्र अखाटव (महे विगोल वव्रहक्त छन कमनः 
का९ छ्ठग् चेन्ोठम याठे८रछ्नि, मादक मटक (ना िनम्‌्क्‌€ 


मोविक्‌। ५२९ 


ठेगदत डनिभ्र। शबिद्डशिनि । . (कथिटड (कयिद्ड सारजं छटलव 
ठेशव॒ छोमिग्र ठेषटिलि। एषि (पयि एङ्किट्क वत्त 
गोर] काठम्‌] तर्ष (म कि उशुशतव, कि सन्नत 
उपव (य योग (कवन नघ्रै लं शव र्धट्व व्व्रटक्त्र॒ नौड)। 
मादवाटन खाँमद्रौ वन्तौ ठग व्रहिलोम। ऊौङोक् (यथन 
7रटेवांश्िनि (मथन यक़थानि ऊन, खात कोदिरिक्के 
दव्रदक्व॒ खश । छथन (छाबर रषठे। लोराखं शिष्टेन 
कित्र) एलिवां वर (एषे क्रिल, कि शंनिकषे। शिग्र खत्र 
अथमव्र रुषे शौवन न। जोदशेद थक स ग्रभा धकथौनि 
काकं (यि नीय छांठात आशा नीग्र >०० गे छ 
ए़रिग्र जारां शूनता पक्रिनेभूटय एलिद्ड नातिन ¦ कि 
खावात्‌ यक छौसण शक! ऊमा वव्र नैश <ट्कव्‌]द्व 
टकर ! 


(सांग्‌ शुव््षछत्‌ 
निण्ण्डिश्ङत् शङ ङ्ङेटङ खष्ुङर टत वक) 

(मदे विशाल वत्त (पटेत्‌ नग्रगड सुने नलाय बाम 
वनौ ठ्ठेम्‌। व्रह्िलिंम । ए4शिटकठे वद्रू; योमनीटम्‌ लोग 
ेनेद्व मक्वजङे वत्रकु। वुद्नाम मवने यङेवात्‌ निश्छ्ि। 
का]नै फेन भणत मक्लटकं छं कंब्रिग्र -छमुरिष्वल 
कस्िङ ॐ% वनिटङ ना गिट्रलन, “तिनि मम विशम खानि 
कृषिम्‌ ट्म, कि बार मोफत मत्र यकवत्‌ 
निश्षिडि। ठय वत्रटख्व्र पल ज)काङाःक गिन (कन खाोमाटणत्र 
कडा) कबुष्व, उ न) ग्र ऊ कमम वाादमवर जङाट्न श्रामक्तक् 
रुट्य खांमामव्र मव्र्डण्ट्व। लोरठोछ य। योनाव खा, ठं 
थन खटनक्किनि एनृद्व; किङ वाम स्‌] शोष ड] 
रिक खात्र बाषठषव्रिम शके एलन, उांतशव पम नक्त रगु 
मव्रष्ड र्ट्व । मोथा छेगत्रकात॒ नप्रग गु येक ववदत्‌ 
शे (ङतं कब्र छे (नाषिनदमत्र शक्र वकवत खमद्धद्‌ | 

सामि वनिलांम, “योषेषल्चिम धष ममम ठट अगोदर 
कु] ब्रम, त्र मट्शा कि यामव (कान वकम नोलोवाँ्व 
गंथं कट्वर निटृड नैतुवन? 

कानन कखाटणेव्र रोमि रोभिमरा वनि्लन, “ष 
क्रूट्ड कस्त क्ववन। जट््जातर, उद्रनेव्र ङतव।ननव मंगर 


मँसिक्‌। ५२८ 


५.०५ प 0 ०0 0 अ 0 0० 0 0 (प 0०.०५ 0 0.८० 4 क, १ ५ - ८ 4 ० ~ ८०५ ५ ~ ~+ = क. ५५ ^ 7९ ~; ९ ॥ क) ॥ ख + भ 69. 4५ 9. ५५, ^ ^ 


यन क्र) ठेनैम खाट, जवे भिघ्न सपि वब्मटकत दभत्‌ 
(न्म क्ृष्न निष्प्र यङे वत्रक काषद्ड थाकि छान वफ (न< 
वैषटष्ड नीवि ।“ 

खांमि वलिना, “किध (मषे। कि महव ङ्द कानेन 

काश्‌ नवर कथ] निय (नख. छयनि सक विमान 
कृष्न र्ट खर ठ्टेगर) खाभमिन। (पविट्ड (फरि्छ 
छारदखत्‌ काशक कंन नोतिक कृष्न ट्ठ वदरटख्त छे 
नाभि नैखिनि। आशात्र देनुव्रकोत॒ वब्मटफ्त त॒ कार) 
खमड्व, छां कश टनत्र ककम अर मकल कारटखत्‌ 
ए व्िभींटनेत वव्र काटि लांभिन। (मयिः (मचिष्ड 
कङटखद्‌ ए) तिनै)टन वबरट्कव मधा क्‌ विन्भन शश्वत का) 
रुन । यक्‌ सक्र वबरद्क्व एषे कृषे रटेट्ज्ट्ट खान 
उयनङे (मणे! खेनैटत छोमिश्रा दटेशिव्डाष्ट। ए चके! कोक 
कव्रिवीत्र नत्र (न कां कार र्टेग्र किञिग्रं योगिन; 
रयन यामि ७ कन्‌ट्मन्‌ कृष्न राद्छ कञ्ठिगर। वब्रदकव्र देनैव 
नामय नख्निामि। भ्म कि छौक्ण ठंड; क्डि कुन 
पाना शेहड एानाशे7ड गरीत शव्म स्टेगर। टेरिन। एंडे चके) 
तवर क]ष्िवाव्र नत्र खोभब€ करार श्टेम् लाराटक किति 
ख।मिलौभ । लोकोटज (स उथन दिवां क बुवनिक सामि. 
गाम क्भिग्रो उरु} (वमे वुङधिनाम । | 

वात्र चफे। शूद्र भेव्र काशन श्मिव क्रिस 
(क्शि्नन (च ५ रे कनै अजनदत्रड भए तवि एव्र मिन व्रः 


२९ मो व्क 


प प 07 07 भ तके, आ जा पप २.० पज .०० २ नप ०१ ०० 0 09 म 9० प -9 प प 0-490-97 प ०.7 भ 49 स 2 ५४ 





< = पन 


क]षिटल जट्व वब्रटकत्‌ खद (गष श्ठ्ेट्व। नौ तामि एति 
गिनि €गरिद्क्‌ लोशाटछत ग्धा यातु षठ फिटनवबर€ वाम्‌ 
नोदे। मत्रहनैव ष्टोम (षएाथत मोभटन चनाडेगर| चमिन। 
(गेट्‌ कि ङे वबटरुत्र डिब ममाधिं नङ उषेटव| 

किदं नोविट्कव फल अद्षएिलिज्खोट्व वनब्रक्‌ काष्ट 
नानिल। छारटमत ट्वा € मनत नैकि (एरय) खमि 
ख्व च्रि र्ेलोग। ममरण. ताड ववर क्ष ङ्के 
नागिन । नैतम्िनि (खाःव् ठेरिम्‌। (प्रथं विनेमं जोत्‌€ उमुद्त। 
4कत्रिट्कं ववक्‌ जःनक कू) ठको, किं यात्र ८कृरिटकव 
शष्त्र शून वद्र छुडि ङ्क्य जिग्याष्ट। खयन षएुषेगिक 
(नोक छान कद्ग नूडन छेद्म वद्र कोष़े। छष्े्ठ लाभिनल। 
जमर मिन शब्रि्र खामनव्र वतक काटि लाोतिलाम। मक्घा]व 
मभ ख] ङृटङ िविग। खमि (यि यद्विटछन नोय ममर 
कृताम) खमियोटष्ट, कात्‌दनिक याभि. नाद्म ज्लाङा 
गव्वशूर्थ। पम नष्ट वके कष्टे रृे्ट नागिन; वुष्कत्‌ 
ठेगव्र एके उ एभि] श्वि पम नष्ट नोभिलांम। (म 
य कि ङगृक्व्र तायि ख] ांमि वर्नन] कत्रि शोव्रिव न।। 

भवृरगिनि (ख।व्र कृष्न लेया वात्र वत्र कृ} 
(नेल्नाज। मोट मोद्वे उड उढे्ड कुन नैषि सड 
लाभिन; खावाव्र कृष्न लेगा मत्िष्र ठ्ठ, शोनव जाम 
ङा) कत्िगर] वव्र कादिःड लागजिलोम। र्।ज्तब्र ष्ौल 
शिरि यारेन, ८मपिट्क याः कव्रिलाम्र न]। नांविकामत 


मोश्रतिकं ५२१ 


श्ट गेत्िखन ममख्ठे विकून रटे; यामन काञ किष्ूढे 
रकेल न्‌ 

जयन क्वान क्फे८नव माशाोग यक नून दुक्ि खमिन 
डिनि वल्ि्नन, ^> बक्म्र रवर क़ शंथ (नाम) कवा 
(नङ वमव; छेनैव्द्ध ड क्फ) उगत विनी क 
गोद्त॒। «> तकम नत्रक कार्ड काषः यपि 4कफ़। छेनीःवतु 
व॒ (नद्म चाोट्रम ड ठटन .(नोणिलम्‌ निदव टकवाटुत॒ (षन) 
णृ याद्व। योव कषे नून देनोम बोमोव्र मराथाग 
4टमटृष्ट, उ "टृड (वा्वरय कृटकोया इड नतव ।* 

खमि साथश्ख्टव क्ष्ठाम कव्रिनाम, (म॒ कि, 
काशन 

कानेन वनिटनलन, “वरम (लबु दुनीश्‌) त्‌] 4ठे वदरत 
शत॒ अनवत ८रन्‌ल शत॒ रुगड वब्रटख्त॒ खभ कमम 
ोमीदफत शव (ष्ट परिट्ड नोदवर 

खोमि वलिनोम्‌, (मरे ठिक ।” 

यनि मभृदणवर गोर्न छन नौट््णं कतिर लिगं 
छारखत रेद्नकषठिक एत्ि्ड भेत्रम कब्र रृदेद्ड नाभिन। 
ऊल बजार छ्डश्चरुशेःल नेत्र गोट्न्णं कत्रिशरा दवदव छनेत 
म्लोवर निकर ङकेट्ड नांगिनल। डे व्रक्म मम मिनि 
ममर तरड कत्र] उठेल । 

नत्रभिन २१८ मो । चुम कशेट्ड छेरििर्‌। (पयि ए तिगरिट्कव 
भेण खटनकमुत॒ गदाण नविषोव रटे, कि वत्व 


५२४ मो व्क। 


[न्क 7, छक) ^ 


गृतिमिाम अयन यद्थष्टे। ऊर्व छडत्कात॒ वःछाट्मषु 
खद्‌] शरदं फिनि खट्गक्र) खार खादत छगरक्त्‌ । वृटकेत ठगेव 
(यन ङ्त अण नाथव (क षानिगु) शव्विगरष्ट। निश्रीम नटद्रङ 
उग्रशत कष्टे रेड नाजिलन। श्रीम वक्त केम्‌। खामिवाव छेन 
कम र्टठेन। ठे डलिग्र) कठि डूलिग्र) एस्रान वाथ) ङेय 
(भल । छव्‌ कुटल नठेस्‌ (मव दातत मड (षष्टे क्वि 
लाभजिनाम। उं कन्‌कन्‌ किःड, लोल, गथ] दिक्‌ 
किम्‌ ेिन। ऊर्क सथन ` खिदिभ। जमिनांम उशन 
माधोटनवत मड एेलिट्ड नानि । भनौत ट्व किटमत्‌ 


न ण न 09 ~ - नन 





धतूत चतत गक र्केट्ड नाभिन। 

कानेन निमा सथन (फविटनन कूञु.ट्न योत्र भतम कन 
किष्टूङे खलल शृढेटडाछ न, स्यन यात॒ थक्‌ उक्त अरल्व 
डरो माथाय खामिन। गृङादक मारून निण््डि ८भविदल 
८ल्नाटकं (सक्र मव्रि् ठट] खमह्व कृ} क्म्‌ वम, ५९ 
(मठेकश्‌। कश िन छिव कृत्रि] (फसिटनन छेगटवत्‌ 
दत्कत्र खन भात्र॒ (दनौ (माहे ना, शुवछे शाोखन) ठठ 
खमिग्राषठ। उथन (नोग्िलमुघ्क लिय वद्रट्क्त जउनागर 
चगतण्िकं ८ठनिम्र एग मावरिष्ड नोभनिटनम। सरोल ठेकिन 
श्वदनटनद्शे एलिष्ड नाभिन्न, कि वत्द्खत्र न वकू8 नड 
ना। काङाट्कव्र भङि आदत वाखादना जडेन; (नोप्िन्‌ 
ए विकाम वव्रक्व उलागरषोगे माद्बिहड नोभरिल; कि 
किष ष्टेल ना। उयन कानेन सश्र: कन छनोरेष्रड 


मोँविक। ०२२४ ८ 


नोशिटनन ; वदरत टेश (य एग (कषरा रृषेट्छ नातिन, 
(मरे शकित्र ङन्‌ ५४०० एन द्‌] 8४७० मन॑ । (म य़ गङि 
वत्र खवर मरिट्ड नातिन न्‌।। सक्ठ़। गहत नकं कद्ध 
(षट्‌) कानि भर वद्र एदे रृटेमां (भेल। देनैव 
ठेर निर्न वांखोटमव्र श खो मोटन (यन्‌ नव्लौवन नां 
रेन । 

८नाणिनिम्‌ उथन मद्र भरित रेडत खखिभरूट्य दूषिट्छ 
नागिन । चकग भाम्‌ एत्विग मांडरेन (वभ लांशौलं एनिद् 
नांभिन। मोभूध्न (य मव वत्रटकद्र खवर भषिट्ड नागिन उर्‌) 
श््रिखिन्न कत्रि (नाण्िनिम्‌ नष्टे4व॒ यांन ररौत््‌ म 
शएछदटणे माभू षषम एनिन । 


जशतम भिष्मं 


सामान नपौ--रशवोदनन्र ख) न्ह रूट 

छेनैव्र देरिय चामतो) मकटन जंग भिषोषेमू) वा्धाम 
यैेद्ड लोभिलो । (ध्म (य्‌ कड गष क मर्ध, छर्‌) 
तलिटड गौतिन।। वाजम (य मोनवलौवटन कड शचाःसोलनौरु 
वख छार (महेमिन मन मम खङ्ख्व कृडनोम । 

कोर (माङ) खेत पिटक एनिट्षष्ट । किङ कानेन 
यन साभाव (कान्‌ गिकं नदेश यषेट्वन? अनष 
मशोमोश्रटव ना खानााकिक मर्श? भूद मष्दर्नि 
येन माङ भर्‌।माभेव नखि रिट्वन, कवम्‌ छक शठेन 
शशिवोतव्रषाद्रिगिप्क उतर (वावा ख्केल। कठ यके याम 
(यग्रानौ (नांकष्नित मष्क (कन्‌ कथ] किष्टूठे निश्फिड कति 
वल साय न। 

००८ माक छोव्रिद्य जांमव्रा (मक-८तथ। (1.1 
<ा7ल]€) नींव टेनांम ; उाव्शतर जारकं शूनब्राम्र खादमतिकाव 
(कन्‌ ट्त िट्िक एलिन। यावांत्र मांनवङनेद्ड किरिग 
खंभिट्छष्टि छादि मन यान्न्त छत्रम टेमरिन। छदिषा्ड 
छेग्ल खगांव्र यानांटक (नटर्त (षएथगूथ शरूनत्राग्‌ खाना कि 
ठ्डेग्र ठेणिनि। मम कनि कानैदुनटक कदाव्र< (एव्र 
शङेनाम न) । 

नेतव्रमिनि उना अथिनल। एरशव्रद्वन शस्छिमि किटिक्‌ छक्र 
(मयिष्ड नालम । <| "हदसत (एन्‌ किदमाद्' ; ५ 


मों तिक] ५७५ 


य 





-~ --~---- ~~ > -- ----~-------- -------------~---~--~---~-~-~- --- ~~ -----~- ~~~ ~~ = 


पशुष स्ोनिन्‌जैग यथम अश्म अविशत्‌ कटवत्‌, उयन्‌ < 
दौगदामौ अमा (नाक्दमव्र कृषीतर ङठेटड त नैतिमोग 
(दगा छेशिष्ड (मरि्ा टेर नाम बय (वयात्‌ (पम्‌'; 
थे फौशषि व व नीर} € वन छरक्रःन गतिर्‌ । यटेयांटन 
८नाषटिनम्‌ ऊट्नव्र जना विग्र एनिन ; कटनव्र छिदि समौ 
ऊनौग चाम (मथिषड नोना, वक कपि घम टका नमन 
कुरे ! «रे वाजर्नि «ङ (मे € नैक (य कु वषु नक्‌) 
नोमा८म वौर्शिमू ताय्‌] राम्‌। ठे धामन्‌ ऊक्रनत मटर 
जम्‌रया ककष, (बोर्ड, (मनर्‌. वोम) कत्रि खट्ट 
मिन्‌ 8 अणव निरू ठे चाट्मत॒ मटशा एलिग्‌। (वष्ट । 
फकृन]1७ प्रौद्नेव्र निकङ़ खरं अकवा ङ}ऽग्र। नडेव] दर 
जक छामिगरा छेरिनि; छोत्रगव्र शूना र्दिष्रा योद्मविकत् 
एेगेकृल षाभिग् एलिट्रड नागिन । ७त्‌। थिन नषदनीनिम) 
भिष्टन खनिम्‌। तोडे5-(छ-श्र)ख)व सथन्ख (मोर्ना व॒ निकष 
मरार (शौषिनि। 891 ययन चेकशटयवर भेकगेत्न मरेन तुह 
शक्रा जोर) एलिटड लागिन । (मडेकिनि छ्मिव्‌ कत्वा 
(गेरि खांमवरा (नामिनटम मक्दङ्क्त ५८,००० रखोत्‌ मरेन 
एलिरषि। (वल अजो ममम "कन्‌. खो शोत टम्‌ 
षरं अमद फजनेखिट्ड ण्डत पिटक एनिट्ड लःगिन । 
(न मन्न कव्रिशाशिनि (वकिटनव छेनैकृट्न लोराकं (नौोषिटन 
भ।३।ख ङृदेट्र नांनाेट्व ; कि (वकिघ्नव्र निक छाश 4२ 
(ष!(व एनिटड नोगिन (व खांमादफवर 9] गोश चुर्िघ्ट नागिन; 


>७२ मो भविक 


णी +~ - ~-~-- ~ ~ ----*- ~+ ~~ # 1 ~~ ५. छ ^ ५५ ^ ५ ५ ५ ११८ ५० = ५ 


मन कि ए 4कक़] छेष्डौग्रमोन र्स्मकांङौग्र गायौ माथ। चुत्रिषर 
कऊारृ)ट्छनत्र छेशत्र नैडिनि। कट्सकपिन सव लोर] खत ठे 
ङ्न मभांनाट्व तयि] ञे थ्न छात्िट्थं खादमतिकोत्‌ 
जकवाटक्र नेश्छिमिरिगवदौ छेनकृटन स्थर (कने.मं। बरटकद 
मिक्हे कारो (शौष्िनि। वशेथाटन सोर भरुनतोस्‌ ्दिभ् 
एलिल । 

एेमिन नेद्व यर्थार्‌ »भडे यथिन जोविद्रय (नोणनिम्‌ 
श्रूनव्रामर छाभम छेरिन। मामनटे अोभांखन नणौव्र दलन 
वंशौ सविखुङ (माङ्न)। «ड श नौव पूयं शुंधिदौव 
योत्र (काननप्रौवनाठे। सद्र खामांकन नमौ नैशिवौव्र मम नौ 
अट्शक्त] वृङ< € मौर्ध ; ठेकांद (कवा एति राकाव्र माटेदनव्र€ 
खअ्शिक्‌ | कड दर्म (चात खक्रटनव्र अशा मिग यट नौ वरिम 
आमिर । अमन सयम नमौड चात्र (काशोग्र नाढे ; मगरूय 
रटे ॒वल्पूतर गया ठेङाव्र यक वकं सागूणा चख डा (द 
नफौट्क जभृख दलिमर। मन र्म। जडे नौ खक मभूत 
छेन (य कड नक्र नक्र मन खनौल छात्र मिकोनो नौढे। 
केकाव्र (म)रनात निक्ष श्षेटड मभूत वङ्‌ गोठेल नर्या कल 
अटि स॒ख)ए। नमौत्रषरेवांटतव्र मौ खार ठेदवव्रा ; मरय 
मरुख मरेन विड ऊमौत्र हेनेव्र (षाव खत्रग । हे मव ऊक्रन 
< व वु शष्ट मन धनजोटव ऊग्मिमराक (य मडि 
सृट्वीव्र बटन] शख््डि नोट्वन); (महे कख ऊक्रट्लव्र मलदा 
रिटनव्र (वन)€ (वात्र अक्को, खांद्र मारि द<मदटवरत्र मः 


मोँशविक > ७७ 


- ~~ +~ ~- ~--~-~---------*+ ~~~ ~~~ ~ ----+~~-~-~ ~~ ~~ ~~~ ~--------~-------*~-~-~--~- ---- ~~~ -+----.--~ ~~ ~ +~ ~~ ~ --~ ~~ ---- ---~ -- --- -~------ - - 


ममर छक) (मंउटमं द । नपौकृटलब्र थे मव खक्रटन अ 
पौरं ७ यर (द्यंनौन भष ोष्ट (य (पयिट्न खनी उटेट्ड 
ग; खगवर (फटनैत दए व्‌] खर्व शोष उड (द्यौनील 
खांवर वषु नटछ्‌। लङेथटन यजन नष्ट8 (फचिदड नोस साय, 
स] ङ्‌}टमत्र वयम र) कत्र एरू-ठ लोत्‌ वरमाटवव € (वन्भौ । षठ) ्त्‌ 
उनो कड व्रक्ट्भतव्र वङ् नटन) ¶ छ € खांनष्ट खन्राठेगाटृष ! 
नोनि मन चनवष्कछाव शषटखनिःउ काठम्‌ ठेरिगा?छ 
< क्‌ शष्ट कड जात॒ कं शै लछोटेय) निरा ८य 
मोक्रूव पृटतव्र कथ), वट्नवर॒ गखनेक्कोऽ ठेठान मा नेथ 
कविम्‌ एकिट्ड नैट्वन। ययाटन ङोजाव राखात्‌ माटेटलत्‌ 
मट्शा€ <कफि ऊनयथाोगो (पयिटड नैम सास॒न।। कऊमौ 4८ 
खमष्व छेर्ववब्रा, 4 नेनौराषटट्ठ शर्म, छव्‌ (कशे सथोःन 
सवाम कृद्तन)। कौव्रम्‌ अमन नेक 8 मांरुम काशोत्र 
नारे ध्य, ठे खक्रटलत मद्वा जट कट्त्‌। खोकिकावर 
ऊक्रल € «ऊ गहत नमू । रे मक्न खक्रटन विस्त मर््नत 
गुब्रिमम्‌ (पखिट्न ख्य मर्द्द मदरौट्त कट रिम देट्े। 
गोट खलाय उलांय्र, (द्भव कटकं खनौटक, लजाशं)व्‌ 
अङ्त्रो्न, खट्ग गोटे, एङक्षिटक्‌ नक्र लक्र दषा मरन 
कुख्लौ नाकांटेम्‌), श्रग्णेत॒ नैत्न्नेतुत्कं ऊ्ाटठेय्‌ा केम) 
खोट । मोट्नैव्‌ मन (जारे खात (कोथ (पयि न्म) 
यांग ना। छोदनेव्र कृमौव्र, तिव्रगिषठि बाकमा, बकु 
:भेटष्ट ककु] | लहे मव माक्रमा € (नष्ट कौकटट्मत्र 


०७8 मँशतिका 


८य कि छव्रकृत्र खांक)त छ) (जामत किष्ूःङे छादिम्र) देश्िट्ड 
शौ॑व्द्वन)। वट्नव्र महा पएोत्रिगिद्कङे नपौ, नान, रौषि, 





(श्‌ काक 
कना- ममर्द मोद नत्रम्‌, किध दडेवांज्र (कंडे नाड) 
खोमाकन नौ शृशिवौव मदा ठगेवोटनत यक गोनी कष्ट! 


मोँविक्‌। ८९ 


` विबुवट्द्रथ। शत्र र्टेनोय। कुर भडिल श्छ 

व्रामौएणतव गिन तखा । यरेरटन गानाटन भूवरे म्व 
शिन्‌, किदे वयानकात्र मबरूण सड छौरम (एषे ८य, मोक्स 
(नोक) नाड मांङ्म क्ब न।। (नख कमान विखन- 
मदनोव्रथ ठदेमरा कथम मभिमर। बारेट्ड नाभिन। 

४२ अथिल जात्यं खन ८कनिष्] मबद नाना कौमु 
माष € मानि शव] रेन; (नश्वरम्‌ (मानश्‌, योना, 
काषिन्‌ मष्ट, टेक मो, केन्‌ मोष्ट-थक कणि शनत 
के पध, थूव वाक्र[ ङ्व ्टौना-कटची खनि कृष माठ; 





. (भोगत्र 
कृक्राल मोष, भाकावन्‌, मांलमन्‌ ङ्ध खनक बो 


खमा्मत जान नैख्नि। 

<ङथोटन यकि कोखकनु च़ेनोत कश) छेल्वथ क्रिडक्टि | 
ऊ।(लत अदधा कषे (श्प) ( (नकल नारे) बानौकं गष 
गख््थिशलि। मोषे नखरे नाका लोङोकतु 


५७७ मोश्रैतिक। 


किनाव्रांय निय (गौषश्ारेन; खांव थक नार भोद्विःनङॐे जलन 
भिस] शैङिद्व। कनटमन्‌ जांखाड)खि गाषटषठे)टकं शवरि (नैन; 





करत्‌ 

मष्ाटक्‌ (यमन ष्टरठेग्राटषछठ खमनि व्यू नीषूएि डूनिश्र] कनूट्मन्‌ 
छिन शांड उरोटड शिठ़ेकाठ़म्‌) शषिनि! छात्र (मकि ककरण 
षएौ<का व्र--“अ््‌ वीषएठान, (भनूम, (भनूम !* उक्त मर्वाक 
खमांद्र केर भिग्राष्ट; (नख. € जामि ष्ठम्‌) भिगा डौ"टक 
ङ्निलांम ; रो गगरं धथमिट्ड चभमिष््ड उट्व छोरोव॒ घ्ठान 
शित्रिय। खांमिन। वन] व]क्ला ढे खटलकम)ष्टश्नि उछि 
गब्रिधर्ण्‌ | 


खए. भिंमानात्र मादव्रानि नत्र मुटदतर काष्ट खांमियं 


मोँशविकं। ५१ 


५ ५ न ०५५०९ ५ ६.५९. 979 ५८ श = ४ 


गुखिनाज । यकेथौटन <कजैकोवत्‌ ऊंनलं्धे नेक्तव मड मगूदणंत्‌ 
ऊनो घाम य2.| निय {एतम कंत्ि्डछिनि; ठेर] 





मानष 
नाम मानि; देडावर एटा मषटवराएत सकृन्‌ कुरर इठे 
थाक । ठशौत्‌। जजार शौत॒ अकृङि) मभूत य 
खोशाषट यागा ठेराव्रा मोनवङ्नीहखव ध्य कड रेगैकात 


कट्वर डाङाव मौ नाङे। किङ मत्र मादम्‌) निकातौतु 
न चेहाटम्व नूच करिक्| शिष्ठ; (मषेखक षाव्ििभिट्क 
कलपतर, भानव] 4 (वनो ८एय्‌] किषडद । 

जहेथाटन खानक्थ्नि उङिकाग क्ष्ण छटलव शैव 
खोमिघ्डशिनि; लक करे कन य विनि जिने मम, 
ठेठटपव्र॒निष्छैव (शान) < गक (ध्य रतश बोद्विःल 
किष्टरङ्ग्रन)। (नए. अछि (कोगटन ठेशोमत (शष्टटनव गोग 
भित्र कम्‌ नने! ठेग) षट] विग्र ऊीराटक डनिन । 


खण्ग शत्र 
खट्लोशम व] मोगुखिक ब्राक्रम 

वठेदवर सखराङोल योमव्रिकोव्र छेगकृन जाभे क्रि 
का)व्रिविग्रान माशेद शोत र्कम] खाेलाोफिक भङ्ामोगद्त 
शिय) श॑खिनि। भ्थ्टे विल डव्रिघ्य खाभतर] भांतूखिनिक्‌ 
< शयापातूने पौनेश्रू (फविदृड नोषठेलनाम। जहे ष्ठोगशनि 
रतामौताछाव बवौएन। पूव ङृषेटर गर्ववखएश्ति छातौ 
सन्त (्यैष्ेट्टछ्नि। 

गमाम र्षेल ऊषा वन््ौखाट्म वशि, खवु 
गोलाटेवाव्र ८कोन छेनाम्‌ ८यिष्ड नीठेनोमर न । कान व 
क] यागे) क्व] एत्राग) माव। अर्थिक खाक यकमा 
याव कानेन मदृधा खटनकं शंद्विवर्न {पेथिष्स 
गैङ्केःडषिनिभ। ठषशाध्कं उ गात्‌ (नविद्ड्के नहता यापर 
नो; शव्द परापत माकर ठव मठे सतीकोत्र मतन 
सूमशुत्र वाव्ाव्र (फयि८ शाका ना। अयन छिनि वष्ट 
(वभो भषौवर € वद्रकुथ्‌। ठट) शष्ग्ाषठन। (कोन कश 
किक्ाम। कत्रि खानख)ःव ठे ना€ग्‌। गांठे न।| 

छकार चयन एवि एलिग्ा४। देष्ोन मौवक्लशाव 
जनक नून यत्र मःथक कव्विलाम । नान। अकांत खषुडौकृरि 
मोठ £ ऊलङ्द (पवि गमात्‌ यतमा उ्डानरिनैम) 


मोशंविक्‌) 


न 0 क, ज क, क्‌ + 


मिषेद्ड नांभिनाम। वदेथोटन यकि मूडन कन (टय 
शेरिल, उ1र। (एरिट्ड खखि.विकिष़े। २०८ग यिन जावि 
यमत्र) वारम) दौगशरूटछत निके (नैीष्टाडेनोम। वदटेथाटन 
छट्नव छन्नाग वु वु नशत बश्च खमश्या शखत्र | 
ठे मव शेश्वाव शरून्न वा खट्द्गोद्मजत्‌ दाम | 

मभूणत ठे साग्र] शृन्नमत्र खोख्छ। दनिटन€ 
एएन । ठेरंत्‌। जछि खगक्षैत खनखदध। (जात्‌ म ठेरटम्त्‌ 
खक्रडि, खाोत्र (टक नक्कि अमहव। श्रूाकोन केर 
के शरूल्र 7मव मक्र कड यांङ्व काशिनौ (लोट्कत भूय॑ 
मृघ्य षएलिग्र खोजि्डाष्ठ। यके शरून्न्‌ न कि वरु वु 
जारः निरव खे नै} पिम कंाेम्‌] रट्नव छित्‌ 
ठा निय। नण; ठे शरन्नक दोग बटन कत्म] (कं ककः 
गौणौ ठेठात निष्छेत देनैव गिक्छ) ट्छवरौ करिगोरिनि, िक्छ 
(यमन (मैव ठृटेन, अमनि मक्र मक्र जिख्छ) कटनतर॒ ठेशत 
एनिट नोतिन < (फयिदड (फयिट्ड विग्र) (भेन । सठेर्नि 
ख।छश्नि शन्न; कि खोकश्ि शन्न लके] मम्नूर्मं मिशा। 
क्थ] नहम्‌ घ्नो छ्य न),-रटेराव अशा किष न्‌ किष 
जडा बष्। गौकमावर नन (वरेक्श ठेक1णव ख)कृरि 
जनके (मरेक्रशे (मविष्ड। केशोट्ण्व (गान श्ंषेलौ 
(मरि कृषि कृषे पौ; (करुकड बड्ड ख़षएठि भ) दोरिति 
रुग, यक यकि न रशमडाल्निनं कुषे पौर्ध। दवुद्धिम्‌। 
(फं कुणि कुषे पौव अक्षि (मक ्टेट्ड खोप गिकं 


५8० मोगत्रिक 


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ख़ नै) वारिति र्षेगराटष्ट! ट्छाक नोट्तव मगन ' 
्टकत्र भर कर| उगत नय-कि गषत ८मङे खं ! नारि कं- 
भेण गक मनूख्टफटमे धके नेन्न (दिष्ड नम । य नेयार्‌ (कक 
क़} शन्न. धव्िाट्् व बआतिमष्ट वनिम्‌ (मान) योग नके; 
कावण ठेराम्त भव्रौटव्रत्र मारम यख नत्रम, 4 थन्‌थटन, यं 
रत्र ८य, श्नि द] ःत॒भरून ठेठणत्‌ (एक विद्रव न। 
ठेर]प्व दक कष्ट श] (यन <कं <कषि खजव मान; 
(मर्त छेगत षरे (षष्ठे खाद खाघ्व (षाय खाट, नुट्थवर 
र्न णग नायौव्र (कव म । 

कदत छानांलांतर निक्षे वमिग्ा (नख, कन्‌मन्‌ ऽ 
यामि ये चरन्न ट्त मङ्रक् न्न कब्रिटटष्टि, समन मेमटय 
नउ त्को कब्िश्] ठेरिन, “कि उग्रह्द सकए ऊन 
(भुन्‌ | (ज्सिनरा खामात्‌ न) क़) जिम्‌] टेर । मामूनद 
धके छग्क्त शृन्न, ठाव (पठ एलिम गु मौ, शध्याक 
ण] शकं यु मौर्ध! ऊार्कत्‌ रिकं (चोल) एः 
८मलिग्र। अङि छौवनेदवनं शन्न. बामोदणत्र गोधन पटिम 
खामिटरुशन्न। छोङातव्र खाहि नोद्ग्रत्र किनूदिनूनि ८फसिमु) 
यामव) टम्‌ रक{निष्ड नातिनाम); “ढे सषि नै ण्स 
र)रुछटक छंखोटेग। भविन (नाषिल्मव यमन गक नाड 
(य (म निङट्क बरुङ्‌ काटव्र। गीयत उना २८८ नर्व; 
गुटदत ठे हिद्मानायौत (दत मडन, (मष (कवन शुनिटडःछ 
< वक्र कब्रिहडाष्ट। श्रूटथत्र खड काटग्रक माबि क, शिव 


मोभद्िक। | ०8५ 


0 [1 


[ 1 1 का प्‌ 2 0 १ ० भ त ०, श, क) 





= ० -- भ जके, 


जाट्नैव्र किदट्वव्र ब ष्रढेथ८७ विक । याट्वा खांवीञ्नक 
ठेठत भो्व वर! उग्र € र्श्मि खङ््याशौ कचटन नान, 
कथटना कोट्न), जावोत कयटना द्‌ गुमन्र वरन्‌ ङ्टे्ङश्िनि। 
ङशवाटनव्र कि खशक्रनै रुष्ट वे शन्न. 

ज)र्]7कंत्र खाोटना (पर्थिष) (एथ (कयि खाटव 
करक्रनि शूत्र. जोजिग्र ङाकिद्र र्टेन; श्निब्र (विनाम 
माए] । (नांएिनम्‌ ख्व एनिटखदष्ट, शून्न.शनि < लोराटकत 
शु] € शिष्टटन मवि पिम्रौ एनिन; कथन कयटन] 
(रष पिया कत्र ठेगत धर्षणे कब्रिटड लांगिन। ङ्श 
ऊारुखं थामिग्रा (भन, ऊाराट्लत मक्वांक्र त्‌ भेत्‌ कलि) 
कैाभिग्र देिन। 

कशुन निमा लकङन क्र्ष्ठतौट्क मटक नङ्केशु 
चातव ङ्व ओव कव्िटलनः; जामा अछि न 
डकाम्‌) (मां जानानांत्र निक्ढ़े निग शरन्‌ शनि निक्रौकम, 
कतिः नांशिदटनन ; नैव कर्न बौट्क कि वलिट्ड (म वाोशिःत 
निग कानानावर उक) वक्ष कत्रि) फिनि। माक मटक 
खार ख< ऊटनद्र छेनैत्र छभिमू। टेमिन । 

कान हटनत्र निक्फ़े खयम्‌ श्टेश सामि दलिनाम, 
“कि यनक खं! वड शृल्न जट्क्वाोट्त (काशा (शृट्क 
यन?" 

कान्‌ छेन वनिटनन, ^|, यन खोमा्पव दमत माश्र 
लड रट्व। कारोट्कत्र (व्व मल्क शूट्नव्र अक्षे) न 


ऽ मोभैबिक्‌। 


~“ ~~~ -~ ~~ ---~----~-~----~- ~~~ ~~~ ---------~-~ ---+ ~~~ ~~~ ~ ~~~ ~~ ~----~-- ~ ---~ ~“ -=~ ~= ~ => ~= = स 


खष्ग (नष्ट ; (महेलढ कारां एन्‌टड नवह न] । मतु 
मटक नषे कत्र) मोटन मव्रहणैवर मटक युक्त कत्र; ठेकामत्‌ 
ग्य न) वद्म शनि, न्‌ वम शोतब्रनून! कृष्न हाड कटवत्‌ 
लड ट्व |“ 

(नख जषव्डांमा किल, “साभवत्‌ कि जानना माक 
ठे बुटक्त (षाग पिद्ड नोविन) १ 

कनन वलिट्लन, ^८छांमव] उष कवि7नटे जामत 
मक्र (यड नाव्‌ ।“ 

कन एे7नत मक्र खामवर। खिन्न कऊाडद्खत्र छाटमवृ 
छेशतव भिं छेगशिडि ठ्ठेनाम। कनू्मन्‌ € खाम्‌ > 
कषठे। कृट्व्‌ कृष्न, ८नट्रत्र राष्ट छग्रव थक्‌ रावशरून। 
लाठाट्कत छेनव जागर एमवादब्र) कन नोदिकं कुष्न डा 
यूट्कतर ऊष यख उवेगश्िनि। कखन नोिक्‌ नद्नटलव्र 
छ शूनिगरा मिन; (व्र. खान्‌शे। ३ठेटर्छे वकष ोवव श 
गृहक कट्रक्वात्‌ एूलिग्र) कऊट्नत॒ ङ्त विष) ८गल। मक्र 
जाकर षात्‌ रखेशव ओंम सक्‌ कुडि न] ामिष् देनखि 
र्ठेन। कााशठेन निष्रम। कृष्ग्नत्न वकं शट चागो 
क्षे] न एड कविय) प्ट्लिन; माक माकर दढ] न 
गूट्क छेटिमरा यानिकक्र लिक्लिक्‌ कब्रिग्रं काोशएनव्र मन्पट् 
(य नोविकषनि पटोकेमोषठिलि उरक ऊांटेम। वतिय श्रृनत 
गृ्कव्र ठेनत्र टलिय्रा वविन। कानेन निदमो षएौरकात्र 
कद्वव मापन एूषटि्र यार्ट्नन। यांमतव्रो5 एषम (भनांम। 


~ ~ ०,~-~~-~ 


मुभ व्िकः] -8 


"-"~ ~ ----- -~------- ~~~ -~--=~----------------~---~--------~-~ = -- --- ~ -~ +~ न 


(म कि मर्ष्िक ककरन एश ! ञुज्डोना नाविक शूटलव 
कवट्न गट एरूनिटर नोगिन ७ मृङ्‌] यज्रनाग्र ष्टके कत्रि 
नाशिन । गी एरूनि्ड दएरूनिट्ड (म कतमौ छाग 
एौश्कोत्र कद्र टेिन,--वौषए)€ वौए€!* जामि 
6मकाषेग॒] देषिनाम। लाराद्ल रौर) उठेल जागाद 
(पटने वरे कखन (लांक शिनि; <छणिनि भथा) विक्गाङौश 
छाषांग कंश] करम) यामि खाक गृद्ागद्र्य शग ८म 
खांनैन माडछासाम्‌ एौ< कत्र कत्रि ठेरिन | 

^तए]1€ ! वृीएख !* (म कि कंकन खमष्म एौ<कन- 
द्वनि । अयन जरत्‌ एो<काव खामोव्र कान वाकिटजष्ट्‌। 
८मडे तोक्रम्ना ऊनलखव्र॒॒ र} णढेःड (कं )र््‌]टक 
दौारेट्व? मव्रम छोरा सूनिश्छ्डि। वृ कानेन निम 
कृष्न शार षग यषघ्रा चरून्नत् सका श रिय 
कंव्विट्लन। ऊकाकंव छेनव्र उथन यनक्श्नि न्‌ खाभिय 
गेणिशिट््। ऊं)ठोट्लतर य नाविकं ७ कश्षावौ षूषषटूएि 
क्रिस (य यर शोतिन नै। कांणिष्रड नोन । (नख, कन्‌टमन्‌ 
< खांमि (महे मकन वौरुरम मारमनिटछवर ठेव षा।एवा]ए 
कुन वमादे्र लातरिनाम। भक्‌ स्क विक्लाोग्र कं 
नैकर एोतिपरिक जाम) स्के ठेरिन। उयन्‌ कोना 
नोदिकषि शरटनरव्र नो वूलिख्रा गोनद्रकव्र भु शचूटक 
एनिएउशिनि। कोशेन (वषे (महे) काषिव्ठ बांरेट्वन 
खमनि शन्न निप्ञव्र (मर्‌ शुटेट्ड योनक)रतोव्र मर <कथेक्‌द्र 





५5५8 मुँ¶बिक्‌ 





काटन) एर््कमम् जलन द॒ शव्रिमोए वहित कबिग] मकनटक 
सक्र क्रिम्‌] त्नि। जानकाडवराद (मव कषम याडेट्न (८मयि- 
लाम शृन्न षि कलव ज्नांग्र खनु ठटेगराटष् ; एरछांगा (नाकि 
माक मटक क्न उनोग भिग्रा् । पम वाद्वा शून 
यन जामामव माकर यृदधिःङुशटिनि। (नए.नां क्रिशचैवर मछ 
उ।राटमव्र काषटिदडशिनि ; समन मभश्र (नाख्त्‌ अनटक्रा ५ क़] 
नै] शिष्टन रढेटड (नदक रऊराठेग धत्िःड (गेल । (नस्‌ (नेन, 
(नेल! अमन ममम का]नष्फेन उव्िडनेष्ण षष्टि) तिमर) (मड 
नो एरेय७ कत्म] (कलिःलन । 

नेटनत्र मिष युक्षव शेव शरषब्व्र फ़ल क्रडविक्रड छृटेमं 
भानदरेगरा (भेल। वृक € कालिट्ट अमर) ङ्ट्डतर॒ मज 
कारुषेा त्खिनाम। कानेन न्ष ममूट्सव नटन 
शिविकषटि ८मलिम्‌। खनैलकनावे रैष्ाठष्र बशिटलन : ऊरोवर 
क मन्नौकं मभू खक प्रोनिम गनेन | (फिट (यि 
काश्‌ एनत एकर रदे्ड व वु ऊटनव्र (कंठ) ठय 
शुषिःड लःनिन । 


997 ~~ अ न > ~ ~ --- ~ ~~~ ¬ न= +न = + ~ ~ = => ~+ + ~+ ~+ ~ -~ ५ ~ ५ ~ ७ 


ठेनवि९भं नंव्टष्छत 


मारे्करोन्‌ 

> ०८ विदलन (मठे (गषएनौय शफेन यामव) (करे 
ङ्लिन्ड नोव्रिन्ाम न। कश ेन अद्नकक्र मभूत्‌ 
िट्कं एर्व कमिट्ड नांजिटनन; छोव्रशेव्र निटकव षट्‌ 
कर्म] (नैलन। कंट्युक्‌ पिन भैवाङ खांवत॒ छर्‌)ट्रकं (कयि 
गोटेलनांमनो। ॐीर्‌)व्र॑ खमक बटनोप्वमन € एर्व (छाए 
(यन जरर श्म ननाोनिन। कट्मुकृ्ठिनि तिम्‌) 
८नाष्रिलम्‌ मभष्रणव जनडध जमौम दुट्कंव गत्र पिमा छेक 
रौन नक्रारौन बोमप्यमानिव्‌ मड एनिःड नातिन । मभूद्रखत्‌ 
य खान उडी नोविक्षठि शरूट्नरद क्वटन नखान 
क्त्रिरिनि, सारं (कवन दूरव्िशा धू्रिम्र| (मरे टन 
खामिट्ड नोनिन। मंभपिन गिक समनछोट्व कृषिन। 

डात्रनेत ऽना ८ लोशालं शनत रेव श्ट्कं एनिट्छ 
नाजिन ; वोरोम। ौगश्रूं अख्ककिम कतिर ख।र)खं थरेवात 
।दमब्रिकांत्र छेनकून शत्य छ्डतखिभरूटय शेन कत्रिटय 
नाभिल। ण्डे ८ खगत] राट्डताम्‌ खत्रौशै (पशिट्छ 
नरेलनोम। जोरोट्छव 9खि लयन (मरे ाखटडान) 
ठेमजौत्र ब ; 9१ खि 8 पि्कब्र (कान शिव्रड] नोटे। <न 
धमता खमरया जारा, धमातर ७ (ष्टा (ष्टो मांष्टशतरात 


५ © 


५७९ मोभरैविक। 


थी == +~ + > भ 


(नोक] (पयिल्ड नैषेनाम। कारो रशे ख)ःमवरिक)तर 
रेनकृन गाज॒जिगे माडेन मट्बर । 

गु†नाङरेवात खक (नख ख ८षएष्ट। कव्िट्ड लानिन, ङतदन 
(यन नट्फ शट वश] ग्ड नाजिटनन। «टे खनत अवख] 
व्क यात्राग ; ऊन, मादेटकरान्‌, राविदकन ड म्वा 
नोभिं्। खाट) (नोकागरषुषिवि) गाला जामत मोङ्म 
कव्रिलाम न।| 

८मख. जगट्कं वनिन, “थ, मक्के (मक्त घड्ि्ठड। 
युवे ठट्य॒टष्ट, यन छेत (अक्ट्णमे (एय्‌ चोन चः 'व धंवृचि 
नाढे। य वुदधष्टि कान देन ऊ अथैन रेड (मक्त पिटक 
एनान । खाशनि त॒ या-८र्]क वक्ङ़े। यैखिकाव ककन ।” 

जामि वलिलाम, “नख, कि क्वि वल]; मम॒ट््तव श 
जवस्‌! उड (नोकाग्र एट्ड गानां ड छत्रम) ङ्य न) ।* 

८नय्‌ दिल, “नून अमबर! कान देनदक भिद्य वलि; 
डि निण्म खांमाोद्मत दरश्य वुक्ट्वन। ांनैनात्‌ खम- 
(मागत नांगे रिटि कारांख यथन टला उथन ङ खाशनि 
८वन्े एूनैएाश खोम्‌षड ना द्रदनन ; कद्ध जामि चांतर नात्र 
ना। खमृट्हे आमत्र (मम्‌; यथन छांवि निरेके ना†७ 
परौटशव्र॒ निके (मके. मव्रम. नौ याम नेष्ट, यत्र (मने 
(मन्रे, नाःव्रम्‌ नपरौत्र शाबर कुषेटवक मष, योत्र ८मङ़े मङट > 
सखोमाव्र वाष्ी, उयन यांमात्‌ त्राणै दशय मबु कने शिष्‌ 
नैष ठेषछ] कट्वर ।* 


मजि क] > ५4 


आजि वलिनाम, “कानेन उ 4 मशक ठत बिगर 
खामाद्मेव्र बोट्नेडे कजौनिद्यष्टन ।" 

८न्‌ वनिन, “ङ। ठटल €, खातर कवा बोशनि यान्‌ ।” 

किकडि, अगे] कान टटनवर कोष्ट तिम) वलां ठिक 
कविनलोभ। कान नव्र॒ (मजाक (८य याोङंकाल वटकेवःटत्‌ 
वोङयाद्रे याम नाभिग्राठ उाढ) वामि उोनक्टश॑ठे जानिरःम। 
ख्व्‌ मष्भिर पि्।-कृषडि प्रह वातत द्रात शूलिगरा 
ख्व यध्वं कत्रिलोबि। कानेन प्रतर डिरवहे 
छिटनन; विलतं शेनैव कूक्िगि कि लििद्ररश्ि्लन। 
ङाराव मामन त्रिग्र तीरोष्ज्डे खिति मोथा डलिम्। खामात्‌ 
नटन कमह कविस्ा एाशिष्डि लाशिएनन; कंकाल शेक्तत 
क? वनिटनन्‌, “क मव्रकाद् गनात्‌ वोन ?" 

लस्जाग्‌ दिशश्‌ यन यौमि गरविष (भगनामः; वु ब्रूत॒ 
मद्व `खाख]विक भशृखं क्7४ वलिलाम, “खाननावर॒ काद 
गागात्र रिष्ट वन्‌वांत्र बाद ।“ 

छनि वलिटलन, “किङ (यड शोा्ष््ेन आति वयन 
काणं कुष्ट" 

ॐंराव दे छेथगूखि (मिग) यामि वादवराडेनाम्‌ ना; 
वनिनोम, «यामव ययन मन अवचय शटि ८य, (दौ कवर 
मङ्व्नैव नम्र । 

खिनि जिख्छांम। कव्िदलन, “कि श्द्गष्ठ? मभूत्‌ ए्नेवु 
नउन किष (मयू (गस्ष्टन १ कि इदमह, वनून ।' 


> 8८ मोगैर्विक। 


न न ^ ५ ४ न = ५ --१- -> =^ ५ ~^ # 0 ~ [0 


खमि रेवात्र णिति यविषिनिरकट४ वनिनाम, “कान टेन 
खामरत्‌। खागाटमवर खबौनोव ङक खांशेनात्‌ कौटष्ट नोर्थन] 
ङौ नाड टमि ” 

कन्न (सन जाकाग्‌ शेः नखिटिलन, वलिटनन, 
“राशीना ऊक |” 

ये] काश्‌ (ठन ; बार मार मोम ङ्'न खाननोत्र ङा 
दन्पौ श्ट त॒दगश्टि। सेवा खगा खाशौनड) कित्व 
णिनि)" | 

--“थेटकमात ! मड माम खाने स] वटनष्टि खांङ< ढे 
वनि ; (नाण्िनि्म याव) 4कदाव्र शट्वम्भे नो कृट्तद्ठ खात 
डावर 4 कारक (ष्टु (८वटड नैोतरत्व ना। बाशनात्‌। मिष्ट 
सक्राःता्वं कब्र वटमाःष्टन | | 

“कि, (नट्ख्व कश अकदांव॒ (उद्व (फथून); खामिन 
रुग आनना कार्ाढक मोत)कौदन दन्मााट्व्‌ तुहेनूम { कि 
८म खाशौनछाटव एवकाल--" 

--^८कांन कथ यामि अन्डषटेना। जात शिडौगरवादर 
८य॒न क्न खाकतर त्रामात्र काट्न न खाोटम | 

८नट्खत्र कोष्ट कि्व्िय्र खामिमू। मव कंथ वलिनामर। 
ऊाकाक उथन न8. द्रौण कष्टाकाषणि यामिग्माछिनि। (नयु 
दलिन्न, “मांगने नड. प्ठौश, (यमन कट्बरहरे (रोक खा 
भान्‌ इव, यड खनद (कोक्‌ न ८कन ।" 

चाकाद्रमव्र .खदश््‌] उयन वे छग्रकत | चन (म 


मुत्र क  :८8> 


न ~ ~ + ~ ५ ५ ५ "~ ~ =^ = = ~~ ^ = ~~~ 





--~-=--~------ 


एटा त्िक्कि उक्रकत॒। ठुज्िःकाःवत॒ मभ्रख शं नृन्‌ ल्क १20 
ए्लि। त्‌ ब्रूथ नषि) दरीमन ब्र वन भाप ठेर 
ठेठिल। मभूत्‌ ऊटलत रेनेव कड नोय रेषिग् (वष्र, 
गमङ्के (कांथांगु खक्शर्केन; (कवन्न (गेदर्ेन्‌ नौयौत॒ एल 
कछु रृषएन) (परिसा यांनान् मोच्य) ठेर नोजिन्न। ढ़ 
गन्‌ नांयौव यौत वकष्टि नमर ददत्‌ नाचौ । 

(मनिनि ष्ठे ८्म। मागन लष पौ, बणृत निदे 
केयर्क ननेतौ। मबरू्यव माठक्ान्‌ जनि ८य कि ढाके 
त्दधिवाब्रज्क कानेन निद्रम। डि पिम निद्सटरकं ष्टटएतु 
छेशुत॒ वौशि्लनः; (कथयि यांमि€ जारे कविलामर | 
चाभोमत एूलनट्क नेम (नापिनम्‌ ऊन छेनैव छाभिट् 
न्ाज्िन। छात्र (पयिष्रड (पथिटड दट्र्व ठेष्लोम नृडारांटन 
मभ्ूखङल वरु व्‌ (ए टलिग्। इ] शरेश्ा गेरि नाश्रिन । 
व व शा] मख मोप माम्‌ (एषे मायात्र ठेशेत॒ रिष) 
एलिय! यार्ड नागिन । कवाव ठे}निग्‌ ठि, ८८ एनिमू। 
शटल जावा पम नडे शौकि। (नांणिलिम्‌ कथन ए 
केम), कथुट्ना कं< रषे, कथन) व) (माल) शारु रटेम। 
ठकि (च्यव माक थानेन बुखिद्ड नागिन । (वल) 
नौषएहात॒ मम यदत्शौःत्‌ वृष्टि नखि्ड लानिन: दृष्टि 
म कि वष व (11 | मभूख ८य जव (एषे ेरिड नोभिंल 
डक नट्या भानव कुक चक्क € नीषएशेर कृषे मौर्। 
वृङिलोम्र जे मव द्ब्र मूट्थ शष वु वष बलिक, 


४८० माशेव्िक। 
नाष, गोशव्र मद छन याग। दत्र (म कि छांश्नोनन) | 
तदित मक्र मकर कारव एानैषठे (यन दांग (भेन । <कयान 
म्व ऊक कषद भरूटय शटग्रं ८4 रियर) रिष 
नि नागिन : वृरिलिामर छाशातर खात दए (वगो (पवर 
नोे। (एचि (थिह ऊ।र)कथानि ऊन द्विष्‌ (भन । 
वायि पमेव ममम यकाट्रणे (सन योर्न नांगिगुः (भल; 
घन टन दिषाश्मिशग (षाय कलमा (भल । वशत डौष 
वखावाट्ठ मादर डदन किमा डेरिद्रट नागिल। 

व्रा वाट्वाठोव्र ममर खामव्रा खानूएन नोमिष्रां जाजिलोम। 
द्द उयन€ ममांनडाएव एलिडशनि। खोक यन शौव 
शौःद कलत ख्व एविल। वु कु भाष्टाणेत (षःय 
खार्‌ क (विष्ट नाठेनाम। (षेव नानैव (क 
माष्टश्नि बष्टाणि शिष्टाएि शष्ेडश्नि। खात्‌ उला 
कका नागरिल। (मथन साकवातर मिष्क्र। द्व्‌ 
ष्क्िमावं नाठे। (क दलि्दव टेश उस्म मकेःकान 


रृषेउष | 


दिर्गै भब्द 
नगूटलंतर उल (छनि गरू डोव 


दात्र मागे खारांल खाटवर शृरदतिट्क निग्र भेडिनि। 
निर-टेब्र्कव्र निक (कान देगक्एन ध्य मग्रं जांथग् 
नेव, छाङा सथन अमष्द केश ठेमिनि। कानन 
मड (नर< याव जार व्र व्र र्टेदठ वाशि्रिश्टेख न। जार 
यन चेडव्र-गूदद ग्रट्क एनिद्ज््ट । < कण्िन मभू कि 
खौय कृम्रागे। ! (म कृष्न) (य कड घन, कं गह्वर ठार! 
योक्त) क्येष्न) मभूत कृ्रान्‌) (कटय नादे छार) गर्ल 
तृ नौव्रिघ्व्‌ न। «५ (यन निष्के (फडमांन] अहे 
कृञशोव्र एकग छि वस्मव कड लोरोख नष्टे रय । अग्रातू्निः 
नाष, कृङेःमन्‌ € भालम्‌ -८वन्‌ ५ मकन मह क्छ 
कारढ लाल धांक। नाशिम विशबीम्र ब ! 

२१८१ (प्र त्रिर्‌ कारों कटनतु ८,९६०० कूरे निघ्न रिग 
याषेटरुषिलि । देशाटन मोम छेगत्र टेप्नकृषटि.कं (नियर 
डत (यिद नैीठेलांम। कनूट्मन्‌ 4 जात (सिग्रा यशटय 
ाविसािनि ठेर्‌। (कान मोभरूणिक अक्षत ङेटव। उयन्‌ 
जामि छशा ड्ल छात्रिम्रो थटे छात्र वमाटनाव्र टेङिराम 
छ]ङाटक सनाद । 

शथम छोद्र वमान सम ७८१ शष्टाटक, किष त्रिगे 
(निनाय नटनोव्र शेत देर च्ल ठटेग्रं योगय । जांतनेव्र 


५९२ ` मुनीव्रिक। 


न न ----- ~ - -----न ~~ ~+ - ~ ~~~ --- --~--~-- 


४्७« शृटाटक अटनक केक्िनिमात्‌ 8 ८दव्छानिक मिलि 
कठि षएठरेठखातर॒ भोटेन पौ जावर यख कातन; गारोत्‌ 
<ख्कन 8,८०० एन ठ्‌] ५,२५.१०० मम्‌। चक्षठेःतनि ठृङेषड 
खाट्मविक] नैरी रे छात्र वमन ङ्यु। किध -गाङॐ1€ 
गोच शतान क्म्‌ याग। ट्वण्डोनिक्‌ € उेक्षिनिग्रःतत फन 
न] भिग्र] नून देष श्रूनवाग् नृडनषोव॒ शंष्ड कत्ििवात्‌ 
ऊक छेरिष। नदम्‌ नाभिम्‌ (नलन। ठेकात्‌ अटा शधन 
छे्छागरी शिट्रिलिनि मतम्‌ किन्छि; ठाव अनाग जेश्रवी 
5 मन्गैडि ममद्ढे ढे कयात ङ्कवम्‌ कब्िदनन। 4ठेत्‌तु 
नुन डाव शदुखक्डेट्नदडाषात देन भ्ौनीव्षठात्र एाकमि 
-फथ्य शकेल, कोत्र कल ठेठ गोच यांभराने ठ्य ना 
५४८८७ ष्टाटक (ए व्ष्टर्गे काठा7क कत्म] के डत कटल 
खन] शश । आठरेवाव्र॒ खडि सुन्व॒ कंक ठ्ठेल:; ठष्टेटवांनै 
कृेटृड ण्ड वत्‌ नान ठ्टेन जोमब्विकासच डाटा ग्ण 
खना (भन । स्येन खामविक) थम ठेषेट्दाहशैतर मद्रि 
केथ। कृशिल । जाटमविक। ठडेःवशटक कि कश] वथम्‌ ननिग- 
छनि कान ? जाट्मत्रिक। वलिसोषिल, “खर्म ज्रेगददव्‌ नामि शका 
8 मरिच केक, शंगिवौड ¡शि यासक, 4व्‌ शुथिवीव 
८ल)टकाःपत मका नैव्सख्णत्‌त्र रंक ठौलवौम। काजर ङृष्ठेक |” 

रेष्८गे (म्र चाग्रृलादश्त्र ठेनैकृन कठेट्ड (नाषठिलम्‌ थन 
५२० माढरेल परट्तव। काशन निट्रमा जदरेवात्र (कौनगरिटक 
हलिःलन ? (कनै क्रिसःव्रतरशोगे पिष जोदराकं त्राम॒तनला!9 


मुभैविक) , ८ 


१०१ १८५८१५५८ ५८० ०५८५५०५१ ~ --५-+ 


पृत्निग्र रेश्ना)€त गिक एलिन । ठे (कन्‌. क्िमरौव्रतर छेगत 
कमि नाटेररोणेम त) खाटनाक्ड वा । निखो वशरुन 8 धाम - 
{शाव कोको मकन ठे बोदलाकं (परिग् नथु एिनिम। लम 

०३८ ध्म । योल ममर एिनि (नोषरिलम्‌ मभूत खट्लत 
छेन चक ऊोगुोग (कनन (भोनाकाव्र छव षव्रिदड लाभ्रिन। 
एशूववलांम कानेन निमोटकं वृक्क शत (यिस 
नालम । ठोरात्र (युय चराष् शष्खौवर; जमछ ष्य € 
(नमनं ठीठातर मम यमन छाताकर्‌र्ठेष) ठेरिगरा। 
4 श्य किट्मतर खक? ठेष्ेःवाःशत निका खोमिभ। चत नाष 
खाद्ौगयश्नलाःनत्र कंथ मन नष्षि। उरा कि धके षःय 
कडेद्डाछ ? यामव माकर कथ] न कटटिश] छिनि ऽलिष। 
(भरल । | 

शत॒गिनि +न क्न। जोङ€ ऊाठाखं (मबरेखाएव मभृद्एत्‌ 
षेभत॒ (तरलोकात्रडोट्व चृत लानिनः ८यन (कान्‌ णिक 
योषेव छ)र] शिक किष नौद्ष्डाष्ट ना। मभू अरि 
श्व्ठोत्र। शूर्प शाम्‌ बाप माठेन नूत थकठि विमान 
खारक (य (भल। ऊाङ़ाटछ्त मोद्धएनव्र नैत (कान 
गृखांक] नाहे; (मकेन छार (य (८कोन्‌ (टमेव छोर) 
छनि? शांबिनाम न)। 

नेवा कि तकम कर| ध्वम्‌ वुभ्‌ः कत्र) डोमन भैक 
कड लो जिन्न । 


क विर्गे श्ट 


खावौन॒ ऊलगुक्ष 

(मठे गकं निग्र) शामन देनैव दूषि (भेनाोम। 
कन्‌टमन्‌ € (नर. खाने ङेः (मशान कौषाटेमशिनि। खमि 
ङ्ष्ठाम)। कविनाम “(नए , € किटमद भक्‌ १" 

८न. दलिन. “कोमाटनतर (गानो भैक ।” {मष पूवत 
कारक गोट्न डाकषेगर) रि, दक) फोटनन्‌ व एमि 
रटेड अनर्गल धूम नाशि कब्रि्ड कविर काकृाङ़। सोमात्‌ 
न्ट्िकि गर्णद्व्णे षष्टिर सामिष्ड्षठ। टठथन ऊङाङकेा रिक 
छम्‌ मराठे एव्‌ । 

ञमि किकाम। करट्नःप्र,--^(न, 4 कि ऊठाक वनन 
(कयि | 

८मउ. वलिल, “काशक शरन (कायं मटन उच्छ ह| 
धके युव ऊषाक। टठभवान ककन नै लङा) 
यामराणत काष्ठ म (न)एिलमुटक विग जाक खामाम्‌त्‌ 
टेकातर कक्रक्‌ ।* 

सामि किक्छाम) कविनाम, “नर्‌. (कान (कद्ग कङाछ 
4! वन्‌्ड नात्‌ ¢ 

(नए उाहातर॒ कशल कंएकाटम्रा, (षाद शो यर्- 
(ता कवि, जं मकुष्टिदट कत्रि, (एः ८क)१ शष ठेम्) 
कारके (प्ररिःड नागिन; किक किष (मि गठन 


म तिक्‌1 : , ७८८ 


'॥" ~-~--------- --- -- -~~ ---- ------- ~ - ~ - ------~- --- --- -- 


नौ। शट्नत्र मिनि यरेक्ट्ण कषटिट्नि नेत्र खोर अटक 
काष्ठ खौमिग्र। नैणिनि। सडेवाव्र खमन) खार्‌7जत माखन, 
कानन, ऊ]राटछत्‌ ए) वििगिट्क्व व वण कामान मव र्णे 
(एचि नङेलोम। भाोंखटलन्र टखेनैत्‌ «धके खि ष्टा 
निगान छेडिट्डशिनि; (मञे ख्जिंज्र म मक्र निभीनष्ठे। (स 
(कान (ण्द्मेत छार) वुकिएड नौत्िनांम न।। यारे (राक, 
ऊर कि छज्टवट्भे" ांमोटफव गौटन ख।मिट्डङिनि। 
८नाणिलिम्‌ मभू्यव हेशेत्‌ रि व्रखोघ्व कैोरेग्रो | 

(न. वनिल, "लाङ।कफ़े। यपि थक गोषेल मुत पिट 
एन याोम्र, छ) "न वामि कटलव्र छेतर नारदम शेष्व, 
वः खा[नैमि& जाके कतुटवन ॥ 

(नःण्द कथाग्र (कान च्व न रमि काशोखषटक 
८एरिछि, अयन ममम (मडे लारोएकत मामन ङे 
ङक कतिश) यानिक मोका (वामा वाङित्रि ङ्केन । ठिक षके 
(मटक नत्र (ना तरिनदमद्र नाट मिक ऊंट्लव छेन करे 
कि लाङौ जिनिष जामिष्रा भषनि। कंन शकारम्‌) 
नाठिनाःमव छोट ठेनेव॒ खामिम्ा शैष्नि;, जोब्रगत्‌ जब्र 
हाद मटक नतर धकर) उगत नैक खमा त्र कान जांँमिटन 
खानि पनैरकात् कतिर छेरिनाम, “न, यकि? सत्र (य 
जामामत्र ठेशेत्‌ च्लि कत्र !'* 

मछ. वनिन, ^े।, व्र जांमा्पत्र जोरखत्क अणिकगर 
नो तरहकाग्रान्‌ (छटव छार) दकव छेत शनि कंतु ।" 


--------~--- ---* --*. 


५८० गोरिक] 


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खमि वनिनांम, “किध ख) (य (नोक ब्रश ङ)" 
त्र (पं नटष्छ |“ 

ठे कथ] वलिमौषे खात्‌ अनवर डखख्क्फे) < किष) 
टेरिन । सदेवा मम वाशाव्र र्ण दृदधिदृर नातिलिम। €) 
य यांमाटफत छेतर धनि षटं ड््यटश्ट ठ नौवरायन -छाविष। 
नग्न; चडग्नि टे रिश्रम कति री जिमारिन वह़े। कि 
खालाङाम लिन ऊोकाऊ ठट नय सथन ङ्ात्श्रून षषम) 
(न)षिनम्‌टक जावा कट्‌, उयन ङ कानेन क्ल'दाश्हे 
न्गष्टेढे (यिद नेोकेगोछ्टलन धय से) लक्षे) नावुहागान्‌ 
व] चण ८क]न ज्रनङ्द्ध नगर, 4] मोवटृमज्िन काङ़ङं; खश्िकाग 
नावरहरोश्ान्‌ वा (मडोमिंम॒ात॒ ८एटय€ ८य 4 खटवा उगृद्णत। 
कानि षिन काद्र शे. रातरनेदव (कान वकाम (कटम्‌ किविगषटन 
किना ाठ़े व्‌ ८क्‌ खान? | 

डाव्रभेत्र चाभाव बात धकण्िनत्‌ कथ मटन नैषिनि। 
छाव्ररमरूमोशव्र मिग आमि खामिदड ८मये ब्रात युट्कतु 
कथ] ग्न शषिलि। कानेन नि्म) यामाद्क्व ८म युक 
८फविड (क्न नाोढे, चट्रतव छ्ड्त्रि शतिग। तायित्ाष्िलन। 
डयन निन्ये (कान छोङ्ाटछतव माकर (नाणटिलःमत एलु 
रढरेग्ाश्िनि। उ।व्रनभेव्र मन नणिनि-८मरे चःघ।डश्ाश्ु 
नातिटकव्र कथ, (मठे शधवालव्र मथा कात्‌ कृवत्र (ण द्मरोत्‌ 
कथ । नक्राष्ौटभेव्र निके (य एवृरिटकं चामत्‌ नोष्ाठ़गरा- 
शिलाम, (८म€ ठग चटव्र खित्रिम्र। जत कंथ। तलि कगरा । 


मुनतुिक। ०९१ 


मी नीम नी आ व ह क य "वा 
-~---- ~--------~---~--~--~-----~--~-----~----- ~ --.-- 
= =-= --------*~----=------------- -*--- -- ~ -- 


ङ वुङिनांभम कणेर मम मड] खांछि पनवष्क शेम! 4> 
(नाण्िलमूटक मोतिवाब्र खक नेगम (एषे कतिटडदष्ट । थन 
वदनम, ध्य सराः यामव नानोवाव्र (षष्ट किटि 
(मठे कांराटज खांगाटमत गृहत भक बरिम्ाएष्ठ । (न)एिनटमत् 
एविकिट्क माम्‌ कोगाटनव (गाना नैखिटिड नौभिन। 
ममखके कट्नव्र छेनैतर नैख््ड नागिन, (नाडिनटमब्र नौ 
कर] नाभ्िन ना। ८मडे गक-लाराखं छथन क्‌ छिन 
भाड़ पट्व। | 

मभूटन सड वरु छमगक्व विन, किष टोट्फत्र देशत 
कानेन निम खाजिट्नन न्‌। छन (न. वनिन, 
“खासन. यामव) क्रमो चेष्टमि धत कानावर (षष्ट क्रि 
(य, सौमव्र) गक ने, खाट (नाक (नख. करभांन वांङिति 
कतिश (सभन देषो वचे्व (महे रूट जांर्‌ात॒ र।टङत्‌ 
ठेभैम क़! 5७ ख्‌) घो खामिस्‌। नैषल्ड (म (ट्कत्‌ 
टनव नुप्गर शिलि। 

निष्टान एर (फयि कानेन निदा पीरटेमो। 
तान कानि कनि खनि वलिटलन, “ट्त निटद्वोष, 
(नोिनटमव्र थ खी पिय जे खारोकट्क विध्वांत॒ खण 
एन्‌ (डाके खादी ज चीत मामन (कटन वि दष (कलि ।” 

4 कि कानप्नव्र खग्रहव गख! उशन राराव्र बि 
(यमन छम्रहव्र. शलो गक (मनि । बतरोवर ग्रत मख छशा 
भृथ: मदद मित छेनभित्रा कूनिम्रो ररिमा ; (ष्यत 


9९ मौशिक) 


नन न ५ 


डाव) नागान । (नट्छ्तर ेब्रौदव खर मभक, डो"टक यति] 
कानेन निटमो य़ दकानि गि्ड नांशिनम । डःदरशब्र 
दाक। मालिश (नण्टक बुट्‌ (रूनिग्रा. मिस्र काशन निम 
जाङोखद्‌ खि एष्टिनिक्श कव्रिद्नन। ॐौरखातर एव्म 
मिम्‌ श्नि षूष्ड नागिन । 

स्नि पूवरवत काङखताःक माकन केव्िग) तजिःउ 
न्‌ागि7नन, “डतु रु्डोना कऊारङऊ! (धात्र कनल गाज्ञ 
डा ङ्गौ भनत। जामि ८क, डा याना (सात्र (टनव (लःटकत्‌। 
कानटट् व) वुकङ नैतन न।। वरु ८ निमान टेषटाटेड- 
शम्‌, छे (ण्य टद्‌ बोभाव निनान [* ढे वलिष। <कट। 
(वात्र कृर््वर्मु शाक] छिनि द्ेाडेड ल्नोज्िदरनन। ५ 
ममयर कफ (नाल) चामिग (खटक्त ठेनतर शष छिएकाड्श) 
खंट्नव्र उर्व शिंस्। शण्लि। (नाष्टिलम्‌ देन्‌ कन कवि 
कभिग्रा देमरिलि। काोग्ठन निष्रमा ओआमाटफत नटन 
उाकाठेश वनिःलन, शयान, वाननाोत्र नौ यान ।" 

खमि किण्ठाम्‌। कव्िलाम, “कानेन! याशनि कि 
4य॑न धके कार्कोटक सातम कतूटवन 

णिनि वलिटल॒न, ५न] मनाठ>े, खारोकषाटक जामि वयन 
विदय मावर ।" 

जामि वलिना, “न, ड कंवू्वन न, <4टरे खकरटनार् 
खामाव्र तराथम्‌ ।" 
णनि वलिटमन, “टकम्‌, खानैनि जामाटकं (गव 


मभक] ९२ 


खोमु्वनम नां। लराङषाट्क बोमि दवाकके। यान, 
खांगनांव नो सान ।" 

कि क्त्रि, नौ नाोग्िष्डि र्ठेन। छ्यन मिंषि ग्मू। 
गनत कन नोविकं ष्व देनैव देशनिःडशलि। जाछट्क्व 
मकटनव बरूटयं डोव व्रा्णव षि; थङ्षहिश्म) नङेवातर छग 
छात्र मकटनव्र भूय काटल) ठ्य देरिगो्ट। नौ 
नोमिया षटव एकि्नाम, वमन ममब्र जात॒ वक] (भान) 
आमिर ८नोठिलाःमत नो््रण्टम्‌ लाभिन; ८नाग्निनद्मतर मव्वाक्र 
शेतुथत्‌ कतरम्‌ कनिगां ठेतरिन। 

जोव्रशत (नागिनिदमव्र के्िन एनिघ्ड नागिन । (महे गक. 
जारुाखष्ठाएक शिष्टान (निग्र) (नाणिनम्‌ शूर्गद्वश दहि 
नातिन ; निष्टान निष्टन (महे छाशाककोऽ आमिर नातिन । 
वुदिनाम कानेन छेष) कतिर वमन कब्विदज्टष्टन, साछ 
लार्1कष। एगुव्रा१े रद्य छेद्ये । (वन) एवे गबा अङडेकन 
फृदषएूणि एनिष्ड लांजिल ; यामि सात्र वट्दत्र ख्णत्रि एश 
कत्रि] शाकिष्ड शोविनाम न। माम छत मिम्‌) मिं 
वारिस छाव छेन शि देठिनाम। शिक्षतोवष् भिश्‌ 
मड कशुन निद्या छोटफव छेनत॒ शोग्राब्रि कब्र 
(८नरषेटरशिःनन । छिनि उदन मक-खांङखटक अोककमण) 
कट्तन नो, (वश कत्रि उ विष्ररुषश्ि्निन याोंक्तमम कद्वि्वन 
किन)। 

अौमौक (तयि नाकमा कानेन दलिम्रा डेरिद्नन, 


7 ~ = ~ ° ल च + नभ यनन च 0 0११ ज ९. ५ 


५५० म सिक्। 


मो न ० 7 न न न --- ~~ ~ ~ --- -~ --- ~ --~ ~-- * -----~-~-- ~ - 


५५ 


“यामि जेन, खाग्टि क्िद्रक! ये (श्शून न्दर, 
खजाषएातौ त्रा; म्व यजात चाभि ऊंख्छवि श्रगषि; 
श्टन्त ङ्क सामि यामात्र खट्ग, सखांचरौग्रखकन, यौ, शूल, 
नेत्विवाव, दान, भ मदे ठाव्विद्यष्ि। नथिदौट्ड सामि 
यणि कोन जिनिष मवा घन्‌) कबि रे €व्र ! €फतु 
ठेव खमि ययन अखिदनाध (नवषे (नव्‌।" 

(मड बुद्‌ कारा उयन (नाष्िनम्टकं छाछ] करिया 
टि अ मिदडशनि। सोङडाङि नाभिष धामजिय्‌ा (नस्क 
दनिनाम, “(समन कद (खक्‌ यङ नालदड छृट्व। जमन 
निषेव (ना्क्त्र ऊारा्छ धःकृटट यात॒ अमाव माम उक्ष 
न) 

८न. दलिल, ^८मटढ़े ~क कश, आङ बाट शनः 
श्ट्ट्‌ ।' 

(पशि (फवि्डध तःखि ष्ठे योमिन। ८न!§िनम्‌ 
(क्वन्‌ (मठे गकर-कषऊटक मृद उषे पएृल्व ठोनिम्‌) नशा 
ये्टश्िलि। एोद्रिण्कि कद्र निष्क । मगर व्रि 
<टरेकरन एलिएड नांशिन \ (नाग्निनम्‌ किष्टृटे ववर श्नि न।। 
एषे छऊाषाठत्‌ माष षठ माटेल वावक्ान जात॒ किष्टटड्े 
क्मिन न।। यामव नल!नड ज्केन न।। ब्रा यथम 
खिन, सथन शूनता (एाद्तव्र मड षाटफत रेव जिम) 
छेपिलांम। उथन€ कानेन निदमा छोट्नव्र ठेनव्र प्र।खोठेग 
वरडिग्राषन। (नाणिनिम्‌ एषि एनिःडाःछ, निषटटन निषटन 


न ~ = कान न न 9 भ, 





जाभविक ` , 9७: 


न न > ~ -- ~ - ~ 


८मडे गेक्-कार्‌)क टिम ञांमिदजाष्ट । खक्तकांट्त रिष्टे 
त चिदड नाषेट्डशनिंम न); पिनि र्डेत्ड षु खां शटनत 
कम्‌] € (नार्डि ष्टे टेगरिष्जट छाशोके (मयिद्ड नरेद 
छ्निम। ऊक्‌ उशन रिक ष्टे माडेन पू्‌ | 

व्क्म (खातर ङ्ग खोमिन। ेदावर॒ युटृक्षतर जार) द 
निके खा्मिमर नैड्नि; नांविट्कन) षषम कव्विट्ड नानिन । 
खोमा खान्‌ (मर्चिट्ड खान लोगिन न); घटत खिविस 
खोमिलाम। (नांषटिनम्‌ थदेवाव्र थूदव शौटत्‌ एनिघ् नागिन, 
ट्ट गकर-ऊाक)ख शूव निकषे यामिग्रौ नदु। कनि 
(नाल) (नाठिलदमव्‌ गाटम॑द्‌ ऊटलब्र छेन खामिम्‌। नखिनि। 

८नख९, कनृहमन्‌ ७ मि नःटेद्वत्रत्ड शिया] वमिनाभ। 
८नाणिलिम्‌ «रेवत एविट्ज जांव्रह कव्िन । युटकषेतर धे सूएटन) 
(मयि खोभोव्र वक्‌ एिन.ण्नि. कद्व कानिद्ड नाजिन । (नख. 
ग ब्राशिग्र कुनिष्ड लोगिन । कयन (मे मव्रन-खांचांङ 
ऊाङी7ङव ठेगत्र नड, (मने षिन जामत का रटैमू) 
त॒शलिम। यन (खन जमाव निभ्रीम< वक्र र्ठेम) भिषांशटिल। 
र्गराहबु उट्छशा करलं) 

ठुकौ९ (नाप्निनटमव्र मदवौक्र सिनुङिनिग) छेमिनि। जामि 
पि<्काव॒ कजम च्रिलाम। (ध्मकि कं छोषनं शाक) 
वृदिनाम (नौणिनिदमव्र थषएट७ ची छा श८कंव्र॒ उनटकटग विष्के 
रुडेयाष्ट । चटबरव्र ख्छिव्र खवर थोकिट् शीविलाम न), षठ 
मून (्रनांम। कानेन निमा (मदेशोघ्न करेगी 


-*-~ .*--~ ~ 


५२. माँनरिक। 


~+ ~ 4 = ० -- ~ ~+ - = =+ -*~ ^~ -+ ~ ~~ न 
~~~ --~ ~~ भित भ ष ५ भ स ~ ~+ ~ न च ना न ~ ^= ~ - क, क, ऊ क प 


शिटिनिन । ररत (षायगूर जमांधातरम शद्धौत्‌ ; चमक एर ९ 
मटक ऊङात॒ वन्न फलिग] छेशिःडछिनि। (मथन उड! 
काषटत कानानाोव निक्षे निम (फयिलाभम गकर-ऊःक्ट्लंन 
ङ्व थवलट्वदभे ऊन एकिटद्डाषट ; एक्किःक्‌ कनूखूल श्म) 
निष्ट; -नाट्कत षूरोषट7ि, गेल € ककम खानां 
तिक भूथैति र्म टेर्िगाशनि। लोरकषठ। -कमम्दढे 
विद्रड लांशिन। (ग्चिष्ड (मरउ कके कनल छिडतु 
छ्विमर (नन; छ)रोटरड मभृदखत्‌ छेगव्र लकं डौसम वनौ (एश) 
न्लि। वषग (नाककम छिनिशेज ममर्ष रुलाठेस्‌ (भन । 

शिष्ठटन किवम (पयि कानेन निम ठप भ्राष्गि 
नाक श्निव्र गृद्ायद्ना (एयिःाषटन। यथन (नाक श्नि 
विगर {भेन, काशन कलिय] कुलिम। कं किः्ड ला निटनन | 
थमन उमकृत्‌ निषटैत (नाटकत्र (षाटय छल (फचिर खमि अवांक्‌ 
ठया (तलोम । समन नावाम्‌ कफटमत्‌ भा्€ ककत छम 
८फ्य] (क्य खानिडामर न।| 


रँ व्९भ ने ्ष्ूणे ६. ॐ 


मानुषे 
दशोदन. कत्रि (न)ष्निनिटमदर मर खान) निवितर (भन । 
ऊटलत्र वकम" गु. छन। गिग खश खमद्धद फरुट्वद्े षटि. 
लाजिन, (यन (मरे छश्हद लगुण) ङटेह्ड गीलानरद्रड नोत्रिटल 
नौ! (कान्‌ शिक एनिरष्ि- पशि न) रेडःव- किष्टू> 
वुद्धि नबिल) न।। निट्छंत्र चद शं क्रिस्‌ दमिग् 
तञनोभ; काशन निट्माव नाम € सरव षाय बमात 
मर्ववाक्र कनिड नाोभिन। कि छग निषेव «ठे मङ्‌ । 
-4कवात॒ खोमा्णव छांट्णा कि खोद (क क्ला्न ? 
नातो व ममम यान] खनिग्र ेरिनि। श्ानूए्न भिय 
(एचि छ)रोङं ऊटनत्र॒ जिम कुक उनांग्र शोक्िग| छेड्वरि्क 
गेष्म भांरेन (वाणं एनिद्जष्ट। काराघ्छत्र १खि कबनीष्ठे 
वाख््डि नोशिन। तौलि (धांव खक्रकोव॒। घात छित 
शिग्र छेष गणनाम्‌, कि चुम जआंमिन नां। काशन 
निद्भोत्र मक नोना ण्ड खामिना गांश (के शौक्रे 
लाभिन; ५ (लोकं (यमव नीव । (महे छट खवम, चर 
(लाःकतु क्लौदननोम, यके मद छग मृश (पए)7यत मानूटन 
अक्रकाट्वर जामिम छेकरित्ठ नातिन। रेडतण्िक शःकाख 
4ङ़ेत्‌।नु (कन्‌ नीचै एलिगट्--ग्निषेक वाकम न <नौड।- 
(फन, (शज्नाशरत्‌ ना कात्र भागकर, ऽवि शमाभवत्‌ न 


“ "ज 


>५8 मोँभेवरिक। 


~^ ----~ ~ 


लिगांकड. पौनधरू् समि] मराटमटमेत छे्ठतफिटक (न)टकष्‌ 
वम्वाम ना वनिनडषएटःनः: कानेन निष्रमा कि धवत्‌ 
(मरे फिःकं एनिमटष्टन ¢ 

ङाङ्]रू कयटन) ऊटनत्‌ टेन कथटन] व्‌] कनद ङ्व 
प्रसि) एनि!ड नागिन । टखेढंत्‌ भर्ागानीःव॒त अज्ञाना ८ैत 
कंथ] ङाविद्ड छवि मन छमष्टम्‌ कव्व नागिन । टन्‌ 
नशेत्‌ मिन कोण्ि््ड लाजिन; (महे कषे छव, ऊाराटऊव्‌ ८मटे 
<कक़े गडि । (मकम मतर उगत 21 मद्वां पिश] खकृर्व 
कतिड्षटिनाब। कान णनक € (पशि ना न), (नख.7क € 
(फयिह्ड नाके न]। (फत्‌ € गनत (कात्र (खन क्बमः 
कमिप) भि नाभिन्न) रिट्नत्र (वल) खर्विकाश्म ममर 
उन्मोष्छतन ज चूमद्वाटत कषमा यष्ड। लाराटढ कि नां 
कि ज्डरेडाष्ट किष्टूरे दुद््डि नैौव्िडामना;, वृख्षविब्‌ व्‌ 
कानिवावर ८कोडुङ्न € खात नाठ़े। चुम) चुमाटेष् मिन 
त्रटवत शरमं वृद्धिटड गाविडाम्र न।ा। 

कम्नि गद्व््ड चुप उङ्गम्‌ (गेन); एश (फ्रि 
मृःयत्र ठेगबव्र ८क्‌ कुक्शि बङ्गा । (नक (प्रिर छठि 
नमिन) म । 

(नए. तलिन, “अकरवं शानड्‌ शृट्द्‌ ; यात्र (क्वौ कनूदल 
ट्त न । 

खमि विनो, «4 के ५ ब्रयिःख ?” 

८नञ,. वलिन्‌, ^न। कान्‌ त्राचिष्ड; काश्‌ षठट्नत्र ८व कि 


~ ~ 


मोतविक।] `, ५५८ 


रुद्र किष ध्वांद] यो न], ऊींव्रड (थ नाहे, ऊीव 
ला कटमत्र€ (कय) नोठे। « (सन ङट्छत कारुलं, ऊन-मफ़टयाव 
नामशेक्र नांडे। वुकृटलन शटकमांव्र, छे रिकं शालाया 
जमय॒ 1" 

खमि किख्छाम। किलम्‌, “किद अयन भरता -कान 
क? यशां वाःमछि ? | 

धन. वनिन, “कु "मष्टेन शृद्वकिटक क्र] न्यर्‌ 
(शसि ।“ 

खमि ङिष्ठाम। कतिलाम, कि 4 (कान्‌ (कम १" 

८नख. वलिल, “ङ] वन्‌ गाति न), किध ८ (मके (कक्‌, 
गेयाटन द्र खोमांटफतर जोग निट उदव । 

साभि वनिनोम्‌, न, चाभि नालोद्ड मम्शूर्णं ताक्ञौ 
खशि, ककल ख्ठे कृेक न) (कुन ।" 

८नछ़. वनिन, “यमि शत्रा नैषिव) मांमटन कोन वाध गौड़, 
ठार] "टल, शुन कवर खामत्रा निष्टुट्व्‌। न; कवनुन ड 
बाख्लौ यादन ?" 

यामि नलिनान, ५निन्छष (नख, वयन नौोनोवात ऊं य| 
कतवान एव्रकातरश्ट्व ठाठ़े कतव (कान वोषाविच्र मान्‌वन)।” 

(न. एलिम्रा (भेल । गोलाडेवा व कंक अनटक कृरु कतनम । 
खात न। चुषराठेष ए)व छेगत भिम छेठिनांम । मभूत छेशवु 
सोयम्‌ कष्ट किमक ; न॑ दवडयमंम ८एटेलव॒ खांघाटड (नःषिलम्‌ 
मात्र ८य्‌ नात्र म एूलिरशिनि। 4 छगरकृत्‌ केुक्गल, &त॒ 





५५४ ` जाँतबिक। 


~ ॐ -- शोिरयोभकरय 





5 थव छट] खाोटष्ट, कि रिष्टे (रिट्ड नैषकेलांमन।। «दे 
कृषि गाङेन (णे काणि) (कमन कब्विश्रा छाक्रागरडिव? ८ऊाव 
रके) सामिल; ब्व फित्िम्र) खोमिलांमर। मम ए्नि शतु 
कृषे दक्िरृ्टेष्ड माङ्म स्ठेनन); नाष कानेन 
मटक (क्थ सटेगा साय । ऊत बूटथोभूवि र्केय) नैखःल कि 
कानि यरि शता नखि याठे ? 

मठे ग्नि कि छगक्कत पौष निम्‌) (वाश रषेट्डषशलि। 
छाकादढ खोमा दके (नव ण्नि। मबक (न. € कमामन्‌ 
मोन मष (मराठे क्था कषिनि ना; क्वा (शरि 
रकेल । वाश्िद्वत्‌ दव मञ्के उ।ङ्‌]7मव मनव मद्रा निन्कम 
कछु वशि्डश्िलि; उषे (कान कृश्‌] कषि्ररशिलिन।। 

मक्र) साट ष्ठत मम (नउ. खामिग्र एशि दलिन, 
“ऊरुक खात वामात्‌ (य कट्व न्‌], (महे ब्र “मष़े।त्‌ 
जम वट्कदाटव्र (नोक का भिम क्राावन। केन्मन्‌ 
€ खामि (मयाटन जानैनात ककर बानर] कतूव; ध्य न॒कम 
कुएकन्न एटनाष्ट, मटन ठय ताजि्ड डोषम यक्कात इट्न्‌ ।" 

(न एनिष) (भल। खांनुटन जिया कन्शलाम (परिल; 
कटलत (एश शुर उल) निम्‌] कारक उछि उगृह्ृव्रहव 
णदुत-छेदत्र-शूक्व श््िकि एलिस । शट किद्विष। सोभमिग् 
ममूटयव्र ठेगेदयोती कोमाकानेष नेत्रिलाम; सरकशिनत्र यछ 
(लय ममण्के मयद शकत ङ्व त्ररिमांम, उः उवनांग 
वृक्त्र ङ्त णिनि षन, कच्चिष्ड नागिन । काश ठन निम) 


~ जा ~ -- ~ --~ --- ---------~“---~ - ~ -~ -~ -- ५४ ~ ---~---~ > 


6 जानिविक | ५५१ 


यथन कि कव्रिह्डाषटन ललागिप्रां खध्र (चिद नांभिनांम्‌। 
येन मटन गङिनि--८मङे कनज्टन कौटन्ण] प्रौट्णेव्र ऊक्रःन 
निकोट्वतर कथ। ; (प्वरमूदेेव यवनो ग जार! ऊ जाहिट्रकत्‌ 
कथ) ; निे-शिनित्र छक्रनव्र न्गिगायौ काकार कथ); 
(मरे श्रौदनव्र उमड़ा (नाका क्थ]; अवांन-(नौंत्रटनव्‌ 
कथ) ; सद्गकयनानोत ञ्छ्व एमां अष्टु सूताक्रव कथ), 
८मे लक्ाष्ठौशेत रदु कथा ; डङ्मा्मानटतव्र छवक्रीत कथ! , 
खवनुश् खोेलाफ़िमि (पदमत्र कश्‌; एक्किणं (मक्र कथ); 
८मङे दब्रटक्व्र उनोग वन्तक कथ) : शृ्टमत॒ माकरं नघ धत 
कथ).--शङि कड कथाङ़े मटन याजि नोजिन । कान. छेन 
निटरमोटक्‌ खातर माङ्रस्‌ वनिम्‌] म्न श्टेन नो; छग्रत्‌ क्र] 
टेन्गा व्‌] खभाङ्रूष व] (कव) वलिं बन ठृषेःङ लांतिन। 
बाजि जा नगर । ऊाकृ]ङ खडि वलाद१ षूषिए्डदष्ट ! 
कारक अटवा मोथाष। एनम शतरिम वमिग बञ्निम। याद्वा 
खश चके]! अमन ममग्र मटन उठेल (यन पूत वक्त्र ८क 
खि. मधुर ककम नोन शीारि्ड्््। न, ल्ड) शंन नग, 
८ (य (कवल नानव सूत्र: (कन्‌ छे्तम वाशौव॒ वुक-रष) 
कान्नात सूत! कि कक्रमे (मरे सूत ! खक रटे) मनयोगे 
न्या उड यनिटड नांगिलांम; निश्वीजयश्रौम (स्न दक्र रषे) 
(भल । खाव्रगव्र डट्डव्र मड (महे स्वत खद्रेमव्र कति 
एलिःड नानिनाम। (काश रृषेल्ठ < सूत खाोमिटरटष्? 
कानेन नियमात एवज) छि शौव (रनिग्र ख्व एशि) 


ण्ट | माुडिक्। 


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(ण्य (धावे अक्कात्‌। ८मषे चटवृव कटुकम स्टेट सखव 
(मठे कक दु्ातद्वनि वांकिग्रा छरि्ड्श्िनि। कानेन 
रात्र अनन्‌ वाकाठेटडाष्टन। (मदे सव्र खडि धौत, रि 
गृषू-खथछऽ कटे स्खेषटे! स्तत्र वषव्रं सो स्रा 
शोमिग्) खोजिन। मगरे एगष्टोनै खवृ€ (यन (मठे सट्वव्र 
(त॒गगक्‌ चट्त्त एवि (का धव्रिय] (व्क लःगिन, 
(काश र्टेटृड (यन काद्र) दत्रिम गष्द्जषठिनि। कान दषेन 
स्थन यक्षे पौर्धनिश्राम ८खलिर्‌। वलि] छेरिष्लन, “^ 
डशवान्‌, ५ ८य्‌ व मक, वात्र नोदिन). खाब्र शा न] +" 

आकि भौव एरश्ट्यत मन्धद्धम खान]! एषठिर्‌। (नोकात्‌ कण्ट 
८भनाोम, नीट कन्‌ देन विम्‌ -र्टनन। 

व्रावि मेषे) वाजि (नलल। (नणके ८एयिमू] ना कृकर 
गेष्लिमः: एशि एनि (लिलाम, “एन, एल, जत्र ८फतौ कट्‌ 
कट्व न] । 

(नख. नलिन, श्ट, नालावात ममर्के तिक्टाक ।” 

८नोकांत्र शैौए £ यद्र ुलिटढछि शमन ममम ऊक 
अटा सक्ष कक्न्‌ वार्हनाण £ ऊौमम्‌ जडान टेरिल। 
छकि, 8 किमत गक? जयन छामुत्‌ € भडगनादलव कात्‌ 
नुदि्नाम। छउाविम्राशटिनाम नानिदकत। श्रामोट्फव॒ .न्यिटङ 
गाेम्रा किद् ठाङक़] नगु। 4 ८्य 4४ ठमृक्ुत्‌ कथा| 

खामिषटौस्कात्‌ कत्रि ठेतरिलाम, “मानद्ेम्‌ | मानलद्म्‌ 1 


# नणय नबृम्‌-कृदलत माश ८४ 


र मु5| द्विक] "  , भ५५ॐ 


मानुषम्‌! अव्र (म छर्कव खवर कि कथ खाष? 
नन दसत छेश॑कुन गिभ) उयन्‌ खाल एनिदख्ष्ट । (म वष 
उग्रत रेगकृन ! व्थाटन मभूदखतर खद्‌] वु छग्हत्‌ ; 
जोत्वष्त शव्रिश। वरु वु (षे ख)ष्ट]ङिविष्टौ णि शाठेटडटष् | 
मव्य खगत रच्छ <अ मान्‌षटेष्‌ ; ठक्‌) अक्षि छश्कत 
पृनौ ! (नाटणांटन प्ौगनशरू् ङटेट्ड ऊलत्रौमि यषए७ ख) वटर 
भूविस्रा एनिटरटष् ; <दे श्र बुनौत्‌ भूद न॑ण्टिनि यछ वु 
ककड ठष्टेक न] (क्न छाबर खबर त॒न्छ। नाष! एोबिफिटिक 
गक्वड चभान (टे 1 -टेथ छ।-6थ कव्विश्‌। ना र्दख्ट्ट, अशाख्टन 
आए शनौ गरक (वट्न घुद्रिटद्ट । «क़ चुनौव्र गकि चट 
वनभ (य वदत्‌ मणेन कतत सोशाकटकड (ए एौनिमू) 
खादन। वु खौर।ठ नग, वष्ट (य कर छिमि, (श्वरख्न्नुक, 
मिक्रू्वाएेक, मिन्‌ «क़ खवा गणष) यम र्नाम छार) त्‌ 
मथा] नाड ! 

८नाद्निनम्‌ बां वटे सोयम खावट्खव्र भूय शद्रा; 
काग एषए्नद खमदनादयोटशेवर॒ एकम «रे विभेम धषिम्रा । 
८नामिनिम्‌ जयन (सोत्र भ्रू नैस्म्रं जोघ्तत्र मर षषम 
एनिस!7छ ; यामव) छिनखन (नोको मटशा छित शठे दमि 
खाषि। ऊरौ जडेवांव्र रिक खोवटर्डत्‌ ब्रूटयं खाभिगराट्, 
उाडे -सखाटखत्‌ गुट्य (नान रुडेग्र ८कवनि वुव्रिप्ज्टष् । खोरुटउव् 
महे चवम्‌ खो व्खनत्र एकतमं खामात मथ भुत्रिदड नोत्निन । 
मव खा निश्छय; उश को रेस] विग्र ब्रह्म, 


५१० म्‌†¶ब्रिक। 


५५ ५५ ^-^ -~ +~ ५ = - + - ~~ -* -* 


८नाद्निलाःमवब ङ्व ककण वार्दना, वषि शवल #ष्लन; 
गाशट्तव्र छेशव (एटेश्लि यारा वाश) धृति चवदेत्‌ 
माकर अमिषं मिलिङाछ। (म कि डोसन्‌ वण| एव 
शष्ट व्व तौ कद्व (मढ़ वुनौव्र मृध्य वृत्िद्रःष्ट। घमूर 
नवश्ःगव ठेनकृल! -नःषिनिम्‌ अोगृगनेट्वानै युकिगग्ष्ट; 
लाढात गेलि दिनिद्नि कव्ििं कनिड नातिन, किल 
मव (ष्टे) याज्ञ वृथा। बान्न (नाद्िलामत (नरम्नि, फटनत्‌ 
मृद्रय (कवन (वौ (र्व कटिः चुतिद्ड लोल । कटा< (नेका 
मताऽ कतिश] शुलिय) भन: ख्रम्रत्‌ शिनङ्नन ५ (नोक) 
डीव गड कलत जनय टल)करेष {भलामर; चमत माधः) 
4कठठे। किमत शत मरा माका धाक यवाषेल. माष मक्र 
खामाव @र्क (नाने नैःदरेल। ातरशव किं उठे किष 
कामि न । 


वटब्रविशशं भैव्ि््छतः 


(गैस्‌ 

थकेवोत आआमाट्त्र मधूखयांन। (मम ठटठेल। (मेत-न 
खरत्रखोत॒ (यकि चष्टिमोिनि, ८कमन कद्ग) वामत] छिनऊन 
मरे ुनौ कशे व्क] नाहेलांम, (नानदमक्छे व कि कडेन-- 
किष छानिन)। यथनन््ठान रेल, एोरिमा (यि (नाः) 
८छन्‌ प्रौद्शत॒ कन (कनव कूवर जामि खे दठिघराि : 
गोट्म खात कर| विष्नांगर ८नख_ ऽ कनटमन्‌ छे तरिश । 
आनटन्लन खांणिमदया मत्रा छिनिङन जालिक्रनवष्क उषेश) 
कै]रिःठ लोक्नीनाम। 

सानम. (क सित्िवान्‌ छक जागरकन कति नाभिनाभ्र | 

८ (य कोङ्नौ लिविनाम ङाङ्‌। मन्दरर्नं मज्ञा चषठन। 
शडिफिट्नव्र वद्र € षषेन खमि खगौ लिरिस तारिोभ 
(फा स्वि] डां वयन वटे लियं शेकं कतिनाभ। 
क़ * उष्ुर मगूयालोव्र कथ (लाके विश्वम क्रि किना 
खानिन्‌); कि विश्रम नां कव्विनऽ बोभाव (कान करि 
नाडे। जोमौत्र जौवदनत णममोदमव्र षन] उड ५ कडिनी 
लिर्थिवक्त कल्िलाम। रं मंममा्म खमि अनक नून 
जिनिय भिरि, ख्ठानभिगोमा चामु व बटनकं भिषग | 
मभूम-अशर९ ममक मकर किक त्‌] कोन, केषा्ड आभि 
आनक्‌ नून मश्वं पनाम । 


>१२ मात्रिक] 


यि मि नि नि वि वि 


(म सो रेद्‌, (नाणिलमव्र चयन कि र्षेन }\ पनिद 
श्डेट्ट (मकि ब्रक) गेय, न (मङेशोटनङे छोङाव जौवन- 
नोन) (मेस र्टेग्राष्ट} कानेन निम) कि यथन< विम) 
या7ष्टन, वरन कि मभूरटन बुद्रिग्रा (वष्ङष्डाष्टन, न 
८मठेयाटनठे ठरव्‌ गदा ङ्क्ष} कानेन निद्रमो (कान्‌ 
(मत्‌ (लाक, ऊत वोष्छौ (कोथाग--धकृथ) कि ८कृनन्नि 
खमि कार्ड नीकिवि न) 

मटन ष्म, लकमनि 4 मव कानिड नाविद्‌। याभा भन 
वनिःृडःष्ट ८नाणिनिम्‌ नष्टे ष्य नाड, (म यादो ८म वक्र नाडे- 
ग्रा) कानेन निद्या (वाश कति ययन वषम) खाद्षटन। 
ठका जरां नैख्डि, रेफात्‌ मन. समौ माङ्म्‌, अषु 
वष्ठानिक कावीावल्लौ, यनक छानन्शषा, ऊङ्‌ 4केनिष 
सन्मम € अडाफादौत ठेव ठङात मौय निषत्त 
छका-ठाकरात्‌ ठेःकटम (कारि ८काएि नमत कवि्रच्ठि। 


मम 


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